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ये इश्क नहीं आसां

प्रधानमंत्री आए, पीएम आए, चीता लाए चीता लाए और कूनो पार्क में चीता छोड़े, चीता छोड़े, हैट लगाए हैट लगाए… शाम तक चैनलों में होती रही पीएम की वाह वाह और पीएम की हाय हाय!

ये इश्क नहीं आसां
ईडी की छापेमारी के विरोध में प्रदर्शन करते पीएफआई समर्थकों का समूह। (एक्सप्रेस फोटो: पवन खेंगरे)

फिर मोहाली स्थित चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की छात्राओं ने आपत्तिजनक वीडियो और उनके वायरल होने की खबरों ने सनसनी मचाई। दो दिन दो रात छात्र प्रदर्शन करते रहे। शुरुआती खबर रही कि एक छात्रा ने साठ छात्राओं के वीडियो बना कर अपने दोस्त को भेजे, लेकिन अगले दिन कहानी बदली कि भेजने वाली छात्रा ने सिर्फ अपने बनाए वीडियो भेजे। फिर छात्रा और उसके एक-दो मित्रों की गिरफ्तारी और कहानी खत्म!

लेकिन पंजाब सरकार का एक विज्ञापन ‘साडा कम्म बोलदा है’ हमें हिट होता दिखा। एकदम सटीक बोल और मस्त धुन, वाह! फिर एक दिन राजनीति में लड्डू युग आया। एक नेता जी के मन में लड्डू फूटे कि जो आदेश होगा, मानूंगा। यहां भी रहूंगा, वहां भी देखूंगा। इसे देख ‘बास’ जी ने इशारे से झाड़ा कि ‘एक पद एक व्यक्ति’ का फार्मूला न भूलो प्यारे, तो वे तुरंत कह उठे कि जो आज्ञा महाराज! लेकिन यहां भी एक नहीं, दो दो विघ्न! हाय!

‘भारत जोड़ो यात्रा’ चैनलों का ‘डेली फीचर’ है। गुरुवार की प्रेसवार्ता में हमें यात्रा के नायक की दाढ़ी बढ़ी दिखी और आवाज भी कुछ भारी महसूस हुई। यह उनका ‘रफ टफ लुक’ था! कहे कि हम एक मशीन से लड़ रहे हैं। अध्यक्ष पद एक विचारधारा है।

फिर एक दिन तेरह राज्यों में ‘पीएफआइ’ के नब्बे ठिकानों पर एनआइए और ईडी के छापों की खबर आई। छापों में सौ से अधिक गिरफ्तार… एक एंकर ने छह चर्चकों से पूछा कि आप ‘पीएफआइ’ को ‘आतंकवादी’ मानते हैं या नहीं, तो चार ने कहा, ‘हां’, लेकिन दो बोले कि ‘नहीं’! इतने पर भी रोने वाले रोते हैं कि बोलने की आजादी नहीं है!

इसी बीच यूपी सरकार ने पहले मदरसों, फिर वक्फ की संपत्तियों के सर्वे का आदेश देकर बड़ी खबर बनाई कि हाय हाय शुरू। पहली आपत्ति औवेसी जी ने दर्ज कराई कि मुसलमानों को ‘सिस्टेमेटिकली टारगेट’ किया जा रहा है। सभी का सर्वे करिए ना। यह ‘छोटा एनआरसी’ है। लेकिन ‘देवबंद’ के मुखिया ने साफ कहा कि मदरसों के सर्वे का हम स्वागत करते हैं…

इसी बीच चैनलों पर आई इस खबर ने चौंकाया कि तमिलनाडु के पंद्रह सौ साल पुराने मंदिर समेत एक पूरे गांव को वक्फ ने खरीद लिया है… एक चर्चक ने बताया कि यह खरीद वक्फ कानून के खिलाफ है… दूसरा बोला कि वक्फ का कानून ‘कानून’ से ऊपर है… है न पंगे वाली बात!

अब इन दो अंतर्विरोधी खबरों को देखें: इधर कुछ इस्लामिक कट्टरतावादी हिजाब को अनिवार्य करना चाहते हैं, जबकि ईरान की लाखों युवतियां अपनी इस्लामिक कट्टरतावादी सरकार के खिलाफ आंदोलन करते हुए सड़कों पर हिजाब की होली जला रही हैं, अपने केश काट रही हैं और उल्लसित होकर नाच रही हैं। हजारों युवक साथ हैं। ईरान में नई सांस्कृतिक क्रांति दस्तक दे रही है!

दूसरी खबर इंग्लैंड के ‘लेस्टर’ और फिर ‘बर्मिंघम’ से वीडियो के रूप में आती दिखती रही कि कैसे वहां के इस्लामिक कट्टरतावादियों ने हिंदू मंदिरों को तोड़ा-जलाया और किस तरह वहां की पुलिस तमाशबीन बनी रही। अपने यहां की बहसों में कट्टरतावादियों ने इसे ‘क्रिया की प्रतिक्रिया’ बताया!

लेकिन जैसे ही एक शाम एक चैनल पर इमामों के इमाम मुहम्मद अहमद इलियासी ने कहा कि वे (संघ प्रमुख मोहन भागवत) राष्ट्रपिता हैं। वे राष्ट्रऋषि हैं… सेक्युलरों में सन्नाटा छा गया! फिर एक चैनल पर कुछ मुसलिम बुद्धिजीवियों के मोहन भागवत से मिलने की खबर ने भी बड़ा झटका दिया।

मोहन भागवत से बात करने वाले बुद्धिजीवियों में से एक ने बताया कि भागवत जी बड़ी आत्मीयता से मिले। इससे सकारात्मक संदेश जाएगा। सकारात्मक बातचीत हुई। संघ में भी अच्छे लोग हैं।

यह बातचीत एक महीने पहले हुई थी… मीडिया को इसलिए नहीं बताया कि बात का बतंगड़ बनता… दूसरे ने कहा कि वैदिक धर्म के अनुसार हर व्यक्ति अपनी भिन्न पूजा-पद्धति अपना सकता है। उनका कहना था कि आप अपनी तरह से पूजा करें, लेकिन यह न कहें कि हमारा रास्ता ही सही है और गाय के प्रति संवेदनशील बनें, क्योंकि वह हमारी माता है… हमने कहा कि अगर लोग कहते हैं कि हर मुसलमान जिहादी है, राष्ट्रविरोधी है तो ऐसा नहीं कहना चाहिए… यह एक खुली बातचीत थी।

हमारे बीच ऐसे मतभेद नहीं कि बीच का पुल न बनाया जा सके… बात होती रहनी चाहिए क्योंकि: ‘ये इश्क नहीं आसां इतना ही समझ लीजे इक आग का दरिया है और डूब के जाना है!’ तीसरे ने कहा कि ‘हर जगह शिवलिंग क्यों खोजना’ यह एक बड़ा वक्तव्य था। उनके भी विरोधी हैं, लेकिन इस बातचीत का संदेश नीचे तक जाएगा। आमीन!

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First published on: 25-09-2022 at 04:19:09 am