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सुधीश पचौरी का कॉलम – बाख़बर : बड़ा शोर सुनते थे…

बजरंग दल की हथियारबंद ट्रेनिंग देने वाले सीनों को एक दिन चैनलों ने जम कर दिखाया और बहसें कराई। टाइम्स नाउ पर एक ओर वीएचपी के बंसलजी रहे, तो दूसरी ओर एंकर अर्णव समेत कुछ उदारतावादी।

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह। (पीटीआई फाइल फोटो)

वह नेता क्या जो ‘वन लाइनर’ में माहिर न हो और वह चैनल क्या जो नेताजी के ‘वन लाइनर’ को पूरे दिन न बजाए और वह एंकर क्या जो शाम तक उस ‘वन लाइनर’ के आसपास कुछ और ‘वन लाइनर’ न लगा दे! खबर का मैनेजमेंट वन लाइनर्स का मैनेजमेंट है। वन लाइनर मारने में दिग्विजयजी का जवाब नहीं। कांग्रेस के दिग्गज! चुनाव बाद कांग्रेस की बढ़ी हुई तकलीफ देखते ही कराह उठे: सर्जरी जरूरी! लेकिन घाव पर नमक छिड़कने वाले कहां छोड़ने वाले? भाजपा के संबित पात्रा ने लपक कर एबीपी पर टीप जड़ी: सर्जरी की नहीं, ‘दुआ’ की जरूरत है!

पिटती है कांग्रेस और बचाने आते हैं जेडीयू के प्रवक्ता! ऐसे दुर्दिन आ गए हैं! लेकिन संकट में मित्र ही साथ देते हैं, सो संभाला कि अरे भाई इतनी पुरानी पार्टी है, बार-बार गिरी है, बार-बार उठी है। एक दिन बाद कांग्रेस के प्रवक्ताओं में कुछ जान पड़ी तब जाकर बोले कि सब कुछ ठीकठाक है! इससे भी तबियत न भरी तो पश्चिम बंगाल के कांगे्रसी विधायकों ने सौ रुपए के स्टांप पेपर पर लिख कर दे दिया कि हम सोनियाजी के सौ फीसद वफादार बंदे हैं, अगर कभी गलती से लाइन तोड़ी भी तो खुद निकल जाएंगे।

इस चमचत्व को न सोनिया ने फटकारा, न राहुल ने। उल्टे इसको सही ठहराने के लिए प्रवक्ता आ जुटे कि इसमें क्या गलत है? यहां भी डिफेंस में पवन वर्माजी बोले कि क्या गलत है? सब दलों में ऐसा होता है! भाजपा में भी होता है!  लेकिन सरजी, माना चमचागीरी सर्वव्यापी है, लेकिन इसके लिए सौ रुपए का बांड तो नहीं भरवाया जाता!

लेकिन वाह रे कांग्रेस, तेरे क्या कहने! उसका पेट एक सेल्फ गोल से कहां भरता है? सो, रणदीप सुरजेवाला की ओर से तुरंत दूसरा गोल यह कह कर करवाया गया कि केंद्र सरकार के दूसरे वार्षिक समारोह के वक्त उन अमिताभ बच्चन को मेजबान क्यों बनाया जा रहा है, जिनका नाम पनामा पेपर्स में आया है? क्या इससे जांच एंजेंसियों को यह संकेत नहीं जाएगा कि जरा इनका खयाल रखना! ‘जाको राखे साइयां मार सके ना कोय’ वाली कहावत ही याद कर लेते तो यह शिकायत न करते और अपने उनतीस साल पुराने पूर्व दोस्त को दुश्मन बना कर पूरे बॉलीवुड को अपना दुश्मन न बना लेते! हालत ऐसी हो गई कि इस लाइन के पक्ष में कांग्रेस का एक भी आॅफिशियल प्रवक्ता न आ सका।

इन दिनों कांग्रेस के नए प्रतिपक्षी प्रवक्ता ऋषिकपूरजी हैं, जो हर चैनल को हर समय उपलब्ध रहते हैं। कुछ पहले उनने समस्त राष्टÑीय परिसंपत्तियों को गांधी परिवार के नाम पर करने का उपहास उड़ाया था। इस बार अमिताभ के पक्ष में बोल कर नाम कमाया!उधर अमिताभ के फैन कांग्रेस को ठोंकते रहे। इस तरह अमिताभ बच्चन को ठोंकने के चक्कर में कांग्रेस खुद पूरे दिन ठुंकती रही!

