ताज़ा खबर
 

बाखबरः कहानी अभी बाकी है मेरे दोस्त

इसे कहते हैं : मीटू की मार्केटिंग! शिकारी शिकार करता है। शिकार मीडिया पर आता है, तो मीडिया करुणा का जाल बिछा कर, इंटरव्यू कर शिकार करता है, फिर उसकी मार्केटिंग करता है। विज्ञापन लपक कर बरसते हैं।

Author October 14, 2018 3:12 AM
बड़े-बड़े गज-ग्राह तो हाथ न लगे, सिर्फ तीन हाथ लगे! कहानी अभी बाकी है मेरे दोस्त!

इधर ‘थर्डवर्ल्ड’ में ‘फर्स्टवर्ल्ड’ वाला ‘मीटू मोमेंट’ प्रवेश किया, उधर एंकरों के चेहरे चमक उठे। हर चैनल पर लाइनें लग गर्इं : ‘मीटू मोमेंट’ आया। ‘मीटू’ तूफान आया। ‘मीटू क्षण’आया! एंकर चीखने लगे : यहां तो बालीवुड, मीडियावुड से लेकर पोलिटीवुड में हर जगह हार्वे वाइंस्टाइन भरे हैं! आह! मीटू मोमेंट ने औरतों को आवाज दे दी है। अब ‘प्रीडेटरों’ (परभक्षियों) की खैर नहीं। इस ‘मीटू क्षण’ में औरतों के गले खुलने लगे हैं, तो बीस-तीस साल पुराने मामले भी सुने जाने चाहिए।… प्रीडेटरों में एक फिल्मी हीरो, एक टीवी हीरो, एक लेखक, एक हीरो का दोस्त, एक बड़ा प्रोड्यूसर।… ये ये ये वो वो वो… शिकारियों में एक नामी संपादक और मंत्री भी…

चैनल न्याय चालू आहे! एक चैनल पर : थैंक्यू तनुश्री। यह चैनल आपके साथ है। आप बेखटके आपबीती बताएं। राष्ट्र जानना चाहता है कि उस दिन सेट पर क्या हुआ? मैं सेट पर नाचने की प्रैक्टिस करती थी कि वो आया। उसके लुक्स… एकदम क्षुब्ध कथा। क्षोभ में गला भर आता है। यह मैंने दस साल पहले भी बताया था, लेकिन मेरी किसी ने न सुनी। दस साल तक दर्द सहा। जबसे मीडिया का ‘मीटू मोमेंट’ आया, तो लगा बोल दंू और अब आप सब साथ हैं, तो हिम्मत बढ़ी है।… राष्ट्र देख रहा है। राष्ट्र आपके साथ है। हमने देखा तो पाया कि राष्ट्र तो कहीं नहीं था। उसकी जगह सिर्फ विज्ञापन थे!

मीटू नंबर दो : उन्नीस साल पुरानी कहानी। एक रात को घर जा रही थी, वो गाड़ी में था। उसने लिफ्ट दी। गाड़ी में ही मेरे मुंह में शराब उंड़ेली। घर में आकर रेप किया। मैं अंदर-अंदर घुलती रही। अभी क्यों बोलीं? मैंने ये सब तब भी लिखा था, लेकिन तब किसी ने न सुनी। अब जब सोशल मीडिया और टीवी मीडिया का मीटू मोमेंट आया, तो हिम्मत बढ़ी। आपको एफआईआर करनी चाहिए। हां हां, वकील की सलाह ले रही हूं। मीटू नंबर तीन : आज जो मंत्री है वो माना हुआ ‘एडीटर-प्रीडेटर’ था। सब जानते थे कि वह औरतों का शिकारी है। मैं काम करने गई, तो उसने होटल के बेड पर बुलाया। मैं परेशान। उसकी आंखें मेरे शरीर पर घूमती रहीं।…

