ताज़ा खबर
 

बाखबर: इस हवा में ही खुंदक है

एक चैनल पर ‘उखाड़’ शब्द की पूरे एक घंटे की उखाड़ लीला दिखी कि सभी ‘उखाडू’ एक-दूसरे को देर तक उखाड़ते-पछाड़ते रहे। सड़क पर बुलडोजर के समांतर चैनलों के बुलडोेजर देर तक दनदनाते रहे, जिसे विद्वानों ने ‘बहस’ का नाम दिया।

Rhea Chakrborty, Rhea, NCB,रिया चक्रवर्ती को एनसीबी ने गिरफ्तार कर लिया है। (फाइल फोटो)

रिया अब निकलेगी। अब निकलेगी। लेकिन अभी तक नहीं निकली। रिया निकल क्यों नहीं रही? इतनी देर क्यों लगा रही है? क्या वह सोलह सिंगार कर रही है? क्या सज रही है कि इतनी देर कर रही है? निकलती क्यों नहीं रिया… ओ रिया… ओ रिया… निकलती क्यों नहीं रिया? बहुत हो गया सिंगार रिया, अब तुझे निकलना ही होगा और जेल जाना ही होगा। अब कब तक बचेगी तू। रिया…

एक चैनल की एक महिला रिपोर्टर ही ऐसी उत्तेजक भाषा में देर तक दहाड़ती रहती है। उसका सह-संवाददाता तो और भी बदहवास दिखता है।

ऐसी खूंखार रिपोर्टिंग ही इन दिनों टीआरपी खींचती है। और शायद इसीलिए शाम तक चैनल का प्रमुख दहाड़ कर बताने लगता है कि हमारे कवरेज ने सबको हिला दिया है। बालीवुड को, पुलिस को, नेताओं को और ‘पतित’ मीडिया, सबको हिला दिया है। यह नए मीडिया की भाषा है। यह नए खोजी मीडिया की भाषा है। हम ‘फैक्ट्स’ लाकर नेताओं के मुंह पर मारते हैं। वे घबराते हैं।

फिर एक शाम वही एंकर अपनी छाती कूट कर कहने लगता कि वे मेरे खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाना चाहते हैं। मैं तैयार हूं। खुद अपनी गाड़ी चला कर सामने जाऊंगा और सच के लिए कुछ भी करूंगा!

हाय! कैसी वीरमुद्रा है, जो एक ही वक्त में शेर की तरह गरजती है और उसी वक्त खुद को पीड़ित की तरह खेलने लगती है! कोई एंकर कब शेर बन जाता है, कब बकरी, ऐसा वाककौशल मनोरंजक लगता है।

रिया के न्यायिक हिरासत में जाने के बाद की कहानी ‘उखाड़ लो जो उखाड़ना हो’ बरक्स ‘मुंबई का अपमान’ बरक्स ‘भारत की बेटी का अपमान’ बरक्स ‘जेसीबी मशीन का दफ्तर तोड़ना’ बरक्स ‘आज तूने मेरा आॅफिस तोड़ा है, कल तेरा घमंड टूटेगा’ बरक्स ‘लो उखाड़ दिया’ बरक्स ‘क्या उखाड़ दिया तूने, एक दिन तू उखड़ जाएगा’… की खुंदकबाजी की दिशा में मुड़ चुकी है।

एक चैनल पर ‘उखाड़’ शब्द की पूरे एक घंटे की उखाड़ लीला दिखी कि सभी ‘उखाडू’ एक-दूसरे को देर तक उखाड़ते-पछाड़ते रहे। सड़क पर बुलडोजर के समांतर चैनलों के बुलडोेजर देर तक दनदनाते रहे, जिसे विद्वानों ने ‘बहस’ का नाम दिया।

और इन दिनों ऐसे कसीदाकारों की भी कमी नहीं, जो बहसों में आते ही सामने बैठे महान एंकर की आरती उतारने लगते हैं कि हे प्रभो, आपने कमाल कर दिया। जो कहा, कर दिखाया! उसको अंदर करा दिया। कमाल है प्रभो! बलिहारी एंकर जी आपकी, जो हमको लियौ बुलाय! आगे भी बुलाते रहना जी!

