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बंदी कब तक? इस सवाल पर चैनल विभाजित दिखे! कुछ विशेषज्ञों के जरिए सुझाते कि बंदी को चरणबद्ध तरीके से धीरे-धीरे हटाना ठीक! बाकी ‘हॉट स्पॉटों’ को चिह्नित कर ‘सील’ करें! एक एंकर फिर भी कहता रहा : बंदी का जारी रहना जरूरी!

Tablighi Jammat, Corona Virus, News in Hindiतबलीगी जमात के मरकज में शामिल हुए लोगों के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद से पूरे देश में हड़कंप है।

उफ ये ‘टिक टॉक’! एक खबर कहती कि ‘टिक टॉक’ ने इतने करोड़ की मदद दी, तो दूसरी खबर कहती कि ‘टिक टॉक’ पर पैंतीस हजार ऐसे वीडियो हैं, जिनमें बहुत से पाकिस्तानी कोरोना के ‘आतंकवाद’ को फैलाने के लिए ‘छींक कला’, ‘थूक कला’ और ‘पेशाब कला’ को दिखाते रहते हैं! ‘टिक टॉक’ भारत का ‘मददगार’ है, तो इनको क्यों नहीं हटाता? एक चैनल को छोड़ कर हर एंकर, हर विशेषज्ञ मानता रहा कि तबलीगी जमात मरकज से पहले, कोरोना संक्रमण काबू में था, मरकज वालों ने सब बेकार कर दिया।

जिस दिन चैनलों में तबलीग के मौलाना साद के ‘कोरोना’ और ‘लॉक डाउन’ को इस्लाम के खिलाफ साजिश’ बताने वाले वीडियो प्रसारित हुए, उस शाम दो अंग्रेजी और कई हिंदी चैनलों में तबलीग को ‘बैन’ करने, उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई और मौलाना को तुरंत गिरफ्तार करने की मांगें उठती रहीं। चैनलों की बहसों में तबलीग के प्रवक्ता पहले मासूमियत का इजहार करते, फिर मुसलमानों को दोषी बनाने का कार्ड फेंकने लगते।

एक हिंदी एंकर ने इतना भर कहा कि अगर तबलीगी जमात ने बड़ी संख्या में इकठ्ठा होकर शहर में लागू दफा एक सौ चौवालीस को तोड़ा है, तो माफी क्यों नहीं मांगते, कानून के आगे समर्पण क्यों नहीं करते, तो तबलीग के प्रवक्ता ने मीडिया को ही धमकी दे डाली कि तुम्हारा मीडिया हमारे खिलाफ ऐसे ही जहर उगलता रहा, तो फिर तुम्हारे रिपोर्टर का घर से निकलना मुश्किल हो जाएगा…

बहरहाल, तबलीग प्रवक्ताओं को छोड़ दें, तो ज्यादातर मुसलमान प्रवक्ता सरकार के ‘लॉक डाउन’ के समर्थन में ही दिखे! एंकर जब तबलीग पर सवाल उठाते, तो भाजपा प्रवक्ता तबलीग को जम कर कोसते दिखते, लेकिन ज्यों ही एंकर ‘सेल्फ क्वारेंटाइन’ में रह रहे ‘मौलाना को गिरफ्तार करने’ को कहते, तो सीधा जवाब न आता! बहुत से उत्तेजक मुद्दे कुछ देर सुलगाए जाने के बाद इसी तरह सुलाए जाते रहते हैं!कोरोना से निपटें कि तबलीग से? और तबलीगी जमात! यानी ‘जहं जहं चरण परे संतन के तहं तहं पनिया ढार!’

