ताज़ा खबर
 

देशभक्ति: एक जली हुई रोटी

क्या इसी सेना की असलियत छिपाने के लिए भक्त दनदनाते रहते थे कि सेना पर सवाल न करें, क्या इसीलिए सवाल न करें! सवाल करने वाले देशद्रोही हैं, तो ये जवान कौन हैं भक्तजी!

Author January 15, 2017 4:20 AM
बीएसएफ की 29वीं बटालियन के जवान तेज बहादुर यादव ने सेना के अधिकारियों पर राशन बेचने का आरोप लगाया था।

परंपरा हो तो ऐसी कि सब कहने लगें कि हमारी परंपरा हमें मुबारक, कानून कौन बीच में बोलने वाला? जलीकट््टू को बहाल करने के लिए एक से एक तमिल नेता मैदान में हैं। चार-पांच दिन से अंगरेजी चैनल जलीकट््टू की मांग को दिन-रात दिखाते और बहसें कराते हुए मांग बना रहे हैं कि यह परंपरा है, पशु पूजा है, इसमें हिंसा नहीं है और पोंगल के साथ यह जुड़ा है!  कहां गए माडर्निस्टि रैशनलिस्ट पशुप्रेमी? इधर परंपरा खेलने को मचल रही है, उधर आलोचना चुप्पी मारे कोने में दुबकी है! सारे हीरो, सारे आकइन एक लाइन से बोल रहे हैं- जलीकट््ट बहाल करो! एंकर समझाते हुए कहते हैं कि भावनाओं को देखो! एक अंगरेजी चैनल का एजंडा कर्नाटक को ठोंकते रहने का लगता है। पहले लड़कियों को छेड़ने के दो-दो वीडियो, फिर हर रोज एक वीडियो और हरेक में एक ही हाय हाय कि बंगलुरु असुरक्षित है! क्या बाकी राज्यों में लड़कियों के लिए रामराज्य है? तब इतने सेलेक्टिव क्यों होते हो महाराज! और अगर इतने ही असुरक्षित हैं तो आप इतने सुरक्षित होकर कैसे रिपोर्ट किए जा रहे हैं!

एक शहर को काला करके दिखाते रहना, एक राज्य को काला करके दिखाते रहना एक नई शैली है, जो कुछ चैनलों ने विकसित की है! कर्नाटक के बाद आजकल यूपी को पीटना होता है। एक डॉक्टर की हत्या हो गई तो एक हिंदी चैनल का रिपोर्टर पुलिस अधिकारी के पास पूछने नहीं गया कि क्या हुआ? गया तो भाजपा के नेता के पास और उसने सपा को ठोंक दिया! यह किस तरह की रपटगीरी हुई भैये?राहुल जब भी बोलते हैं भाजपा के प्रवक्ता उनका मजाक उड़ाने को आ जुटते हैं। वे एक ही बात रिपीट करते हैं कि राहुल को कोई सीरियसली नहीं लेता! लेकिन कांग्रेस की जन-वेदना रैली में जिस तरीके से राहुल ने मोदी को ठोंका उसका स्वाद ही कुछ अलग था। वे बोले कि एक ही आदमी सब कुछ जानता है और डर फैलाया जा रहा है, पत्रकारों को डराते हैं, लेकिन मैं नहीं डराऊंगा! वे बहुत मस्त अंदाज में बोले, गुस्सा कम किया, मजाक ज्यादा उड़ाया! राहुल को इतना नानसीरियली भी न लें महाराज! कई बार वे बेहद बारीक मार करते हैं!

वह शाम सबसे यथार्थवादी शाम थी, जब बीएसएफ के अंदर की बात एक जवान ने वीडियो के जरिए बाहर कर दी! देखते-देखते ढक्कन उठ गया और देशभक्ति के राग में भैरवी बजने लगी। जवान का वीडियो सोशल मीडिया को हिला कर जब चैनलों में आया तो इतना बजा कि सरकारे-आला के कान खड़े हो गए! जवान उस सच को बोल रहा था, जिस पर भक्तों ने पाबंदी लगाई हुई थी कि जोे सेना पर शक करेगा, देशद्रोही कहलाएगा। अब इस जवान को क्या कहेंगे महाराज! प्रवक्ताओं को काटो तो खून नहीं। वीडियो थप्पड़ की तरह लगता था। एक जली रोटी, एक जवान बोलता हुआ। सामने बंदूक की नली। ग्यारह घंटे बर्फ में ड्यूटी और एक जली हुई रोटी के बल पर! अधिकारी मैनेज करने आए तो जवान की पत्नी ने ढेर कर दिया कि वे सच कह रहे हैं। अगर शराब पीते थे, तो बार्डर पर किसलिए भेजा?  नतीजा कि गृह मंत्रालय को संभालना पड़ा कि इतने में एक सीआइएसफ के जवान ने फायर कर दिया। वह भी वीडियो से बोला। उसने भी सवा सौ करोड़ देशवासियों का हवाला दिया। ढक्कन उठने लगा है प्रभुजी, सावधान! जवान सच्चाई बोलने लगे हैं। और वह भी सवा सौ करोड़ जनता के लिए बोलने लगे हैं! और बहुत अच्छी हिंदी में बोलते हैं!

