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वक्त की नब्जः सम्मान पर बेमानी सवाल

गुजरात के 2002 वाले दंगों के बाद लोगों ने अमेरिकी प्रशासन के ऊंचे हिस्सों में इतना बदनाम किया मोदी को कि उनको इस देश का वीजा नहीं मिला था जब तक प्रधानमंत्री नहीं बने। मोदी की जैसे-जैसे इज्जत बढ़ी है विदेशों में प्रधानमंत्री बनने के बाद वैसे-वैसे उनके आलोचकों की ताकत कम होती गई है।

Author Updated: September 22, 2019 2:48 AM
मोदी के प्रशंसक बहुत हैं अगर अमेरिका में तो आलोचक भी काफी हैं और इतने ताकतवर हैं यह आलोचक कि उन्होंने मोदी को अमेरिका आने से रोक रखा था एक पूरे दशक तक।

नरेंद्र मोदी जब अगले हफ्ते अमेरिका पहुंचेंगे तो उनका एक बार फिर उनके प्रवासी भारतीय प्रशंसक ऐसा स्वागत करने जा रहे हैं जैसा 2014 में किया था जब प्रधानमंत्री बन जाने के बाद मोदी पहली बार अमेरिका गए थे। इस बार न्यूयॉर्क में नहीं, ह्यूस्टन में तैयारियां हो रही हैं उनके स्वागत सम्मेलन की, जिसमें अनुमान है कि साठ हजार लोग शामिल होंगे। इतना बड़ा सम्मेलन करने की तैयारी देख कर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी इसमें शामिल होने की घोषणा कर चुके हैं। बड़ी बात यह है और खूब उछाली गई है भारत के मीडिया में। खुशियों के इस माहौल में लेकिन एक छोटा-सा काला बादल मंडराने लग गया है।
मोदी के प्रशंसक बहुत हैं अगर अमेरिका में तो आलोचक भी काफी हैं और इतने ताकतवर हैं यह आलोचक कि उन्होंने मोदी को अमेरिका आने से रोक रखा था एक पूरे दशक तक। गुजरात के 2002 वाले दंगों के बाद इन लोगों ने अमेरिकी प्रशासन के ऊंचे हिस्सों में इतना बदनाम किया मोदी को कि उनको इस देश का वीजा नहीं मिला था जब तक प्रधानमंत्री नहीं बने। मोदी की जैसे-जैसे इज्जत बढ़ी है विदेशों में प्रधानमंत्री बनने के बाद वैसे-वैसे उनके आलोचकों की ताकत कम होती गई है पिछले पांच सालों में, लेकिन वे अब फिर से अपनी ताकत का प्रदर्शन करने में लग गए हैं।

अगले हफ्ते जब मोदी न्यूयॉर्क में होंगे तो उनको बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने अपना ‘गोल्कीपर्ज ग्लोबल अवार्ड’ देकर सम्मानित करने की तैयारी की है। यह सम्मान ऐसे लोगों को दिया जाता है, जिन्होंने स्वास्थ्य या शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तन लाने का काम किया है। मोदी को दिया जा रहा है ‘स्वच्छ भारत’ अभियान की सफलता को देख कर। वास्तव में उनको निजी तौर पर इस अभियान की सफलता का श्रेय मिलना चाहिए। इसलिए कि वे पहले प्रधानमंत्री हैं पिछले सत्तर सालों में, जिहोंने खुले में शौच करने की पुरानी और खतरनाक आदत को रोकने की बात खुल कर की है।