मीटू नंबर चार : मैं ‘इंटर्न’ थी। एक दिन उसने अपने दफ्तर का दरवाजा बंद कर लिया, मुझे कस लिया। किसी तरह बाहर आई। पूरा सेक्स शोषक है। प्रीडेटर है। मीटू नंबर पांच : वह शिकारी है, सब जानते थे। मैं काम करने गई तो उसने पीछे से आकर मेरे शरीर पर हाथ फेरा। मैं परेशान। फिर दरवाजे पर मुझे धरा। ऐसा प्रीडेटर है। पांच छह सात आठ नौ दस ग्यारह बारह मीटू शिकारों की लाइन लगी हैं। एक जैसे किस्से हैं। सब जानते थे कि वह ये ये करता था। मजबूरी का फायदा उठाता था।… वह ‘न्यूज रूम का बादशाह’ था! मेरे साथ तो कुछ नहीं किया, लेकिन सब लोग जानते थे कि वह कैसा प्रीडेटर था। ही मस्ट गो! उसे हटाओ। सरकार चुप क्यों है? हटाओ उसे।

जबसे एक बड़ा शिकारी हाथ लगा, तबसे सारी कहानियां उसी पर थम गर्इं। सलाह दी जाने लगीं : अरे भाई जवाब तो मंत्री को देना है। हां, जो शिकार हैं उनको शर्मिंदा न किया जाए! शुरू के दो दिन तो एंकरों ने ‘मीटू मोमेंट’ जम कर दुहा। मीटू जैसी मनोहर कहानियां जम के बेची जाती रहीं। रस लंपट जिज्ञासु दर्शकों की सांसें अटकी रहतीं : हाय ऐसी दर्दीली, रसीली कहानियां कब नसीब हुर्इं? अच्छा फिर क्या हुआ? फिर क्या हुआ?अगला मीटू किसका है? लंपट समाज की जिज्ञासाएं लार टपकाती रहीं। एक चैनल ने लाइन लगाई : इंतजार करें, कुछ और बड़े नामों की पोल खुलने वाली है। ऐसी धांसू लाइन कि हम चैनल खोले रहें। खोले रहे। लेकिन दो घंटे तक एक बड़ा और नया नाम नहीं आया! हां, इस एक लाइन को देख विज्ञापनों की झड़ी लग गई! हर पांच-सात मिनट पर विज्ञापन बरसे।

इसे कहते हैं : मीटू की मार्केटिंग! शिकारी शिकार करता है। शिकार मीडिया पर आता है, तो मीडिया करुणा का जाल बिछा कर, इंटरव्यू कर शिकार करता है, फिर उसकी मार्केटिंग करता है। विज्ञापन लपक कर बरसते हैं। अरे, अपनी कमाई का कुछ प्रतिशत शिकारों को दो भइए! पांच-छह दिन में मीटू विमर्श ने समझा दिया : अपने समाज का हर मर्द सेक्स का शिकारी है और औरत सिर्फ शिकार! हर मर्द अपराधी और हर औरत देवी! उसका हर वाक्य वेदवाक्य है! अदालत पुल्लिंगवादी, पितृसत्तावादी! वह क्या न्याय देगी? चैनलों ने ऐसा ही पापुलर न्यायबोध प्रसारित किया!

भाजपा सांसद उदितराज ने इन शिकार कथाओं को टोका कि दो-चार लाख के लिए आरोप लगाती हैं, फिर छोड़ देती हैं। औरतें क्या परफेक्ट हैं? हनीट्रैप भी होते हैं।… तो मीडिया बरस पड़ा : ‘शॉक्ड। शॉक्ड, शॉक्ड’! ये है ‘मिसोजिनिस्टिक माइंड’! दानव होते-होते रह गए कुछ देवता ‘पोलिटीकली करेक्ट’ वाणी बोलने लगे। एक ने कहा : उस ‘शिकारी’ के साथ काम नहीं करूंगा। दूसरा बोला कि इसके साथ काम नहीं करूंगा। ये भी क्या मीटू मोमेंट हुआ? एकदम ‘सेलेक्टिव’! बड़े-बड़े गज-ग्राह तो हाथ न लगे, सिर्फ तीन हाथ लगे! कहानी अभी बाकी है मेरे दोस्त!

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App