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बाखबरः लोकतंत्र लटकंत

कौन बनेगा मुख्यमंत्री? किसे बनाएं मुख्यमंत्री? हर एंकर का अपना मुख्यमंत्री है। कहानी राजभवन के सामने खुलती है। जनता विभाजित। परिणाम विभाजित। दल विभाजित। एंकर विभाजित। चैनल विभाजित! वकील विभाजित कि कौन बनेगा मुख्यमंत्री?

Author May 20, 2018 3:34 AM
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

कर्नाटक के चुनाव अभियान के दौरान एक दावा : एक सौ पचास सीट! कुछ दिन बाद दूसरा दावा : एक सौ तीस सीट! आठ एक्जिट पोल। पांच में भाजपा आगे। तीन में भाजपा पीछे, कांग्रेस आगे! सात की लाइन : त्रिशुंक विधानसभा। लटकंत विधानसभा। हंग असेंबली, हंग असेंबली। सिर्फ एक की लाइन थी : भाजपा को बहुमत! एक सौ बीस सीट! केसरिया लहर! केसरिया लहर! जय हो! पंद्रह मई की सुबह के छह बजे चैनल टाई-सूट पहन कर बैठ गए। साढ़े दस तक भाजपा को एक सौ सोलह सीट पर बढ़त। जय हो!

भाजपा को बढ़ते देख एक अंग्रेजी एंकर अतिरिक्त उत्साह में ‘न्यू इंडिया’ ‘न्यू इंडिया’ गाने लगा : न्यू इंडिया बन रहा है, न्यू वोटर वोट दे रहे हैं। वे भाजपा को बेहतर समझते हैं। ‘न्यू इंडिया’ मंत्र से मुग्ध एक लटयंस छाप पत्रकार बोल उठी : यह न्यू इंडिया लटयंस वालों की समझ से बाहर है। यह न्यू इंडिया तो हमारी भी समझ नहीं आ रहा। जोश में एंकर राहुल की खिल्ली उड़ाने लगता है : यह राहुल जहां जाता है, हारने की गारंटी करके आता है। अब तो उसके लोग ही कहने लगे हैं कि प्रचार के लिए राहुल को न भेजना! बंगलुरू से दिल्ली तक हर दृश्य में खुशी है। मुस्कानें हैं। नाच है। ढोल नगाड़े हैं! सब लाइव लाइव!

इंडिया टुडे पर जावडेकर गदगद भाव से बोले : कर्नाटक में मैंने अस्सी दिन गुजारे हैं। हमारा नारा था : सरकार बदली सी, भाजपा गेली सी! रिपब्लिक पर राम माधव : दक्षिण की ओर हमारी यात्रा शुरू है। टाइम्स नाउ की लाइन : मोदी अनबीटेबल! मोदी अजेय! न्यूज एक्स की लाइन : मोदी मैजिक ने राहुल को स्टंप किया! एनडीटीवी की लाइन : कर्नाटक में केसरिया लहर। भाजपा ने जीता इक्कीसवां राज्य! एक हिंदी चैनल नारा देता है : एक भारत श्रेष्ठ भारत! 2019 के चुनाव का आगाज शुरू! (सरजी ‘आगाज’ ही पर्याप्त था। ‘शुरू’ की जरूरत क्या थी?)लेकिन यह क्या? दोपहर होते-होते कर्नाटक की जनता ने सभी सूरमाओं का बैंड बजा दिया और ऐसा जनादेश दिया कि लोग जनादेश की परिभाषा ढूंढ़ते रह गए। हंग असेंबली की बात सही रही। राजदीप सही रहे। सुबह सुखी। दोपहर दुखी। पल पल परिवर्तित राजनीति!रियल टाइम में होती ऐसी हाइपर राजनीति कब देखी?

जो चेहरा कुछ पहले खिला दिखता, अगले ही पल मुरझाया दिखता।ये कर्नाटक की जनता भी बड़ी चंट निकली। सभी महामहिमों के संग एकदम ‘प्रैक्टीकल जोक’ कर डाला। सबको लटका दिया। दो दिन से विधानसभा अधर में लटकी है। उसी में दलों की जान अटकी है। हर चैनल पर एक जैसे सवाल हैं : किसकी सरकार बनेगी? एक सौ चार वाले की बनेगी या कि एक सौ सोलह वाले दो दलों की बनेगी? कुमारस्वामी कांग्रेस का समर्थन पाकर बालकनी से विजय का निशान दिखाने लगते हैं। उधर भाजपा अपनी सरकार का दावा ठोकती है। कौन बनेगा मुख्यमंत्री? किसे बनाएं मुख्यमंत्री? हर एंकर का अपना मुख्यमंत्री है। कहानी राजभवन के सामने खुलती है। जनता विभाजित। परिणाम विभाजित। दल विभाजित। एंकर विभाजित। चैनल विभाजित! वकील विभाजित कि कौन बनेगा मुख्यमंत्री?

अगले रोज महामहिम राज्यपाल दिलाते हैं येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री की शपथ! एंकर देर तक भाजपा वालों से पूछते रहते हैं : आठ वोट कहां से लाओगे? कांग्रेस कहती है : कांग्रेसी-जेडीएस विधायकों को तोड़े बिना कहां से लाएंगे बहुमत? राज्यपाल का यह कदम ‘पोचिंग’ का रास्ता खोलने वाला है। एंकर राहुल कंवल ने कहा : येदी ने मांगे थे सात दिन, दिए गए चौदह दिन! यह क्या बात हुई? सब कुछ बेहद पारदर्शी है! साफ-साफ दिखता है। अल्पमत को बहुमत में बदलने का बाजार खुल गया है। सब देख सकते हैं। कांग्रेसी-जेडीएस विधायकों पर पहरा है। एक रिसॉर्ट से दूसरे रिसॉर्ट ले जाए जा रहे हैं ताकि लुटेरे लूट न लें। रेट बताया जा रहा है : सौ करोड़ रुपया प्रति विधायक! सब कुछ सरेआम दिख रहा है। न कुछ छिप रहा है, न छिपाया जा रहा है। शुक्रवार को अदालत ने आदेश दिया : येदी शनिवार की शाम चार बजे तक बहुमत साबित करें! फिर वही सवाल उठता है : कहां से लाएंगे आठ वोट? कैसे लाएंगे आठ वोट! क्या सरकारें इसी तरह बना करेंगी? क्या यही अपना ‘न्यू इंडिया’ है सर जी?

 

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