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वक्त की नब्ज: जो सवालों से डरते हैं

देशभक्ति बहुत बड़ी चीज है। देश से प्यार जिसको नहीं है, वह वास्तव में देशद्रोही कहलाने लायक है। लेकिन जब देशभक्ति को हथियार बना कर अपने देशवासियों पर इस्तेमाल किया जाता है, तो देशभक्ति न रह कर वह जुल्म बन जाती है।

Congress, Rahul Gandhi, COVID-19राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर निशाना साधा है। (फाइल फोटो)

नरेंद्र मोदी के दौर में देशभक्ति का मतलब बदल गया है। परिवर्तन यह आया है कि जो फासले हुआ करते थे देश और सरकार शब्दों के मतलब के बीच, वे धीरे-धीरे इतने कम हो गए हैं कि जब भी सरकार पर कोई संकट आया है, उसकी अपनी गलत नीतियों के कारण और इन नीतियों की आलोचना हुई है, तो देशभक्ति का हवाला देकर आलोचकों के मुंह बंद कर दिए गए हैं। जो लोग थोड़ी हिम्मत दिखा कर आलोचना की जिद ठान लेते हैं, उनके खिलाफ पूरी मुहिम चलाई जाती है, जिसका नेतृत्व करते हैं मोदी के मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता। इस मुहिम में प्यादे बनते हैं सोशल मीडिया पर मोदी के लाखों समर्थक।

यह साल गंभीर संकटों से भरा रहा है मोदी के लिए, कुछ उनकी अपनी गलतियों के कारण, कुछ चीन से आई इस महामारी के कारण और हाल में चीन के हमलों के कारण। साल के पहले दो महीनों में नागरिकता कानून में संशोधन के विरोध में मुसलमान हमारे शहरों की सड़कों पर उतर आए थे। दिल्ली के जामिया मिल्लिया में जब विरोध प्रदर्शन हुए और पुलिस ने छात्रों के साथ ज्यादतियां की, तो शाहीनबाग में मुसलिम महिलाओं का धरना शुरू हुआ।

प्रधानमंत्री अगर शाहीनबाग में अपने गृहमंत्री को भेज कर इन औरतों से बातचीत की कोशिश करते, तो मुमकिन है कि उनका आंदोलन इतना लंबा न चलता। पर शायद इसलिए कि दिल्ली में चुनाव होने वाले थे, जिसमें गृहमंत्री का इरादा था शाहीनबाग के जरिए हिंदू-मुसलिम नफरत फैलाने का, मुसलिम महिलाओं के इस प्रदर्शन को रोका नहीं गया। दिल्ली चुनावों के बाद नफरत फैलती रही और हिंदू-मुसलिम दंगे दशकों बाद हुए देश की राजधानी में। जब मेरे जैसे कुछ लोगों ने कहा कि ऐसा हुआ मोदी सरकर की गलत नीतियों के कारण, तो हमको गद्दार कहा गया। देशभक्त उन्ही को माना गया, जिन्होंने शाहीनबाग को ‘छोटा पाकिस्तान’ कहा।

हिंदुओं और मुसलमानों में तनाव चरम सीमा पर था, जब कोविड-19 ने देश में कदम रखा। सो, इस महामारी का दोष भी शुरू में मुसलमानों पर डालने की कोशिश हुई। एक बार फिर देशभक्ति का हवाला देकर अफवाहें फैलाई गईं देश भर में कि तबलीगी जमात के सम्मेलन में आए मुसलमानों ने अस्पतालों में जानबूझ कर थूक कर महामारी को फैलाया है। अब जब सारे देश में फैल चुकी है महामारी, ऐसा कोई नहीं कह रहा है। लेकिन प्रवासी मजदूरों के हाल पर कोई कुछ कहता या ध्यान दिलाता है कि पूर्णबंदी घोषित करने से पहले इनके बारे में ध्यान नहीं दिया गया, तो उस पर देशद्रोही का आरोप चिपकाया जाता है। जब बरखा दत्त ने उनकी दर्द भरी कहानियां उनके साथ पैदल चल कर दुनिया के सामने रखी, तो उसको खूब बदनाम किया मोदी के समर्थकों ने। सोशल मीडिया पर उसको ‘बक-बक बरखा’ कह कर जलील किया गया, देशद्रोही कहा गया।

