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बाखबर: जेल नंबर सात

ऐसे मौकों पर वे अपना ‘हिसाब’ चुकता करने में एकदम नहीं चूकते। ‘दुश्मन के दुर्दिन’ छाप शो में वे देर तक संजीदा नजर आते रहे, मानो किसी शोकसभा में हों। लेकिन ज्यों ही उनका कंठ फूटा, वे दर्जनों विपक्षी नेताओं को एक के बाद एक सीधे तिहाड़ भेजते नजर आए।

Author Updated: September 8, 2019 5:28 AM
नई दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल ले जाए जाते सीनियर कांग्रेसी नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी.चिदंबरम। (फोटोः पीटीआई)

एक बड़ा आदमी काली गाड़ी से तिहाड़ जाता हुआ, और उसके प्रति हमदर्दी की एक आंख भी नम नहीं। नकली त्रासदी की जगह असली कॉमेडी ने ले ली। एक एंकर न जाने क्यों कह बैठा कि देखो तो कैसा जमाना है कि इतना बड़ा बंदा तिहाड़ जा रहा है और किसी को जरा भी रंज नहीं! एक एंकर दर्शकों को समझाता रहा कि वे तिहाड़ से बचना चाहते थे और इसके लिए ईडी के आगे सरेंडर करने को तैयार थे, लेकिन सीबीआई अदालत ने चौदह दिन की कस्टडी के लिए सीधे तिहाड़ जेल भेज दिया।

देर तक अपने-अपने रिपोर्टरों से एंकर पूछते रहे कि तिहाड़ जाएंगे तो भी क्या वैसा ही ‘वीआइपी ट्रीटमेंट’ मिलेगा जैसा कि सीबीआई की कस्टडी में मिल रहा था, यानी एसी, वेस्टर्न टायलेट, पलंग आदि। ऐसे ही अवसर पर रिपोर्टरों और एंकरों के अंदर की बात कभी-कभी बाहर झांक जाती है। सभी चैनलों के कैमरे सीबीआई के ‘स्पेशल कोर्ट’ में देर तक तैनात रहे। फिर कुछ चैनलों के कैमरे तिहाड़ के प्रवेश द्वार के सामने तैनात हो गए थे, ताकि तिहाड़ में उनकी ‘एंट्री’ को दिखा सकें।

एक एंकर बहस कराए जाता था कि बड़ी आदलत ने भी क्या सर जी को भ्रष्टाचार का ‘किंगपिन’ कहा कि नहीं? एक बोला, हाइकोर्ट ने तो साफ कहा कि वे ‘किंगपिन’ (सरगना) हैं, इसलिए ‘बेल’ नहीं दी। विद्वान लोग अपने-अपने कागज दिखाने लगे कि निचली अदालत ने उसे ‘किंगपिन’ कहा है, ऊंची अदालत ने नहीं कहा।
अरे भैए! अब इससे क्या फर्क पड़ने वाला है? तिहाड़-दर्शन तो हो ही गए!
एक अंग्रेजी एंकर पूछने लगा कि यह ‘कर्मा’ है कि ‘बदले की कार्रवाई’?
कई चैनलों ने लाइन लगाई कि ‘पांच प्रतिशत’ का अहंकार, पहुंचा तिहाड़!’
बताइए, भाई जी को क्या पड़ी थी कि एक दिन पहले मुस्कराते हुए पत्रकारों से पंजा दिखा कर कह दिए कि ‘पांच प्रतिशत’! क्या नहीं जानते, क्या है ‘पांच प्रतिशत’! अब भुगतो बेटा!
सच, ऐसी कच्ची तो किसी की न हुई कि जब-जब मांगी बेल, तब-तब मिली जेल!हाय रे दुर्भाग्य!
एक चैनल ने चुटकी ली कि ‘एनफोर्समेंट डिपार्टमेंट’ के सभी आरोपी वीआइपी सुविधा वाली जेल नंबर सात में रखे जाते हैं। इसी में चार्ल्स शोभराज रहा और छोटा राजन रहता है! इसी में ‘बेटा जी’ भी रहे हैं।