क्या इसी सेना की असलियत छिपाने के लिए भक्त दनदनाते रहते थे कि सेना पर सवाल न करें, क्या इसीलिए सवाल न करें! सवाल करने वाले देशद्रोही हैं, तो ये जवान कौन हैं भक्तजी! देशद्रोही न! तब काहे जांच की बात करते हैं? कॉमेडी कभी-कभी खादी के कपड़े पहन कर आती है। चैनलों को पता नहीं, किस कमबख्त ने खबर दे दी कि खादी के कैलेंडर में गांधी की जगह मोदी ने ले ली है। वे गांधीजी की जगह चरखा कात रहे हैं! चित्र विचित्र किंतु सत्य था। मोदीजी चरखामय थे और चरखा मोदीमय था। यह मोदीजी का चरखावतार था!  अनास्थावादी किस्म के एंकरों को यह अवतार पचा नहीं, सो जब एक अंगरेजी एंकर ने खादी के अधिकारी से पूछा कि गांधीजी को क्यों हटाया, तो वह बोला कि नहीं, गांधीजी को कौन हटा सकता है। वे तो पहले से ही हटे हुए थे। मोदीजी ने खादी की सेल को दो प्रतिशत से चार फीसद की है, अगर उनको दिखा दिया तो क्या गलत है।

दो महीने बीत गए हैं, लेकिन नोटबंदी का भूत नहीं उतर रहा! कभी-कभी वित्तमंत्रीजी आकर झाला लगा कर भूत को उतारते दिखते हैं, लेकिन भूत है कि उतरता ही नहीं। यह इकोनॉमिस्टों का भूत है, जिसे इकोनॉमिस्ट ही उतार सकते हैं। सो, एक शाम एक अंगरेजी चैनल पर एक पक्षधर इकोनॉमिस्ट जुटा और हिल-हिल कर बोलता रहा कि सब ठीकठाक है। इतने से विपक्ष कहां मानने वाला? एक चैनल पर अमर्त्य सेन आए और कहने लगे कि क्या सही है?
चुनाव जो न करवा दे, वह कम है! पंजाब जीतना है, उसके लिए कुछ भी करना है, ऐसे पुण्य संकल्प से प्रेरित होकर मनीष सिसोदिया ने कुछ इस तरह कुछ कहा कि लोगों ने समझा कि कह रहे हैं कि सीएम के कैंडीडेट केजरी ही होंगे। फिर क्या था, होने लगी हाय हाय! केजरीवाल भगोड़ा है! जो दिल्ली का न हुआ, वह किसका सगा? हरियाणे के आदमी को पंजाब में बिठाने की साजिश है! पूरे चौबीस घंटे जम कर धुलाई चलती रही, मनीष सिसौदिया का बयान खबर बनता रहा। आखिर में केजरीवाल ने कहा कि मैं दिल्ली का हूं, पंजाब का सीएम पंजाब का होगा!

एक चैनल पर रेटिंग कंपनी फिच की खबर रही कि उसने भारत की रेटिंग घटा दी है! उम्मीद रही कि भक्त जन फिच को ठोकेंगे और हाई रेटिंग बताएंगे, लेकिन यह खबर एक चैनल पर आई और मर गई!पक्ष की खबर देर तक जिंदा रहती है, विपक्ष की खबर दो मिनट सांस ले ले, तो समझो चैनलों का जनतंत्र है!

 

BSF जवान की शिकायत पर PMO ने गृहमंत्रालय से मांगी जानकारी; पत्नी का दावा- “शिकायत वापस लेने और माफी मांगने का दबाव”

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App