आगे आगे देखिए होता है क्या

एक रिपोर्टर एक किसान नेता के मुंह में माइक ठंूस कर प्रार्थना-सी किए जा रही है कि जब पीएम ने कानून वापस ले लिए, तब आप क्यों नहीं हट रहे? किसान नेता के भाव बढ़ जाते हैं।

कृषि कानून वापस लेने के ऐलान के बाद दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर जश्न मनाते प्रदर्शनकारी किसान (फोटो: पीटीआई)

एक रिपोर्टर एक किसान नेता के मुंह में माइक ठंूस कर प्रार्थना-सी किए जा रही है कि जब पीएम ने कानून वापस ले लिए, तब आप क्यों नहीं हट रहे? किसान नेता के भाव बढ़ जाते हैं। वह कहने लगता है कि हमारे एमएसपी कानून बढ़ा दें! साढ़े सात सौ शहीद हुए किसानों को मुआवजा दें और स्मारक बनवा दें, खीरी के मंत्री टेनी को हटा कर जेल भेजें, बिजली बिल माफ करें, पराली केस वापस लें, सब लिखके दे दें, फिर हट जाएंगे! आजकल बड़ी खबर किसान नेता बनाते हैं, सरकार नहीं! और हर ‘डिबेट’ में अपने भाव बढ़ाते दिखते हैं। मसलन, कल तक दो-तीन मांगें थीं, अब लंबी सूची है! कल तक सात सौ शहीद थे, अब साढ़े सात सौ हैं! यानी कि ‘जस जस सुरसा बदल बढ़ावा/ तासु दून कपि रूप दिखावा!’

अपने रिपोर्टर और एंकर किसानों से अपील कर-कर के उनके भाव बढ़ाते रहते हैं! किसान नेता अपनी बढ़ी कीमत को खूब समझते हैं, इसलिए जब-जब कोई रिपोर्टर या एंकर किसानों को हटने के लिए कहता है, तो वह वहीं डांट खाता है कि आप सरकार की दलाली कर रहे हो। हमारी बात करो, नहीं तो हमसे बात न करो!

एक शाम एक एंकर चिंतित होकर एक किसान नेता से पूछने लगा कि ‘आपके समर्थन में दुनिया के कई देशों के किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे देश की बदनामी होती है, और अब तो आपकी मांगें भी मानी जा रही हैं, तब आप उनको मना क्यों नहीं करते?’ तो टके-सा जवाब मिला कि ‘ये दुनिया ग्लोबल है! अगर वो कर रहे हैं तो करें! हम मना क्यों करें?’गजब का ‘पावर शिफ्ट’ है, जो कई एंकरों के तेवरों में, उनकी आयोजित बहसों में रोज होती दिखती है!

शायद इस ‘पावर शिफ्ट’ को देख कर एक दिन मदनी बोल उठते हैं कि जैसे कृषि कानून वापस लिए हैं, वैसे सीएए और एनआरसी भी वापस लो! ओवैसी ने और ऊंचा सुर लगाया कि मुसलमान कब तक चुप रहेंगे… हम सारी यूपी को ‘शाहीन बाग’ बना देंगे! (कुछ ऐसा ही तो शरजील इमाम ने शाहीन बाग में कहा था!)

इसी बीच दुर्दमनीय सिद्ध्ू कर्तारपुर साहिब जाकर इमरान को ‘बड़ा भाई’ कह दिए और भाजपा प्रवक्ता चढ़ लिए कि ‘ऐसे पाक प्रेमी पाक जाएं’! कांगे्रसी प्रवक्ता बोले कि ‘पीएम पाक जाएं और बिरयानी खाएं तो देशभक्ति’ और वो ‘बड़ा भाई’ कह दें तो ‘पाक परस्त’! सच! अब ऐसे तर्क भोथरे हो गए हैं।

जिन दिनों किसान सारी ‘लाइम लाइट’ लूट रहे थे, उन्हीं दिनों ममता दीदी दिल्ली जीतने निकलीं और देखते-देखते उन्होंने एक पूर्व राज्यसभा बुद्धिजीवी, एक पूर्व क्रिकेटर भाजपाई और हरियाणे के एक कांग्रेसी नेता को टीमएसी के गुलदान में लगा लिया! लाइन में एक भाजपा नेता भी लगते दिखे!
हाय! ये कैसे सतही दिन हैं कि एक दुपट्टा, एक बेखुशबू पुष्पगुच्छ और एक ‘फोटो बाइट’ विचारों को बदलने के लिए काफी हैं!

इन दिनों सारी ले-दे यूपी जीतने के लिए है! यूपी में दो प्रमुख विमर्श एक-दूसरे की कन्नी काटते निकलते हैं : एक ओर योगी जी का विमर्श है, जो हर चैनल में विज्ञापनों में हर पांच मिनट में दिखते हैं। वे मंदिर-मंदिर, विकास-विकास, और जेवर-जेवर किए जाते हैं और उनके पीएम चुनावग्रस्त राज्यों में विकास की योजनाओं का उद्घाटन किए जाते हैं। इसके बरक्स अखिलेश छोटे-छोटे दलों के साथ गठबंधन करते हुए कहते रहते हैं कि योजनाए हमारी थीं, योगी जी ने झटक लीं!

फिर एक दिन कई चैनल रहस्योद्घाटन करते हैं कि जिसे ‘भगोड़ा’ घोषित किया जाना था, वही परमबीर सिंह चंड़ीगढ़ में हैं और एक रिपोर्टर को बताए हैं कि वे अदालत के सामने हाजिर होने को तैयार हैं! फिर एक दिन कांग्रेस के नेता मनीष तिवारी ने अपनी आने वाली किताब में ‘छब्बीस ग्यारह के बदले में तत्कालीन सरकार ने सख्त कदम नहीं उठाए’ लिख कर भुस में लठ्ठ मार दिया! देखते-देखते भाजपा प्रवक्ताओं की बांछें खिल गर्इं!

वे खबर चैनलों में आकर कांग्रेस की इस ‘कायरता’ पर तंज कसने लगे और भाजपा सरकार के ‘घर में घुस कर मारने’ की माचो नीति और बालाकोट करने की हिम्मत के बधाए गाने लगे! प्रत्युतर में कांग्रेस प्रवक्ता प्रत्यारोप लगाते रहे कि आपके रहते चीन ने अरुणाचल प्रदेश में गांव कैसे बसा लिया?
इस बीच कोरोना की तीसरी खुराक की चर्चा शुरू कर दी गई! एक टीका निर्माता कहिन कि ‘तीसरी खुराक जरूरी’, तो दूसरे एक्सपर्ट कहिन कि ‘अभी जरूरी नहीं’ और उधर डब्ल्यूएचओ कह रहा है कि इस कोरोना लहर में यूरोप के सात लाख लोग मर सकते हैं! आगे आगे देखिए होता है क्या?

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