Vakat ki Nazar artical by Tavleen Singh about government Silence on karni sena Violence - वक्त की नजर- हिंसा पर चुप्पी - Jansatta
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वक्त की नजर- हिंसा पर चुप्पी

'करणी सेना ने पिछले एक वर्ष में बार-बार साबित किया है कि उनके सैनिक आतंकवादी हैं, वीर नहीं, और आतंकवादियों की जगह जेल में होनी चाहिए, लेकिन जेल में इस हिंसक संस्था के सरगना अभी तक नहीं हैं, क्योंकि उनको समर्थन मिलता रहा है भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्रियों का, मोदी सरकार के मंत्रियों का।'

Author January 28, 2018 5:49 AM
पीएम मोदी

जीब-सा माहौल था दावोस में इस साल हम भारतीयों के लिए। पहले तो हम इस बर्फ से ढंके शहर में खूब इतरा के चले, इसलिए कि गर्व हुआ जब हमारे प्रधानमंत्री को इतना सम्मानित किया गया। यहां आए चालीस से ज्यादा प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपतियों में से भारत के प्रधानमंत्री को सम्मेलन का पहला भाषण देने का सम्मान दिया गया। उनका भाषण यहां आए विश्व के सबसे बड़े उद्योगपति, बुद्धिजीवी और पत्रकारों को बहुत भाया, क्योंकि नरेंद्र मोदी ने याद दिलाया कि प्राचीन भारत के ऋषि-मुनियों के समय से संदेश रहा है वसुधैव कुटुंबकम् का, शांति का। विश्व आर्थिक मंच के इस वार्षिक सम्मेलन का विषय इस वर्ष था- देशों के बीच की दरारें मिटाना। सो, भारत के प्रधानमंत्री का यह कहना कि इस कार्य में भारत की भूमिका महत्त्वपूर्ण हो सकती है, सबको अच्छा लगा।

फिर देखते-देखते सब बदल गया। अपना भाषण देने के बाद प्रधानमंत्री देश के लिए रवाना हुए ही थे कि वह वीडियो देखने को मिला, जिसमें करणी सेना के वीर जवानों ने स्कूल से घर लौटते बच्चों की बस पर हमला बोला। छोटे बच्चों की चीखें कानों में गूंज रही थीं कि टीवी पर आकर मोदी के मंत्रियों ने इस शर्मनाक घटना को ठीक बताने की कोशिश की। ‘बात यह है कि ऐसी फिल्में बनती क्यों हैं, जिनसे किसी समूह की भावनाओं को चोट पहुंचे।’ विदेश राज्यमंत्री जनरल विजय कुमार सिंह के ये शब्द सुन कर मेरे कानों में उन छोटे बच्चों की चीखें और जोर से गूंजने लगीं। सोचा कि प्रधानमंत्री इस बार जरूर अपनी चुप्पी तोड़ कर इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करेंगे। लेकिन इस लेख के लिखे जाने तक ऐसा नहीं हुआ है। शायद इसलिए कि दिल्ली लौटने के बाद मसरूफ हो गए थे आसियान से आए राजनेताओं के स्वागत में, गणतंत्र दिवस की तैयारियों में।

इस लेख को दावोस में लिख रही हूं। कल शाम यहां आए भारतीय उद्योगपतियों की तरफ से एक इंडिया नाइट मनाई गई थी, जैसे हर साल मनाई जाती है। इस जश्न में पत्रकार थे, भारत सरकार के आला अधिकारी थे, मुख्यमंत्री थे और विदेशी मेहमान थे। कई लोगों से बातें हुर्इं और सबको एक गहरी शर्मिंदगी महसूस हो रही थी कि हम ऐसे देश के वासी हैं, जहां छोटे बच्चों पर हमले किए जा सकते हैं, सिर्फ इसलिए कि कुछ लोगों को गुस्सा था एक फिल्म को लेकर। इस शर्मिंदगी में प्रधानमंत्री का भाषण भूल गए हम सब और जो मुट्ठी भर विदेशी आए थे इस इंडिया नाइट के जश्न में उन्होंने जब हमको करणी सेना के बारे में पूछा, हमारे पास जवाब नहीं थे उनके सवालों का।