बिल गेट्स ने हाल में एक अंग्रेजी अखबार को एक इंटरव्यू देते हुए कहा कि यह ऐसी चीज है जिसका जिक्र तक करना नहीं चाहते हैं विश्व के राजनेता। बावजूद इसके कि वह जानते हैं कि इसके कारण खतरनाक बीमारियां फैलती हैं। भारत में इसके कारण लाखों बच्चे पांच साल की उम्र तक पहुंचने के पहले ही मर जाते हैं। जो जिंदा रहते हैं, अक्सर जिंदगी भर ऐसी बीमारियों के शिकार रहते हैं जो उनको बचपन में मिली हैं खुले में शौच करने की वजह से।
मोदी ने अपने पहले शासनकाल में सबसे बड़ी सफलता इस अभियान को लेकर हासिल की है। और इस अभियान की सफलता का सबसे बड़ा कारण है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने लालकिले से अपने पहले भाषण में स्वच्छता की बात की थी। उन्होंने कहा था कि हमें प्रयास करना चाहिए कि दो अक्तूबर 2019 को भारत सरकार ऐलान कर सके कि भारत के हर जिले में अब खुले में शौच करने की प्रथा रोक दी गई है। इस घोषणा की तैयारियां शुरू हो गई हैं साबरमती आश्रम में। इसलिए मोदी की आलोचना कई अन्य चीजों को लेकर हो सकती है, लेकिन स्वच्छ भारत को लेकर नहीं।

मगर उनके आलोचक इस बात को मानने को बिल्कुल तैयार नहीं हैं, इसलिए उन्होंने कई हफ्तों से बिल गेट्स फाउंडेशन पर हर तरह से दबाव डाला है मोदी का यह सम्मान वापस लेने के लिए। आरोपनामा भेजा है जिस पर एक लाख भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों के हस्ताक्षर हैं। महत्त्वपूर्ण अमेरिकी अखबारों में लेख लिखवाए गए हैं, जिनमें कहा गया है कि मोदी इस सम्मान के लायक नहीं हैं, इसलिए कि मानव अधिकार के क्षेत्र में उनकी छवि बहुत खराब है। इन लोगों ने मुसलिम, दलित युवकों पर गौरक्षकों की हिंसा का हवाला दिया है और कश्मीर में अनुच्छेद 370 के हटाए जाने के बाद आम लोगों की नजरबंदी का भी। यानी पूरी कोशिश हो रही है मोदी की इस अमेरिकी यात्रा पर छाए उस काले बादल को बड़े तूफान में तब्दील करने की।

इन आलोचकों की हरकतों को देख कर मुझे याद आया कि 2013 से मैंने नरेंद्र मोदी का खुल कर समर्थन क्यों किया है। याद आया मुझे कि उस साल जब मोदी ने इशारा किया पहली बार कि वे प्रधानमंत्री पद के दावेदार हैं, किस तरह मेरे कुछ वामपंथी पत्रकार बंधुओं ने चिल्ला-चिल्ला कर कहना शुरू कर दिया था कि मोदी इस पद के लायक नहीं हैं 2002 में हुए दंगों के कारण। तब मुझे उस समय गुस्सा इस बात को लेकर आया था कि ये वही लोग थे, जिन्होंने कभी राजीव गांधी के बारे में नहीं कहा था सिखों के नरसंहार के बाद कि वह भारत के प्रधानमंत्री बनने के लायक नहीं हैं। मोदी के साथ मुझे हमदर्दी उस वक्त इसलिए भी हुई थी कि उन्हें जिन दंगों को लेकर बदनाम किया जा रहा था, उस तरह के दंगे बहुत बार हुए हैं कई राज्यों में, कई शहरों में और जो मुख्यमंत्री थे उस समय, उनके नाम तक लोगों को याद नहीं हैं।

मोदी के साथ अन्याय हुआ था उस समय और अन्याय अब भी होगा अगर उनके अमेरिकी आलोचक सफल हो जाते हैं इस सम्मान को वापस करवाने में। मोदी के राज में कई गलत चीजें हुई हैं। मेरी फेहरिस्त में सबसे ऊपर है अर्थव्यवस्था को कमजोर करना नोटबंदी करके। उसका खमियाजा अभी तक हम भुगत रहे हैं। दूसरे नंबर पर इस फेहरिस्त में डालती हूं गौ-रक्षकों की हिंसा, जो शुरू में ही रोकी जा सकती थी। लेकिन जहां तक ‘स्वच्छ भारत’ की बात है, वहां यह कहना जरूरी समझती हूं कि मोदी पूरी तरह सम्मानयोग्य हैं।

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