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वक्त की नब्जः नए भारत के नए नायक

सबसे जाहिर उनकी पहचान यह है कि वे इस्लाम और मुसलमानों से नफरत करते हैं। उनकी नजरों में भारत के जितने भी मुसलमान नागरिक हैं, उन पर शक करना चाहिए, क्योंकि सबके सब देशद्रोही हैं, चुपके से पाकिस्तान से प्रेम करते हैं।

bulandshahr police actionयूपी के बुलंदशहर में जूते के दुकानदार के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की है। (फोटो – सोशल मीडिया)

पहले कुछ किस्से नए भारत के। पिछले सप्ताह एक जूतों के दुकानदार को पुलिस ने गिरफ्तार किया। उसका अपराध था कि जिन सस्ते जूतों को वह दो वक्त की रोटी कमाने के लिए बेच रहा था, उनमें कुछ ऐसे थे, जिनके तलवों पर ‘ठाकुर’ लिखा था। जाहिर है कि ये शब्द उसने लिखवाया होगा, जिसके पास जूतों का कारखाना था, लेकिन मोहम्मद नासिर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया सिर्फ इसलिए कि उसने अनजाने में जूता बेचा बजरंग दल के किसी कार्यकर्ता को, जिसने थाने में जाकर शिकायत लिखवाई कि उसकी ‘धार्मिक भावनाओं’ को चोट पहुंची है जूतों के तलवों पर ठाकुर शब्द पढ़ कर।

नए भारत में हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को चोट अधिक पहुंचती है, जब उनका पाला पड़ता है किसी मुसलमान से। सो, मोहम्मद फारूकी नाम के एक हास्य अभिनेता को हिरासत में लिया गया पिछले दिनों सिर्फ इसलिए कि उसके श्रोताओं में से किसी ने शिकायत की कि उसने अपने शो में हिंदू देवताओं का मजाक उड़ाया था। इसका कोई वीडियो नहीं पेश किया गया है सबूत के तौर पर, लेकिन फारूकी को जमानत अभी तक नहीं मिली है।

तीसरा किस्सा भी उत्तर प्रदेश से है। किसी पत्रकार ने बजरंग दल के कुछ लोगों से जब पूछा कि जिन हिंदू लड़कियों को वे ‘लव जिहाद’ के नाम पर मुसलिम मर्दों से बचाते हैं, उनका बाद में क्या होता है। जवाब मिला कि उनकी शादी फौरन करवा देते हैं किसी ‘अपने’ (यानी हिंदू) आदमी से।

ऐसा नहीं कि इस तरह के लोग ‘पुराने’ भारत में नहीं हुआ करते थे। ऐसा भी नहीं कि इस तरह की घटनाएं सिर्फ ‘नए भारत’ में घटने लगी हैं, लेकिन इन किस्सों से मैंने इस लेख की शुरुआत इसलिए की है, क्योंकि इस तरह के लोग और इस तरह की घटनाएं ‘नए भारत’ में कुछ ज्यादा हावी हो गए हैं और जो लोग इन घटनाओं को अंजाम देते हैं वे अक्सर मोदी भक्त होते हैं।

मेरे साथ इनका वास्ता पुराना है सोशल मीडिया पर। जब भी ऐसी कोई घटना घटती है, मुझे ट्विटर पर धमकाने के अंदाज में ट्वीट करके कहा जाता है कि इस नए भारत की मुझे आदत शीघ्र ही डालनी होगी, वरना मेरे जैसे लोगों के लिए ‘न्यू इंडिया’ में कोई जगह नहीं होगी। धमकी वाले ट्वीट अक्सर आते हैं मेरी टाइमलाइन पर इस तरह की भाषा में। ‘आप मोदी का विरोध करना बंद कीजिए, वे जो भी कर रहे हैं भारत के लिए अच्छा कर रहे हैं। अधिकतर देशवासियों की दृष्टि में, कठिनाई सिर्फ आप जैसे ‘लटयन्स’ वामपंथियों को होती है’।

