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बाखबरः एक ही मार्ग, मंदिर मार्ग

सबसे अधिक नैतिक दृश्य यूपी ने दिया। एक पुलिस जीप में एक लड़की को एक इंसपेक्टरनी थप्पड़ पर थप्पड़ रसीद करते हुए गरियाए जा रही थी और वह ढीठ लड़की पिट पिट कर भी कहे जा रही थी कि वह उसका दोस्त था! यह दोस्त एक मुसलमान लड़का था, उसे भी पीटा जा चुका था।

Author September 30, 2018 1:44 AM
मंदिर का मुद्दा बड़ी बेंच को नहीं! एक महीने में फैसला!! फैसला आते ही भक्तों के चेहरे चमक उठे। चैनल लाइन देने लगे : 2019 में मंदिर!मंदिर मार्ग साफ! ‘बिग विक्ट्री टू रामलल्ला’! अरे भक्त एंकरो! रामलल्ला नहीं, रामलला कहो!

पाक राहुल को आगे बढ़ाना चाहता है। भ्रष्टाचारी आगे बढ़ाना चाहते हैं। वंशवादी राहुल को आगे बढ़ाना चाहते हैं। राहुल देश के दुश्मनों के हाथों में खेल रहे हैं।… लेकिन राहुल हैं कि मानते ही नहीं। वे फिर कहीं कह देते हैं : देश का ‘चौकीदार’ (एक सेकेंड रुक कर फिर कहते हैं)… ‘चोर’ है! चैनल बार-बार बजाने लगते हैं। एक भाजपा प्रवक्ता जब्त कर कहते हैं : कितनी शर्मनाक और गैर-जिम्मेदार भाषा है?एंकर बार-बार कहते हैं कि अरे भई, भाषा का कुछ तो खयाल करो। लेकिन कोई मानता ही नहीं। इधर से ‘क्लाउन प्रिंस’ होता है, तो उधर से ‘चौकीदार…’ होता रहता है!चैनल भी उसे इसी तरह दिखाते रहते हैं! ये कैसे चैनल हैं कि आए दिन देश के दुश्मनों को यही-यही दिखाते रहते हैं?

टाइम्स नाउ कहता है कि आप अंदर की बातें बता क्यों नहीं देते? इंडिया टुडे भी कहता है कि जब इतने आरोप लग रहे हैं तो आप लोग सब कुछ पब्लिक में क्यों नहीं ला देते। कह दीजिए कि ओलांद का यह कहना कि ‘इंटरलोक्यूटर भारत ने ही दिया था’, झूठ है। एक ही उत्तर आता है। देश की सुरक्षा का सवाल है? सौदा दो सरकारों के बीच है। कांग्रेस तो स्वयं भ्रष्ट है। उसकी बातें भी भ्रष्ट हैं। तो क्या ओलांद झूठ बोल रहे हैं? वे भूतपूर्व हो चुके हैं। भूत को क्या जवाब दें? एंकरों के सवाल बने रहते हैं। अगले रोज भाजपा के नए प्रवक्ता नेरेटिव बदलते हैं : कांग्रेस भी रिलांयस को सौदा दे रही थी। वाड्रा के दोस्त सुंदर भंडारी को मिलने वाला था। न मिला तो खिसिया रहे हैं। कांग्रेस फिर कहती है : हिचक कैसी? सब सामने ले आइए न! कोई ‘सीके्रसी क्लॉज’ नहीं है।

इसे कहते हैं ‘परसेप्शन’ की लड़ाई। ओलांद का खंडन करने की जगह वाड्रा को लपेटा जाने लगता है, नेरेटिव बदलने लगता है कि फिर राहुल आकर ठोक जाते हैं। अंग्रेजी के तीन एंकर चाहते रहे कि कागजात दिखा कर दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया जाय। सिर्फ एक एंकर कहता रहा कि देश की सुरक्षा का सवाल है। राहुल की शैली छापामार है। एक वाक्य चिपका कर चले जाते हैं। जवाब रक्षात्मक हो उठते हैं। चार दिन हो गए, नेरेटिव बदलता ही नहीं! सीएनएन न्यूज अठारह लाइन लगाता है : ‘चोर’ पे ‘चरचा’! अरे भाई क्या कोई और कहानी नहीं है आपके पास?

