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वक्त की नब्ज: बुरे वक्त में सियासत

पायलट को राजस्थान सरकार को अस्थिर करना ही था, तो कोई ऐसा समय चुनते जब देश के सामने इतनी गंभीर समस्याएं न होतीं। अशोक गहलोत को भी थोड़ी समझदारी से बोलना चाहिए था। पायलट के बारे में राजस्थान के मुख्यमंत्री ने इतनी अनाप-शनाप बातें कही हैं कि उन्हें कांग्रेस 'हाई कमान' को सार्वजनिक तौर पर टोकना पड़ा।

Rajasthan, Congress government, Sachin pilotराजस्थान में कांग्रेस सरकार के आपसी मतभेद में सुधार की उम्मीद नेताओं की बातचीत में ही है। जनता के हित में सचिन पायलट को सही निर्णय जल्द लेना होगा।

मेरे गांव में पिछले सप्ताह खबर मिली अचानक कि पूरे जिले में अगले दस दिन के लिए पूर्ण बंदी होने वाली है। चार दिन की जो मोहलत मिली हमें, उसमें परेशान लोगों की अफरातफरी दिखी बाजारों में। संक्रमण इतना बढ़ गया है कि सब्जी और राशन की दुकानें भी बंद रहेंगी, इसलिए परेशान थे हम सब दस दिन का राशन खरीदने के लिए। इस ‘लोकल लॉकडाउन’ पर जिला प्रशासन उतर आया है, इसलिए कि गांवों में अस्पताल नहीं हैं, जिनमें कोविड मरीजों का इलाज हो सके और जिस शहर से मेरा गांव बीस किलोमीटर दूर है, उसके अस्पतालों में अब जगह मिलनी मुश्किल हो गई है। महाराष्ट्र के इस छोटे गांव में मैं रह रही हूं पिछले चार महीनों से और पहली बार इस सख्ती से यहां लॉकडाउन लगाया गया है, सो एक अजीब किस्म की घबराहट फैल गई है, जिसमें मायूसी भी है।

इस ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को कोविड का जरूरत से ज्यादा डर रहा है शुरू से, सो काफी सावधानी लोगों ने बरती है। बाहर जाने से पहले लोग मास्क पहनते हैं और बाहर से आने वाले लोगों से दूर रहते हैं, सो किसी को समझ नहीं आ रहा है कि महामारी पर नियंत्रण क्यों नहीं हुआ है अभी तक। मायूसी इसलिए भी फैल रही है, क्योंकि कई लोगों का आर्थिक हाल अब इतना कमजोर हो गया है कि छोटे दुकानदार और कारोबारियों को लगने लगा है कि महामारी से बच भी गए, तो गरीबी के शिकंजे से नहीं बच पाएंगे। समुंदर किनारे इस क्षेत्र में पर्यटन पर निर्भर हैं ज्यादातर लोग। मुंबई से पर्यटक बरसात के मौसम में भी आते हैं, लेकिन इस साल पहले लॉकडाउन लगने के बाद से पर्यटक बिल्कुल नहीं आए हैं।

आर्थिक मंदी के इस दौर में जब खबर मिली राजस्थान की राजनीतिक समस्याओं की, तो मुझे पहले तो यकीन नहीं हुआ कि कोई भी देशभक्त राजनेता इस तरह की रद्दी राजनीति कर सकता है ऐसे समय, जब इस चीनी विषाणु के अलावा लद्दाख में चीन इतनी बड़ी समस्या बना हुआ है। कैसे लोग हैं, जो राजनीतिक अस्थिरता ऐसे समय फैलाने में लगे हुए हैं? टीवी चर्चाओं में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता हर शाम एक-दूसरे पर दोष डालते हैं। कोई कहता है कि सचिन पायलट बगावत न करते, अगर आश्वासन न मिला होता कि उनको मुख्यमंत्री बनाया जाएगा भाजपा के समर्थन से। तो भाजपा के प्रवक्ता कहते हैं कि जो हो रहा है, वह कांग्रेस का अंदरूनी मामला है, क्योंकि सचिन पायलट शुरू से नाराज हैं, इसलिए कि उनको मुख्यमंत्री बनने की उम्मीद थी, जो पूरी नहीं हुई।