अब न एंकर एंकर है, न चर्चक चर्चक है, बल्कि ‘विचारों के बमवर्षक’ हैं। कुछ ने ‘भारत की बेटी’ को गोद ले लिया है, तो कुछ ने ‘भारत के बेटों’ को गोद ले लिया है।

फिर भी एक एंकर विवादी सुर लगाता है कि एक औरत के पीछे तीन तीन एजेंसियां पड़ी हैं। सुशांत की मौत की कहानी पहले ‘आत्महत्या’ की बनाई गई, फिर बालीवुड में ‘भाई-भतीजावाद’ की बनाई गई, फिर ‘हत्या’ की बनाई गई और अब नशे की ओर मोड़ दी गई है…

फिर एंकर ने पंद्रह करोड़ रुपए के ‘मिथ’ को उसी फिल्म निर्माता के मुंह से ध्वस्त कराया जिस फिल्म के लिए सुशांत से पंद्रह करोड़ की बात हुई थी, ‘लॉकडाउन’ के कारण फिल्म बक्से में बंद हो गई। इस बीच हमारे उसके बीच एक पैसे का भी लेन-देन नहीं हुआ। इस तरह पंद्रह करोड़ रुपए के पेमेंट की बात एक ‘मिथ’ भर है!

लेकिन रिया को लेकर की जातीं उत्तेजक और खुंदकी चर्चाओं के बीच अगर कोई चैनल ‘बार्डर पर तनाव बढ़ रहा है’ या ‘चीन से कभी भी पंगा हो सकता है’ या कि ‘कोरोना के कुल संक्रमितों के मामले में भारत ने ब्राजील को पीछे छोड़ दिया है और जल्द ही अमेरिका को पीछे छोड़ देगा’ जैसी गंभीर चर्चाएं करने लगे तो उसकी कौन सुनेगा?

लेकिन ‘राफेल’ अब भी एंकरों में वीरता का संचार करता है और वे दर्शकों में वीरता भरने लगते हैं। जिस दिन राफेल वायु सेना में शामिल किए गए, उस पूरे दिन एंकर चीन को ऐसे धमकाते रहे, मानो चीन कोई चूहा हो। ‘चीन पाक की नींदें उड़ीं’। ‘राफेल देख दुश्मन कांपा!’ एक-सी वीररसपूर्ण लाइनें लगाई जाती रहीं।

ऐसे गाल बजाऊ वीरों के बीच एक चैनल चर्चा में जब एक रक्षा विशेषज्ञ ने बताया कि चीन को कम न समझें। उसके पास पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान हैं और पूरी चौकसी बरतें, तो लगा बंदा बात तो सही कह रहा है!
इन दिनों कई खबर चैनल ‘बदलापुर’ में बदल गए हैं। बेटी तो बदलापुरवादी, बेटा तो बदलापुरवादी, रिपोर्टर तो बदलापुरवादी और एंकर तो बदलापुरवादी!

बदलापुर बढ़ रहा है! एक बदलावपुरवादी सत्ता ने बदलापुरवादी बेटी पर नशा लेने के पुराने आरोप को जिंदा कर केस में बदल दिया है और जांच के लिए आदेश दे दिए हैं। ‘दांत के बदले दांत और आंख के बदले आंख’ का मुहावरा हर रोज चरितार्थ होता दिखता है। बदतमीजी, बदलेखोरी और उखाड़-पछाड़ की खुंदकी भाषा इन दिनों की ‘नागरिक भाषा’ है। चलते-चलते भी स्वयंकथित ‘भारत की बेटी’ एक बॉलीवुड हीरोइन को ‘माफिया बिबो’ और बेल मांगने वाली को ‘स्माल टाइम ड्रगी’ कह कर अपनी खुंदक निकालती है।

ऐसे में अगर एक चैनल पर एक मनोचिकित्सक आकर कहे कि टीवी पर ‘बाईपोलर’ ‘बाईपोलर’ और ‘ड्रगों’ के नाम इतने अधिक बजाए गए हैं कि बहुत से लोग अपने को ‘बाईपोलर’ समझ कर इलाज कराने आते हैं, तो आश्चर्य नहीं।

ऐसा लगता है कि चैनलों की हवा में ही खुंदक है!
एक चैनल पर ‘उखाड़’ शब्द की पूरे एक घंटे की उखाड़ लीला दिखी कि सभी ‘उखाडू’ एक-दूसरे को देर तक उखाड़ते-पछाड़ते रहे। सड़क पर बुलडोजर के समांतर चैनलों के बुलडोेजर देर तक दनदनाते रहे, जिसे विद्वानों ने ‘बहस’ का नाम दिया।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 तीरंदाज: ला बैल जिसे मैं मारूं
2 वक्त की नब्ज: यह पत्रकारिता नहीं
3 दूसरी नजर: जबर्दस्ती के संघवाद का प्रदर्शन
ये पढ़ा क्या?
X