ताज़ा खबर
 

बाखबरः एक और अयोध्याकांड

इस धर्मप्राण देश में दशहरे ने अयोध्याकांड के एक नए संस्करण को खोलने का अवसर दे दिया। इस बार हिंदी चैनलों के साथ कई अंग्रेजी चैनल भी राममंदिरवादी जैसे दिखने लगे।

Author October 21, 2018 4:20 AM
दशहरे के अपने संबोधन में संघ प्रमुख ने जैसे ही बोला कि हम कहते हैं कि सरकार मंदिर बनाए, कानून बना कर मंदिर बनाए… कई चैनलों ने उसे ‘अल्टीमेटम’ जैसा बना दिया!

 

एक चैनल में एक पीड़िता कहती है : इसने मेरे संग बदसलूकी की है… तभी आरोपित लेखक एक इबारत दिखा कर पूछता है : इनसे पूछें कि मेरे पास ‘मिस यू किस यू’ वाला यह मैसेज किसने भेजा? एंकर पूछती है कि क्या ये तुमने भेजा? पाड़िता कहती है कि इसका संदर्भ अलग है। ये आदमी अपनी कब्र खोद रहा है… लेखक ने फिर कहा : पूछिए इनसे ये ‘मिस यू किस यू’ जैसा संदेश कोई क्यों भेजेगा? और यह मारक मीटू कथा दस मिनट में पीड़िता को ही मार कर निपट गई! एक और सुबह चैनलों ने उछल कर लाइन लगाई: एक हीरोइन मीटू के पक्ष में खड़ी हुई! शाम होते-होते हीरोइन के पिताश्री पर ही उनके एक महिला सहकर्मी ने आरोप लगा दिया और देखते-देखते मीटू की हमदर्द हीरोइन जी जीरोइन जी हो गर्इं! ऐसे ही एक चैनल ने खबर दी कि एक पीड़िता ने एक हिंदी पत्रकार पर तीस साल पुरानी मीटू मिसाइल दाग दी। पत्रकार महोदय इससे पहले मीटू के पक्ष में एक हमदर्दी भरा प्रोग्राम कर चुके थे। लेकिन मीटू मिसाइल के लगते ही पत्रकार जी की हमदर्दी सरदर्दी बन गई!

मीटू में शोषण की एक कसक है, तो बदलेखोरी का एक ‘परपीड़क आनंद’ (सैडिस्ट प्लेजर) भी रहता है! मीटू का सातवां दिन! अब चैनलों में न नाना थे न नाथ थे। सिर्फ मंत्री बचे थे। सरकार पर उनको निकालने का नैतिक दबाव था। मंत्री विदेश से लौटे तो चैनल पीछे लगे। लेकिन कोई नई कहानी हाथ न लगी। हां सरकार की धुलाई होती रही। हर चैनल पर मंत्री को हटाने की पुकार मची रही। एक से एक मीटू पक्षधर महिलाएं मांग करती रहीं : मंत्री इस्तीफा दे। उसे हटाया जाए! ‘प्रीडेटर’! ‘सेक्स पेस्ट’! इस बीच भाजपा ने यह लाइन देकर वाहवाही लूटी कि ‘विक्टिम्स’ की ‘नेमिंग-शेमिंग’ नहीं की जानी चाहिए! मीटू की सैद्धांतिकी भी विकसित हुई : वह तूफान है। यह रुकने वाला नहीं। बहुत दिन बाद आया है यह क्रांतिकारी क्षण! एक चैनल पर एक विशेषज्ञ बोली : मीटू क्षण विरेचन का क्षण है। ये औरतें इतने दिनों तक अपने दर्द को पीती रही हैं। कार्यस्थल पर ‘प्रीडेटरों’ की ज्यादतियों को सहती रही हैं। सोशल मीडिया की मदद से यह बाहर निकला है। यह स्त्रीत्ववाद की तीसरी लहर है। यह सुनामी है। यहीं रुकने वाला नहीं है। हम सोशल मीडिया के शुक्रगुजार हैं। वह न होता तो ये न होता।