एक चैनल पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अश्विनी कुमार ‘निजी कैपेसिटी’ में बोलते रहे कि कानून की नजर में जेल ‘अपवाद’ है और ‘बेल’ नियम है! इस मामले में यह नियम अपनाया गया नहीं दिखता। इसका अफसोस है। आखिर एक शख्स की ‘डिग्निटी’ का भी सवाल है। ‘टेब्लायड जर्नलिज्म’ जिस भाषा का उपयोग करता है, उसमें किसी की भी ‘डिग्निटी’ नहीं बचती।
कैसे लोग हैं ये कि इधर बंदा जेल को रवाना किया जा रहा है, उधर इनको ‘डिग्निटी’ की पड़ी है। एक ‘भ्रष्ट’ की डिग्निटी क्या? जब कह दिया ‘किंगपिन’ तो ‘किंगपिन’ को पूजोगे क्या?
एक भक्त एंकर हुलस कर चिल्लाया : यह तो अभी शुरुआत है, आगे आगे देखिए, होता है क्या?

ऐसी ही कॉमिक घड़ी में जो मजा अपने भैया जी के अंग्रेजी चैनल प्राइम टाइम के चिंघाड़-शो को देखने में आता है, वह सारे चैनलों को मिला कर देखने में नहीं आता।
अगर ‘जले पर नमक छिड़कने’ की कला सीखनी हो तो भैया जी से सीखें। ऐसे मौकों पर वे अपना ‘हिसाब’ चुकता करने में एकदम नहीं चूकते। ‘दुश्मन के दुर्दिन’ छाप शो में वे देर तक संजीदा नजर आते रहे, मानो किसी शोकसभा में हों। लेकिन ज्यों ही उनका कंठ फूटा, वे दर्जनों विपक्षी नेताओं को एक के बाद एक सीधे तिहाड़ भेजते नजर आए।
भैया जी दांत पीस-पीस कर एक-एक का नाम लेकर कहते जाते थे : एक दिन तुझे भी जाना है तिहाड़, फिर एक दिन तू भी जाएगा तिहाड़। फिर एक दिन इसे भी जाना है तिहाड़ और उसे भी जाना है तिहाड़! अंतत: ‘परिवार’ को भी एक दिन जाना है तिहाड़!

लेकिन भैया जी को इतने से सब्र कहां, सो लगे हाथ ठोंक लिए लटयन्स छाप मीडिया को भी कि देखा! ऐसा भी एक ‘मीडिया’ है, जिसने अपने ‘आका’ को तिहाड़ जाते हुए नहीं दिखाया।
तिहाड़ दर्शन कराते-कराते एक एंकर बोल उठा कि बड़ी ब्रेकिंग न्यूज आ रही है कि ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ को ‘विदेशी मुद्रा’ के मामले में ‘फेमा’ के अंतर्गत ‘नोटिस’ दिया गया है। चैनल की बहस में एक चर्चिका ने इस संस्था पर ‘सप्रमाण’ आरोप लगाया कि किस तरह यह एमनेस्टी इंटरनेशनल ‘इस्लामिस्ट’ मुअज्जम बेग और जिहादी जान से हमदर्दी रखती है और ‘मानवाधिकारवाद’ के नाम पर इस्लामिस्टों के अधिकारों की हिमायत अधिक करती है।

आखिरी खबरों में, अगले चैबीस घंटे में, चंद्रमा पर चंद्रयान की ‘साफ्ट लैंड़िंग’ की खबर छा गई। छा गया! हर चैनल अपना अपना चंद्रमा देखते दिखाने लगा। वैज्ञानिक बताते रहे कि किस तरह आज की रात चंद्रयान की ‘साफ्ट लैंडिंग’ एक रिकार्डतोड़ सफलता होगी! सफल ‘साफ्ट लैंडिंग’ के बाद ‘स्पेस रिसर्च’ के मामले में भारत दुनिया में चौथे नंबर का देश बन जाएगा!
एक चैनल ने लाइन लगाई : यह ‘ऐतिहासिक’ और ‘युगांतकारी’ है! पर, ऐसा न हुआ।

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