इस बीच मंदिर प्रवेश करने के चक्कर में भाजपा के तरुण विजय सिर फुटवा कर भी टीवी में देर तक मुद्दा न बन सके। उनसे ज्यादा बड़ी चर्चा तो एक अंगरेजी चैनल में तीन तलाक को चुनौती देने वाली मुसलिम महिला ने कराई। मौलवी साहब ने ऐसी औरतों को ‘बेशर्म और बेशर्म’ कहा! इसी क्रम में वह चर्चा दिनों तक याद रहने वाली है, जिसमें हाजी अली दरगाह में प्रवेश के मुद्दे पर कुछ स्वनामधन्य मौलवी साहबानों ने बेहद बेहूदी भाषा इस्तेमाल की! एक महानुभाव ने शराफत दिखाते हुए कहा कि तृप्ति देसाई आ जाएं, उनके लिए जूतों की माला इंतजार कर रही है! क्या गजब शरीफाना कल्चर है?

विफल और कमजोर का कोई नहीं। मीडिया भी नहीं। दो छात्रों ने सीबीएसइ की परीक्षा में कम नंबरों के कारण अपने को विफल समझ कर जान दे दी। यह सौ खबरों में से एक खबर भी नहीं बनी, लेकिन सफलता बेचने वाले चैनलों ने सौ प्रतिशत में से तीन नंबर कम वाली टॉपर को तो बार-बार मिठाई खाते दिखाया! लगता है, चैनलों में सारे टॉपर ही भरे हैं। एक खबर दाउद के फोनों ने बनाई कि महाराष्ट्र के एक मंत्री खड़सेजी को दाउद के फोन आते थे। एक दिन खबर गायब रह कर अगले दिन फिर उभरी, लेकिन फिर लुप्त हो गई, जबकि वह सचमुच जोरदार चर्चा मांगती थी! लगता है, अपने चैनलों की सारी बहादुरी कांग्रेस को ठोंकने और ठुंकवाने में ही दिखती है!

बजरंग दल की हथियारबंद ट्रेनिंग देने वाले सीनों को एक दिन चैनलों ने जम कर दिखाया और बहसें कराई। टाइम्स नाउ पर एक ओर वीएचपी के बंसलजी रहे, तो दूसरी ओर एंकर अर्णव समेत कुछ उदारतावादी। लेकिन बंसलजी कहां रुकने वाले थे? उनके लिए यह ट्रेनिंग नेशन को मजबूत करने वाली थी। जब अर्णव ने आरोप लगाया कि आप ऐसी ट्रेनिंग देकर ‘स्कल कैप’ पहनने वालों को आतंकवादी कह कर मारने की शिक्षा दे रहे हैं और ऐसा करके घृणा फैला रहे हैं! यह अधिकार आपको किसने दिया? यह संविधान-विरोधी हरकत है। ऐसे आरोपों पर शर्मिंदा होने के बजाय बंसलजी ने आर्म्स ट्रेनिंग को डिफेंड किया तो सीपीआइ के अतुल अंजान इस कदर गुस्सा खा गए कि बात बीच में ही बिखर गई और बंसलजी जवाब में न जाने क्या-क्या बोलते रहे। एंकर अर्णव को जब कुछ न सूझा तो कह उठे कि देशभक्ति करनी है तो सेना में भरती हो जाओ, बार्डर पर लड़ो। एंकर को जोश में इतना होश नहीं था कि समझता कि अगर ऐसी ट्रेनिंग वाले लोग फौज में जाएंगे तो फौज का क्या बनेगा? वहां भी वे ‘हिंदुत्व’ फैलाएंगे?

मोदी सरकार के दो साल पूरे क्या हुए कि एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस प्रवक्ता आमने-सामने आ गए। कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में रणदीप सुरजेवाला ने मोदी सरकार के दो साल की उपलब्धियों को ‘बातें हैं बातों का क्या’ जैसा बताते हुए यह शेर पढ़ा: ‘बड़ा शोर सुनते थे पहलू में दिल का! जो चीरा तो इक कतरा-ए-खूं न निकला’! तो जवाब में कांग्रेस की बदहाली पर भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने यह जवाबी शेर पेश किया: ‘हर शाख पे उल्लू बैठा है अंजामे गुलिस्तां क्या होगा!’

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