एक मंत्री कहती रहीं कि सब संस्थान यौन प्रताड़ना विरोधी समिति बनाएं! कानून बदलना हो तो बदलें। मीटू ने ऐसा संशयवादी वातावरण बनाया कि हम सुबह से चैनल खोल कर बैठ जाते और इंतजार करते कि अब किसका नाम आया? अब किसका नाम लगा? अरे वो दुष्ट तो रह ही गया! हाय! किस तरह हम अपने को छोड़, हर दूसरे के गिरने का इंतजार करने लगे! खबरों में भय तैरता रहता। सब सांस रोके बैठे रहते कि अब मीटू किस पर लगा? कौन निशाना बना? मीटू की मेहरबानी कि अब हर पुरुष बदमाश नजर आता है और हर स्त्री देवी नजर आती है। यह एक नए प्रकार का शत्रुतावादी विभाजन है, जो मीटू ने कर दिया है। फिर एक दिन मंत्री ने इस्तीफा दे दिया। लाइनें लगीं : मीटू की जीत! मीटू की जीत! मंत्री की लाइन : मुकदमा करेंगे। लेकिन ये क्या? ‘क्रिमिनल डिफेमेशन’ का केस होते ही मीटू की हवा निकलती दिखी।

पत्रकारों की एक बड़ी संस्था बोली : ‘क्रिमिनल डिफेमेशन केस’ वापस लो! अरे भाई! अगर प्रमाण है तो आपराधिक मुकदमे से घबराना कैसा? फिर एक चैनल पर एक खबर कौंधी: मीटू के मारे एक अनिर्बान ब्लाह ने आत्महत्या की कोशिश की! एक चैनल पर एक मीटू समर्थक बोलीं कि लोग कहते हैं कि काम से पहले तो ‘स्वीटू’, काम निकलने के बाद ‘मीटू’! जब तक मीटू में दम रहा, चैनल उसे दिखाते रहे। उसके बाद वे नए धार्मिक एक्शन की जगह ‘सबरीमला’ की ओर लपके। सबरीमला का ‘बेस कैंप’ चैनलों में एक अखाड़े से कम न दिखता था। पुराने भक्त नए भक्तों के विरोध में संगठित थे। तीन-चार दिन तक विरोध प्रदर्शन लाइव दिखाए जाते रहे। प्रवेश के दिन बहुत मारामारी दिखी। कुछ भी हो सकता था। शाम तक चैनल जिज्ञासा बढ़ाते रहे कि देखते हैं, कपाट खुलने के समय क्या होता है? सब किसी अनहोनी के इंतजार में थे। विरोधियों की भीड़ के मुकाबले सिर्फ एक हजार पुलिस लगी थी। कैमरे जिधर जाते उधर ‘अयप्पा’, ‘अयप्पा’ के नारे लगने लगते। लोग छाती कूट कूट कर सीन देने लगते कि हम प्रवेश नहीं करने देंगे।
सबरीमला ने मीटू की कहानी को किनारे कर दिया।

एक रोज तीन और दूसरे दिन दो नए भक्तों को प्रवेश से जबर्दस्ती रोका गया! कवरेज के दौरान भीड़ ने कई चैनलों की गाड़ियां तोड़ीं। कैमरे तोड़े और कई महिला रिपोर्टरों के साथ माारपीट तक की। शाम तक कई एंकर शिकायत करते रहे कि हमारे रिपोर्टरों पर हमला किया गया है, लेकिन इसका दोष भी वे लेफ्ट प्रशासन को देते रहे कि प्रशासन सिर्फ देखता रहा! सबरीमला के तीन दिन तक चले घेरे के बाद देवासम बोर्ड ने अदालत से अपील करने की बात की और इस तरह मामला कुछ शांत हुआ! लेकिन इस धर्मप्राण देश में दशहरे ने अयोध्याकांड के एक नए संस्करण को खोलने का अवसर दे दिया। इस बार हिंदी चैनलों के साथ कई अंग्रेजी चैनल भी राममंदिरवादी जैसे दिखने लगे। दशहरे के अपने संबोधन में संघ प्रमुख ने जैसे ही बोला कि हम कहते हैं कि सरकार मंदिर बनाए, कानून बना कर मंदिर बनाए… कई चैनलों ने उसे ‘अल्टीमेटम’ जैसा बना दिया! शिवसेना प्रमुख ने ‘कंपटीशन’ दिया : अगर आप मंदिर नहीं बना सकते, तो हम बनाएंगे…अब प्रतीक्षा कीजिए एक नए अयोध्याकांड की!

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App