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बाखबरः मैं भी मीटू तू भी मीटू

यों तो पांच राज्यों में चुनाव होने हैं, लेकिन कुछ चैनल राज्यों के नाम पर राष्ट्रीय चुनावों के विश्लेषण ही देते रहते हैं। इसीलिए एक चैनल अपने सर्वे को ‘चुनाव का स्टाक एक्सचेंज’ कहता है, तो दूसरा सर्वे को ‘राष्ट्रीय अपू्रवल रेटिंग्स’ कहता है।

Author October 7, 2018 4:44 AM
नुश्री कहती हैं कि डांस के बीच में नाना बताने लगे मूवमेंट! ऐसे ऐसे ऐसे ऐसे और ‘ऐसे ऐसे’ करते-करते किया मेरे साथ मीटू मीटू!

अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने कहा : मीटू! मीटू! मीटू! एंकर पूछीं : ‘हू इज दिस मीटू?’ कौन है वो मुआ हीटू हीटू, जिसने किया तेरे संग हे सखी ये मीटू मीटू? दो हजार आठ की बात। एक अज्ञातकुलशील फिल्म ‘हॉर्न ओके प्लीज’ का सेट। ‘डांस सीक्वेंस’। तनुश्री कहती हैं कि डांस के बीच में नाना बताने लगे मूवमेंट! ऐसे ऐसे ऐसे ऐसे और ‘ऐसे ऐसे’ करते-करते किया मेरे साथ मीटू मीटू! मैंने किया ‘प्रोटेस्ट’ कि तू न कर मीटू मीटू वरना बना दूंगी तेरा हीटू हीटू! कर दूंगी तुझे पीटू पीटू! एनडीटीवी, टाइम्स नाउ, रिपब्लिक, मिरर नाउ, न्यूज एक्स, इंडिया टुडे, सीएनएन न्यूज अठारह हर चैनल पर छाया मीटू मीटू! हिंदी चैनलों में कम, अंग्रेजी में अधिक बजा मीटू मीटू!

वही वही सीन। रिपीट दर रिपीट। वही वही बातें हर चैनल पर। तनुश्री मीटू का ब्योरा देती हुई और एक से एक क्रांतिकारी लाइनें लगती हुई। कि क्या यह बालीवुड का ‘मोमेंट’ है? ‘मीटू क्षण’ है? क्या यह ‘इंडिया का मीटू मूवमेंट’ है? फिर वही वही टुकड़े पुराने वाले तनुश्री का डांस सीक्वेंस! बालीवुड के बड़े-बड़े नाम खामोश क्यों? क्यों नहीं कहते : मैं भी मीटू, मैं भी मीटू! खबर आई : नाना पाटेकर तनुश्री पर मानहानि का मुकदमा करेंगे। ये ‘मीडिया ट्रायल’ क्यों? सिर्फ यूपी पुलिस की एक ‘ठोक कथा’ ने ‘मीटू कथा’ में व्यवधान डाला। विवेक नाम के ऐपल के टेकी युवा को यूपी की ठोकवादी पुलिस ने एक रात ‘ठोक’ दिया।

चैनलों के एंकर बोले : हाय हाय! नागरिक बोले हाय हाय! बीवी रोई हाय हाय! क्यों मार डाला? हाय हाय! एक चैनल में एक थानेदार बोलता रहा : बड़ा ही ड्यूटीफुल था वो! लंबी मूछों वाला वह ठोक ‘एक्सपर्ट’ लेटे लेटे आखें बंद कर बोलता रहा : मैंने रोकने को कहा, तो वो मेरे ऊपर ही गाड़ी चढ़ाने लगा। मैंने आत्मरक्षा में गोली चलाई। फिर बात पलटी कि गोली चलाई नहीं, बल्कि चल गई! और कैसी हत्यारी मासूमियत कि ‘ठोकवादी’ भी अपने बचाव में निकल पड़े। ‘ठोक विशेषज्ञ’ के पक्ष में थाने में ही धरना दिया और कमाल कि अफसरों ने देने दिया! यही नहीं, ‘ठोकवादी’ के पक्षधरों ने आन लाइन चंदा इकठ्ठा करना शुरू कर दिया, ताकि मुकदमा लड़ा जा सके!