‘न्यू इंडिया’ में इस तरह के लोग राष्ट्रभक्त माने जानते हैं, सो चूंकि मेरा काम है राजनीतिक प्रवृत्तियों पर नजर रखना और उनका विश्लेषण करना, मैं आज आपके सामने पेश कर रही हंू नए भारत के इन नए नायकों का चित्र। क्या है इनकी पहचान? क्या हैं इनके चिह्न? सबसे जाहिर उनकी पहचान यह है कि वे इस्लाम और मुसलमानों से नफरत करते हैं। उनकी नजरों में भारत के जितने भी मुसलमान नागरिक हैं, उन पर शक करना चाहिए, क्योंकि सबके सब देशद्रोही हैं, चुपके से पाकिस्तान से प्रेम करते हैं।

नए भारत के इन नए नायकों की दूसरी पहचान है कि महिलाओं को मर्दों की जायदाद मानते हैं। इनकी दृष्टि में महिलाओं को कोई अधिकार नहीं है अपना वर स्वयं ढूंढ़ने का, सो जब कोई हिंदू लड़की अपना पति खुद चुन कर किसी मुसलमान लड़के से शादी करती है, ये लोग अपना अधिकार मानते हैं इस तरह की महिलाओं कि शादियां जबर्दस्ती तोड़ कर उस पर अपना हक जमाना। अब भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों में उनको कानूनी अधिकार दिलवाया जा रहा है धर्मपरिवर्तन रोकने के बहाने।

भारत का संविधान हर नागरिक को पूरा अधिकार देता है अपनी इच्छा से शादी करने का भी, और अपना धर्मपरिवर्तन करने का भी, लेकिन इस बात को नए भारत के ये नायक नहीं स्वीकार करते हैं।

इनकी अलग पहचान एक यह भी है कि ये लोग बुद्धिजीवियों से घृणा करते हैं। इनमें शायद ही कोई मिलेगा आपको, जिसने स्कूल या कॉलेज छोड़ने के बाद कोई किताब पढ़ी हो। प्राचीन काल की प्रशंसा बहुत करते हैं, लेकिन इसके बारे में इतना कम पढ़ा है इन्होंने कि इनसे सवाल कोई करे भारत की प्राचीन संस्कृति के बारे में, उस समय के साहित्य के बारे में तो इनके पास कोई जवाब नहीं होता है।

इनके मन में एक ही बात बिठा दी गई है कि भारत ‘सोने की चिड़िया’ था मुसलमानों के आने से पहले और उस काल को वापस लाकर दिखाएंगे मोदी।
अरे हां, भूल ही गई थी मैं। उनकी सबसे बड़ी पहचान है कि वे नरेंद्र मोदी के इतने कट्टर भक्त हैं कि उनकी किसी नीति या किसी कार्य पर मेरे जैसा कोई राजनीतिक विश्लेषक आलोचना करने की हिम्मत दिखाता है, तो उसको फौरन डाल दिया जाता है ‘देश के गद्दारों’ वाली श्रेणी में।

देशभक्ति का मतलब उनके लिए मोदी भक्ति है। कहने का मतलब मेरा यह है कि इस ‘न्यू इंडिया’ के अब से बड़े हीरो वही हैं, जो दिन-रात मोदी की प्रशंसा करते हैं। मोदी भक्ति और देश भक्ति में जो अंतर कभी हुआ करता था, वह अब मिट गया है। सो, सवाल यही रह जाता है कि जो सोच मोदी के भक्तों की है, क्या वही सोच भारत के प्रधानमंत्री की भी है?

मैंने जब भी यह सवाल मोदी के किसी भक्त से पूछा है, तो जवाब यही मिला है कि मोदी कभी कोई गलत काम कर ही नहीं सकते हैं, क्योंकि उनसे अच्छा प्रधानमंत्री कभी इस देश का न हुआ है और न कभी होगा। नए भारत में आपको चैन से रहना है, तो मोदी भक्त बन जाना आवश्यक है।

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