खबरें बतातीं कि इस्लाम के ये ‘विद्वान’ जहां जहां गए, वहां वहां कोरोना का प्रसाद बांटते गए। जिन अस्पतालों में इनको जांच और इलाज के लिए रखा गया, वहां वहां इलाज करने वाले डॉक्टरों पर थूक और गरिया कर, नर्सों के साथ अश्लील हरकतें करके, कहीं नंगे होकर, कहीं पेशाब कर और कहीं शौच कर इन्होंने अपनी ‘विद्वता’ में चार चांद लगा दिए और जैसे जैसे खबर चैनल उनके इस ‘वैदुष्य’ को दिखाते, वैसे वैसे वे चैनलों पर ही लाल पीले होते दिखते! और, इनके पैरोकार इसे मीडिया और सत्ता का ‘इस्लामोफोबिया’ बताते दिखते, मानो डॉक्टरों को गरियाने, थूकने, नर्सों से अश्लील हरकतें करने और खुलेआम शौच करने का काम मीडिया या सत्ता ने किया हो!

इंदौर में जब एक इलाके में किसी कोरोना संक्रमित की जांच करने डॉक्टरों और पुलिस की टीम गई, तो उस पर उस इलाके के लोगों ने पत्थर बरसा कर दौड़ाया! क्या यह भी मीडिया ने किया? यही नहीं, दिल्ली के नरेला में कुछ फ्लैटों में ‘क्वारेंटाइन’ तबलीगियों ने पेशाब से भरी बोतलें फेंकी, तो क्या वह भी मीडिया ने फेंकी?

तबलीगियों की पकड़-धकड़ के बाद कोरोना संक्रमितों की संख्या में जो अखिल भारतीय ‘उछाल’ आया, उसने समूची बंदी की ऐसी तैसी करके रख दी! महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली, यूपी, एमपी, हरियाणा, हिमाचल, पंजाब, बिहार तथा अन्य राज्यों के शहर-शहर तक तबलीगियों के आवागमन से फैली विकराल संक्रमण-लीला सामने आने लगी और संक्रमितों की संख्या अचानक पांच हजार के पार हो गई! फिर भी कुछ ‘ज्ञानीजन’ कहते भए कि यह ‘उछाल’ तो पहले से थी, अब उसे तबलीग के मत्थे मढ़ा जा रहा है!

पीएम ने दो बार चैनलों में दर्शन दिए। पहली बार उन्होंने ‘नौ बजे नौ मिनट’ के ‘प्रकाशोत्सव’ के लिए जनता का धन्यवाद किया और दूसरी बार भाजपा कार्यकर्ताआें को संबोधित करते हुए ‘लंबी लड़ाई’ के लिए तैयार रहने को कहा! संकेत साफ थे!

इसके बाद हर चैनल पर यही चर्चा रही कि ‘लॉक डाउन’ कब तक और क्या ‘हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन’ यानी मलेरिया में दी जाने वाली ‘कुनैन’ इसका इलाज है? इसी बीच खबर रही कि ट्रंप जी एक ओर कुनैन की याचना कर रहे हैं, लेकिन धमकी भी दे रहे हैं कि अगर नहीं दी तो… इसे देख नए देशभक्त पिल पड़े : ये धमकी बर्दाश्त नहीं! अगले दिन ज्यों ही यह खबर आई कि कुनैन तो भेज भी दी गई और ट्रंप जी ने धन्यवाद भी दे दिया है, साथ ही उन्होंने भारतीय दवाओं के लिए बाजार भी खोल दिया है, तो जोश खाए नए देशभक्त खामोश हो गए! एक कांग्रेसी एमपी ने कहा कि संकट की घड़ी में भी भारत की ‘साफ्ट पावर’ का जलवा दिखा!

बंदी कब तक? इस सवाल पर चैनल विभाजित दिखे! कुछ विशेषज्ञों के जरिए सुझाते कि बंदी को चरणबद्ध तरीके से धीरे-धीरे हटाना ठीक! बाकी ‘हॉट स्पॉटों’ को चिह्नित कर ‘सील’ करें! एक एंकर फिर भी कहता रहा : बंदी का जारी रहना जरूरी! वृहस्पतिवार की शाम तक देश भर के ‘हॉट स्पॉट’ (सघन संक्रमित इलाकों) की सूचियां दिखने लगीं! खबरें बताने लगीं कि शुक्रवार को राज्यों से बात करके पीएम करेंगे फैसला कि ‘लॉक डाउन’ कब तक? आगे आगे देखिए होता है क्या!

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