लेकिन मीडिया यूपी पुलिस को ठोकता रहा। रक्षात्मक प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। इसे ‘हत्या’ मान कर शामिल लोगों पर एक्शन किया! मृतक प्रशांत की पत्नी से मिल कर सीएम ने आर्थिक राहत और न्याय का वादा किया। मीडिया यूपी की ठोक कल्चर को ठोकता ही रहता अगर मोहन भागवत जी ने ‘मंदिर बनाने से कोई नहीं रोक सकता’ जैसा तिकतिकाने वाला बयान न दिया होता। यह बयान का जादू था या भक्तिभाव का कि एक अंग्रेजी एंकर मंदिर के कारसेवा भाव में ऐसा डूबा कि एक चर्चाकार के उबारने से भी नहीं उबरा! जब एक ऐसे भक्त एंकर हैं तब तक मंदिर बनने से यों भी कोई नहीं रोक सकता! कट टू विश्व हिंदू परिषद की बैठक और उसके बाद के सीन। एक भक्त चैनल एक मुसलिम चेहरे को बिठाता है, जो कहने लगता है : राम का मंदिर तो बनना ही चाहिए!

लेकिन हे प्रभु! उन चैनलों को कुछ तो समझाइए, जो चुनावी रैलियों में सुनने वालों को कम और खाली कुर्सियों को पैन करके बार-बार दिखाते हैं। ऐसी ही एक रैली को कुछ चैनल पहले भी दिखा चुके हैं, जिसमें नेता जी पुकारते रह गए और श्रोतागण भाषण के ऐन बीच से उठ कर चले गए! चुनावों के ऐन पहले ऐसे ‘अपशकुनों’ं का दिखाना तो ठीक नहीं! ऐसे अपशकुन-जन्य अभिशापों से बचने के लिए ही शायद कुछ चैनल ‘नई शैली’ के सर्वे टाइप कुछ देने लगे हैं। यों तो पांच राज्यों में चुनाव होने हैं, लेकिन कुछ चैनल राज्यों के नाम पर राष्ट्रीय चुनावों के विश्लेषण ही देते रहते हैं। इसीलिए एक चैनल अपने सर्वे को ‘चुनाव का स्टाक एक्सचेंज’ कहता है, तो दूसरा सर्वे को ‘राष्ट्रीय अपू्रवल रेटिंग्स’ कहता है।

ऊपर से लगता है कि राज्यों की बात की जा रही है, लेकिन करते हैं संसदीय चुनावों की बात! शायद इसीलिए एक चैनल में एक आंकड़ेवादी प्रदीप भंडारी ने कहा कि पहले आप पांच राज्यों के सर्वे दीजिए, तभी बताया जा सकेगा कि संसद के चुनावों में क्या होगा? इसे कहते हैं घोड़े के आगे गाड़ी बांधना! साफ है कि अपने चैनल कोई जोखिम नहीं लेना चाहते। सब ‘सेफ’ खेलना चाहते हैं। इसीलिए एक सर्वे को ‘स्टॉक एक्सचेंज’ का नाम देता है, तो दूसरा ‘राष्ट्रीय एपू्रवल्स’। लेकिन जब ऐसे नाम देते हैं तो सर जी, यह भी बता दिया करिए कि जब ‘स्टाक’ खुला तो नेता का कितने पर खुला और बंद हुआ तो कितने पर और रुपए के गिरने के साथ नेता जी भी गिरे कि नहीं?

और जो ऐसे ‘सर्वे’ को ‘नेशनल अपू्रवल’ की तरह बताते है वे सवा सौ करोड़ के ‘नेशन’ को सिर्फ बीस हजार की आबादी में क्यों ‘रिड्यूस’ कर देते हैं? यह ‘नेशनल अप्रूवल’ है कि सिर्फ बीस-तीस हजार का अपू्रवल है या कि वह आपका अपना ही काम्य अपू्रवल है? लेकिन सात दिन बाद भी मीटू ने पीछा न छोड़ा। एक चैनल ने बताया कि एक स्टेंडअप कमेडियन ने अपने ‘मीटू’ के लिए माफी मांगी है, फिर एक अन्य पत्रकार ने कहा : मेरे संग भी मीटू हुआ! ऐसी खबरों को ब्रेक करते हुए एक चैनल ने खुश होकर लाइन लगाई : कब बोलेंगे हम सब : ‘मैं भी मीटू, तू भी मीटू’!

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