करणी सेना का पहला हमला जयपुर में हुआ था, साल भर पहले जब संजय लीला भंसाली पद्मावत की शूटिंग कर रहे थे। इस हमले के बाद अगर राजस्थान सरकार ने इन हिंसक गुंडों को हिरासत में ले लिया होता, तो शायद करणी सेना का नाम तक सुनने को नहीं मिलता आज। ऐसा नहीं हुआ। उलटा राजस्थान की मुख्यमंत्री ने बयान दिया कि भंसाली की इस फिल्म को राजस्थान में नहीं दिखाया जाएगा। ऐसा जब हुआ सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले के बाद, जिसमें इस फिल्म को दिखाने की पूरी इजाजत मिली थी, तो भारतीय जनता पार्टी के अन्य मुख्यमंत्रियों के हौसले बुलंद हुए। इस फिल्म को न दिखाने का आदेश आया महराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों की तरफ से। करणी सेना के हौसले बुलंद न होते तो क्या होता? तलवारें लेकर पहुंचे टीवी चैनलों में और जब पत्रकारों ने उनकी हिंसा को लेकर सवाल पूछे, तो धमकाने के अंदाज में सवालों से जवाब दिए- ‘आप बताएं कि आप रानी पद्मिनी के साथ हैं कि अलाउद्दीन खिलजी के साथ।’

बेतुके सवालों में, शर्मिंदा करने वाली हिंसा में असली मुद्दा गायब-सा हो गया है। असली मुद्दा है एक ही। मुख्यमंत्री जब शपथ लेते हैं, तो भारत के संविधान की रक्षा करने की लेते हैं और बिना द्वेष या पक्षपात से राज करने का वादा करते हैं। क्या ऐसा कर रहे हैं भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री? साफ दिखता है कि ऐसा नहीं कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रधानमंत्री चुप हैं। क्यों? क्या उनको अभी तक दिखा नहीं है कि दावोस आकर वसुधैव कुटुंबकम का उनका संदेश खोखला लगेगा अब जब हम अपने ही देश के अंदर एक कुटुंब होने का ढोंग भी नहीं कर सकते हैं? क्या प्रधानमंत्री को दिखता नहीं है कि जिन देशों में स्कूल की बसों पर हमले हो सकते हैं, राजमर्गों पर वाहन जलाए जा सकते हैं, सिनेमाघरों में दहशत फैलाई जा सकती है उन देशों में विदेशी निवेशक नहीं जाते हैं? विदेशी निवेशक जाते हैं उन देशों में, जहां उनका निवेश सुरक्षित हो, उन देशों में, जहां आतंकवादियों को हीरो नहीं माना जाता है।
करणी सेना ने पिछले एक वर्ष में बार-बार साबित किया है कि उनके सैनिक आतंकवादी हैं, वीर नहीं और आतंकवादियों की जगह जेल में होनी चाहिए, लेकिन जेल में इस हिंसक संस्था के सरगना अभी तक नहीं हैं, क्योंकि उनको समर्थन मिलता रहा है भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्रियों का, मोदी सरकार के मंत्रियों का।
इस समर्थन का कारण राजनीतिक है हम जानते हैं, लेकिन क्या राजनीति देश से भी ज्यादा अहमियत रखती है भारतीय जनता पार्टी के लिए? ऐसा अगर है तो वह दिन दूर नहीं, जब भारतीय जनता पार्टी की सरकारों को जनता इतिहास के कूड़ेदान में फेंक डालेगी। वैसे भी आज तकरीबन हर भारतीय जनता पार्टी शासित राज्य में यह हाल है कि आम लोग स्पष्ट शब्दों में कहने लगे हैं कि न उन्होंने परिवर्तन देखा है, न विकास। व्यक्तिगत तौर पर नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता कायम है, लेकिन कब तक रहेगी?

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