महामारी से जूझ रहा था देश कि लद्दाख में चीन ने हमारी सरजमीन पर अपने सैनिकों को भेजना शुरू किया। जब हमारे बहादुर जवानों ने इस घुसपैठ को रोकने कि कोशिश की, तो उन्होंने ऐसा बर्बर हमला किया जैसे ठग और गुंडे करते हैं, सेना के सिपाही नहीं। गलवान घाटी में हुए इस बर्बर हमले की निंदा सारी दुनिया में हुई है, लेकिन अगर विपक्ष का कोई राजनेता या मीडिया का कोई व्यक्ति सवाल पूछने की हिम्मत दिखाता है, तो उस पर फौरन गद्दारी का आरोप लग जाता है।

देशभक्ति की चादर में ढकने की कोशिश उस कड़वे सच को अब हो रही है कि गलवान घाटी में आज भी चीन अपनी आक्रामक हरकतें कर रहा है और कई जगहों पर ऐसा हो रहा है उन क्षेत्रों में, जिन्हें हम अपना मानते हैं।

देशभक्ति बहुत बड़ी चीज है। देश से प्यार जिसको नहीं है, वह वास्तव में देशद्रोही कहलाने लायक है। लेकिन जब देशभक्ति को हथियार बना कर अपने देशवासियों पर इस्तेमाल किया जाता है, तो देशभक्ति न रह कर वह जुल्म बन जाती है। ऐसा कुछ ज्यादा ही होने लगा है नरेंद्र मोदी के राज में। सो, जब बजाज आटो के मालिक राजीव बजाज ने ध्यान दिलाया कि पूर्ण बंदी अगर इसी तरह चलती रही, तो लोग बीमारी से नहीं भूख से मरने लगेंगे, तो सोशल मीडिया पर मोदी समर्थक उनके बारे में भी अनाप-शनाप बातें करने लगे। देशद्रोही का इल्जाम नहीं लगा है अभी तक, लेकिन इशारा यही है कि वे देश के भले के लिए नहीं बोल रहे हैं।

सच तो यह है कि जो लोग संकट के समय सवाल करने की हिम्मत दिखाते हैं, वही असली देशभक्त हैं। जो ध्यान दिला रहे हैं आर्थिक संकट की तरफ, वे देश की सेवा कर रहे हैं। जो प्रवासी मजदूरों के हाल की तरफ ध्यान दिला रहे हैं, वे असली देशभक्त हैं। चीन के साथ तकरीबन युद्ध की इस स्थिति में जब पंजाब के मुख्यमंत्री ने सवाल पूछे प्रधानमंत्री से, तो उन्होंने देशभक्ति के कारण पूछे थे। समस्या यह है कि मोदी की इस ‘न्यू इंडिया’ में देशभक्ति का मतलब इतना बदल गया है कि ऐसा लगने लगा है कि देशभक्त सिर्फ उनको कहा जाएगा, जो सरकार की न नीतियों की आलोचना करते हैं और न किसी गलती की निंदा।

इस साल इतने संकट आए हैं देश के सामने कि प्रधानमंत्री अकेले उनका समाधान नहीं ढूंढ़ पाएंगे। यह ऐसा समय है जब उनकी असली मदद कर सकते हैं वही लोग, जिनको उनके समर्थक और प्रशंसक देशद्रोही कहते फिर रहे हैं। मोदी मोह में इतने अंधे हैं ये लोग कि यह भी नहीं देख पा रहे हैं कि सरकार की आलोचना और देश की आलोचना में बहुत अंतर है। सरकार सरकार है, देश नहीं।

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