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बाखबरः वाह रे आईना !

भागवत ने कुछ इस तरह अभय दिया : किसी भारतवासी के लिए कोई भारतवासी पराया नहीं है। भारत की धरती में जन्मा प्रत्येक व्यक्ति भारतीय है। यह सिर्फ नागरिकता की बात नहीं है। भारत माता की भक्ति करना उसका काम है। सभी करते हैं...

Author June 10, 2018 04:44 am
आरएसएस मुख्यालय में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का स्वागत करते सरसंघचालक मोहन भागवत। (फोटो सोर्स: पीटीआई)

आरएसएस आरएसएस आरएसएस आरएसएस आरएसएस आरएसएस, शो का हीरो आरएसएस आरएसएस आरएसएस। नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे। सारे देश की क्लास लगा दी क्लास लगा दी क्लास लगा दी क्लास लगा दी क्लास लगा दी, कांग्रेस की वाट लगा दी वाट लगा दी वाट लगा दी! नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे। सारे देश ने पास किया संघ शिक्षा वर्ग, लेकिन किसी एंकर से सही उच्चरित न हो सका तृतीय का ‘तृ’। नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे। चार दिन से प्रणब दा प्रणब दा प्रणब दा प्रणब दा प्रणब दा प्रणब दा प्रणब दा हर चैनल गाता रहा, प्रणब दा प्रणब दा संघ में संघ में संघ में जाएंगे जाएंगे जाएंगे।

अरे काहे के प्रणब दा काहे के प्रणब दा, नाक कटवा दी प्रणब दा, काहे के प्रणब दा, एक कांग्रेसी किस्म की नाराजी गरजती रही। पहले संघ को कंडम किया, अब लिख रहे हैं : भारत मां का महान सपूत! चमत्कार है चमत्कार है चमत्कर है, संघ है सरकार है, कहो ना प्यार है कहो ना प्यार है, कहो ना संघ से प्यार है! कांग्रेसी नेता हैरान परेशान व्यथित व्यथित व्यथित, हम लड़ते लड़ते मरे और वो मिलने जा रहे हैं मिलने जा रहे हैं, ये क्या हो रहा है? संघ बोला, जिसे बुलाया है सब आए हैं, गांधी आए, नेहरू परेड में आए, इंदिरा आर्इं, ये आए वो आए, हम बुलाते हैं तो लोग आते हैं।

किसकी मजाल कि न आए, क्योंकि संघे शक्ति कलौयुगे… अपने पास शक्ति है और अपनी देशभक्ति है। गाइए : नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे… धम धम धम धम धम ड्रम बजे, डमर डमर डमर डमर डमर, सीटी बजी सीटी बजी, आदेश हुआ झंडे सज, लाठी बजी दड़ दड़ दड़, लठ लठ लठ, ड्रिल ड्रिल ड्रिल ड्रिल ड्रिल ड्रिल। हर साल होता है। साठ लाख सदस्य। नित्य सैंतीस हजार सक्रिय शाखाएं। इस देश के हम ही राखा, सन ग्यारह में हेडगेवार ने कहा कलकत्ता में कि हमी को बचाना है देश को। प्रणब ने लिखा : भारत मां के सच्चे सपूत! हम तो बुलाते ही रहते हैं। लोग आते रहते हैं। उनके वचनों को हम पाथेय समझ कर लेते हैं। वातावरण बदलना है। शक्ति बदलती है, वातावरण और संगठन में रहती है शक्ति! संघे शक्ति कलौयुगे!

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे। भागवत बोले। भागवत प्रबोधे। भागवत ने कुछ इस तरह अभय दिया : किसी भारतवासी के लिए कोई भारतवासी पराया नहीं है। भारत की धरती में जन्मा प्रत्येक व्यक्ति भारतीय है। यह सिर्फ नागरिकता की बात नहीं है। भारत माता की भक्ति करना उसका काम है। सभी करते हैं… चालीस हजार साल पुराने हैं। इस सनातन प्रवाह को बढ़ाने का काम करते जाएं। समाज को संगठित करना है। सौमनस्य का व्यवहार होना है। डेमोक्रेटिक मांइड होना जरूरी है… स्वभाव बदलना है… महाजनो येन गत: स पंथा… समाज हितैषी कार्यकर्ताओं का समूह चाहिए। संघ यही करता है। विचारधारा कुछ भी हो, लेकिन संपूर्ण समाज को राष्ट्र को अपना मानते हुए उसके हित में मेरा आचरण कैसा हो, इसका उदाहरण देने वाला व्यक्ति ही असली काम करता है। ऐसे कार्यकर्ता चाहिए… अड़ कर ही व्यवहार करने से ऐसा बनता है। संघ का प्रयास देश भर में ऐसे कार्यकर्ता खड़े करना है… तेरा वैभव अमर रहे मां हम दिन चार रहें न रहें… इसकी प्रत्यक्ष अनुभूति तृतीय वर्ष वर्ग (क्लास) में होती है…

भागवत के प्रवचन चलते रहे। मंच पर बैठे प्रणब दा अपने भाषण के पन्ने पलटते रहे। दृश्य में ड्रिल दिखती रही। तुरही बजती रही। कदम ताल दिखती रही है। मार्चपास्ट होता रहा। ध्वज लहरता रहा…प्रणब दा बोले, लेकिन ऐसा लगा कि कुछ बातों को छोड़ कर वे भागवत के कहे का अंग्रेजी में उल्था-सा कर रहे हैं। वही प्लूरलिटी, वही सहनशीलता। पच्चीस मिनट के भाषण में एक बार भी ‘अल्पसंख्यक’ शब्द नहीं आया। यह कौन-सा एंगेजमेंट था सर जी? भागवत ने भी तो लगभग ऐसा ही कहा कि सदियों से लोग आते रहे हैं, बसते रहे हैं, विविधता है। हम सबका स्वागत करते रहे हैं। कोई विचारधारा हो, लेकिन राष्ट्र की सेवा करें। कोई पराया नहीं। आपका विचार हम पाथेय की तरह ग्रहण करते हैं। (पाथेय यानी रास्ते का चना चबैना, मन हुआ तो खाया नहीं तो चिड़ियों को खिलाया)

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे।

इसके बाद भैये प्राइम टाइम में वो वो फजीते दिखे कि पूछिए मत। एक कहता कि देखा प्रणब दा ने संघ की क्लास ली। दूसरा कहता कि संघ ने प्रणब की क्लास ली। संघी बोले : कांग्रेस इनटॉलरेंट। हम हैं असली टॉलेरेंट! विचार की छुआछूत कांग्रेस करती है, हम नहीं। कितना बड़ा दिल है हमारा कि जिन प्रणब ने संघ की तीखी आलोचना की, उन्हीं को सादर बुलाया और सुना! रिपब्लिक पर शाहिद सिद्दीकी बोले : आज भारत का महान दिन है। दोनों ने विविधता में एकता की बात की। इंडिया टुडे में राहुल कंवल ने कहा : कल तक कैमरों से झिझकने वाला संघ आज मीडियामय दिखा। अगले दिन एबीपी ने लिखा : संघ ने कहा- प्रणब ने राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति की बात की। देश का इतिहास बताया। प्रणब का धन्यवाद! इंडिया टुडे की एक लाइन में कांग्रेस बोलती दिखी : प्रणब ने संघ को आइना दिखाया! वाह रे आईना!

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