लेकिन अपने चैनलों ने भी निराश ही किया। आरोप-प्रत्यारोप दिखाते रहे। किसी से इतना भी न हुआ कि ओलांद की सखी हीरोइन की उस फिल्म के कुछ टाप ते टाप सीन ही दिखा देते, जो राफेल-रिलांयस के सौदे का सुफल बताई जा रही है। किसी तरह एक चैनल की रिपोर्टर सखी से पूछा कि क्या बात करेंगी, तो बोल दीं कि नो नो। बात नहीं करनी है। शूटिंग में बिजी हैं। असली बात तब होती, जब पूरी पिक्चर दिखाई जाती, लेकिन यह मामूली-सा काम भी चैनलों से न हुआ। धिक्कार है! उस शाम एक अंग्रेजी एंकर भगवा भाव में इस कदर डूबा दिखा कि कहता रहा कि संघ इतना खुल रहा है, तब सब उसके आलोचक ‘संघम् शरणम् गच्छामि’ क्यों नहीं करते?

एक दिन राहुल बाबा अमेठी चले जाते हैं, तो बम बम भोले होने लगता है। शिवजी का चित्र सामने लगा दिखता है और भगवा वस्त्रों में सजे हजारों कांवड़िए उनके चारों ओर भगवा लहर-सी पैदा कर देते हैं। इसे देख एक एंकर कहता है- शिवजी के बाद क्या राहुल संघ का रंग भी हड़पे जा रहे हैं? सबसे अधिक नैतिक दृश्य यूपी ने दिया। एक पुलिस जीप में एक लड़की को एक इंसपेक्टरनी थप्पड़ पर थप्पड़ रसीद करते हुए गरियाए जा रही थी और वह ढीठ लड़की पिट पिट कर भी कहे जा रही थी कि वह उसका दोस्त था! यह दोस्त एक मुसलमान लड़का था, उसे भी पीटा जा चुका था। इस वक्त पुलिस एंटी रोमियो स्क्वाड की भूमिका निभा रही थी और इस तरह भारतीय संस्कृति को बचाए जा रही थी। इस भगवायुग में एक हिंदू कन्या की ये मजाल! दे थप्पड़! बिगड़ते बच्चों को इसी तरह ठीक किया जाता है : जय यूपी! जय थप्पड़!!

सबसे अच्छी खबर बनाई तमिलनाडु की एक भाजपा नेता ने कि मोदी जी का नाम नोबेल के लिए ‘रिकमेंड’ कर दिया! एक नोबेल तो हर तरह से बनता ही है! फिर आई ‘मोदी केअर’। सचमुच गजब की योजना। दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना। पचास करोड़ लोग कवर होते हैं। यह एक रिकार्ड है, पीएम ने स्वयं कहा कि सारे यूरोप को मिला दो तो उससे भी बड़ी है यह योजना। एक नोबेल तो बनता ही है। इसके बाद सर्वोच्च अदालत ने एक से एक क्रांतिकारी फैसले दिए। अदालत की ‘लाइव स्ट्रीमिंग’ ओके! ‘बेवफाई’ की धारा 497 आउट! क्रीमी लेअर नॉट ओके! आधार सर्वत्र ‘कंपलसरी’ नहीं! मंदिर का मुद्दा बड़ी बेंच को नहीं! एक महीने में फैसला!! फैसला आते ही भक्तों के चेहरे चमक उठे। चैनल लाइन देने लगे : 2019 में मंदिर!मंदिर मार्ग साफ! ‘बिग विक्ट्री टू रामलल्ला’! अरे भक्त एंकरो! रामलल्ला नहीं, रामलला कहो!

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