यह बात अगर सही है, तो सचिन पायलट अपने विधायकों के साथ हरियाणा सरकार की शरण में क्यों हैं? भारतीय जनता पार्टी ने कोविड का दौर शुरू होने से पहले क्या मध्यप्रदेश की सरकार नहीं गिराई थी ज्योतिरादित्य सिंधिया को अपने दल में भर्ती करके? यहां महाराष्ट्र में क्या प्रधानमंत्री की सहायता लेकर आधी रात को देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री की शपथ नहीं ले ली थी पिछले साल के चुनावों के बाद? जबसे यह चाल नाकाम रही और शिव सेना ने बाजी मार ली, तबसे फडणवीस एक अजीब किस्म की नकारात्मक आलोचना करने में लगे रहे हैं। सरकार की हर कदम पर नुक्ताचीनी करते हैं, लेकिन इस तरह जैसे कि उनको आम जनता की परवाह नहीं, सिर्फ सत्ता में लौटने की हो।

कहने का मतलब है कि गंदी राजनीति के हमाम में सब नंगे हैं। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस में फर्क इतना है कि उनके पास सत्ता भी है और एक अति-ताकतवर प्रधानमंत्री भी और कांग्रेस के पास सिर्फ एक शाही परिवार, जो इतना बौखलाया हुआ दिखता है आज कि उनके करीबी भी कांग्रेस छोड़ कर भाग रहे हैं। वफादार अगर हैं तो सिर्फ मणिशंकर अय्यर जैसे चापलूस लोग, जो खुल कर कहते हैं कि जिनको रहना है कांग्रेस में उनको स्वीकार करना होगा कि नेहरू-गांधी-वाड्रा परिवार के बिना कांग्रेस है ही नहीं। उनका जब लेख मैंने इंडियन एक्स्प्रेस में पढ़ा पिछले हफ्ते, तो सचिन पायलट के साथ थोड़ी-बहुत हमदर्दी महसूस होने लगी मुझे, लेकिन कुछ क्षणों के लिए ही।

पायलट को राजस्थान सरकार को अस्थिर करना ही था, तो कोई ऐसा समय चुनते जब देश के सामने इतनी गंभीर समस्याएं न होतीं। ऐसा कहने के बाद लेकिन यह भी कहना जरूरी है कि अशोक गहलोत को भी थोड़ी समझदारी से बोलना चाहिए था। पायलट के बारे में राजस्थान के मुख्यमंत्री ने इतनी अनाप-शनाप बातें कही हैं कि उन्हें कांग्रेस ह्यहाई कमानह्ण को सार्वजनिक तौर पर टोकना पड़ा। राजस्थान में कब तक सुरक्षित रहेगी उनकी सरकर, कहना मुश्किल है। यह भी कहना मुश्किल है कि सचिन पायलट अब कहां जाएंगे।

राजस्थान सरकार को अस्थिर करने में लेकिन अगर भारतीय जनता पार्टी का हाथ है, तो प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी है हस्तक्षेप करके इस चाल को रोकना। माना कि राजनीति में इस तरह की चीजें होती आई हैं और कांग्रेस के दौर में तो बहुत बार राज्य सरकारों को गिराया गया है, लेकिन जिस बुरे वक्त से देश आज गुजर रहा है, शायद ही पहले कभी गुजरा हो। कोविड के मरीज अब दस लाख से ज्यादा हो गए हैं। इस महामारी का फैलना अगर हम रोक भी लेते हैं अगले कुछ महीनों में, तो फौरन आर्थिक मुसीबतों का पहाड़ देश पर गिरने वाला है। जिस जगह मैं हूं वहां अभी से लोगों को चिंता होने लगी है कि कई हजार लोग, जो छोटे कारोबार चला कर गुजारा करते थे, अब वापस गरीबी की रेखा के नीचे गिरने वाले हैं। बेरोजगारी, बीमारी, भुखमरी के भूत मंडराने लगे हैं अभी से। क्या यह समय है गंदे राजनीतिक खेलों के खेले जाने का?

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