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बाखबर: शौर्यकथा और चौर्यकथा

कानून का डर अच्छा है... ये डर अच्छा है... आज राफेल की कमी महसूस होती है... सेना की आलोचना करने वाले देश को कमजोर कर रहे हैं... पराक्रमी भारत के लिए भारत माता की जय! विजयी भारत के लिए भारत माता की जय! वीर जवानों के लिए भारत माता की जय!

Author March 10, 2019 5:38 AM
राफेल विमान की तस्वीर। (Photo: PTI)

कानून का डर अच्छा है… ये डर अच्छा है… आज राफेल की कमी महसूस होती है… सेना की आलोचना करने वाले देश को कमजोर कर रहे हैं…
पराक्रमी भारत के लिए भारत माता की जय! विजयी भारत के लिए भारत माता की जय! वीर जवानों के लिए भारत माता की जय!
सेना ने दो सौ पचास मारे!
सरकार ने कोई आंकड़ा नहीं दिया!
सेना टारगेट हिट किया करती है। मारे गयों की गिनती नहीं करती!
एक बड़ा भाजपा नेता : तीन सौ मारे!
एक और भाजपा नेता : चार सौ मारे!
एक कांग्रेस नेता : लाशें दिखाओ कि कितने मारे?
शौर्यगाथा में जोश होता है, लेकिन अधिक जोश में होश कहां? जोश-जोश में किसी ने ढाई सौ मारे, किसी ने तीन सौ मारे, किसी ने साढ़े तीन सौ मारे, तो एक ने पूरे चार सौ मारे! इस तरह कुल मिलाकर तेरह सौ तो मारे ही!
इसे कहते हैं ‘एकोसद्विप्रा बहुधा वदंति’ यानी सत्य ‘एक’ होता है, पंडितजन अलग-अलग तरीके से बांचते हैं। ये बांचने की बात है मित्रो! फिर ‘जाकी रही भावना जैसी!’
लेकिन दुष्ट विपक्ष को चैन कहां? कहता है : सबूत दो! सबूत दो!
एक परम राष्ट्रप्रेमी चैनल गरजा : विपक्ष के नेता तो पाकिस्तान के मीडिया के ‘पोस्टर बॉय’ हैं! ज्यादातर चैनल गरजते रहे कि सेना की बात गलत और पाक की बात सही! पाकिस्तान के एजेंट हैं ऐसे लोग!
एक चैनल पर दुर्दमनीय सिद्ध्ू बोलते दिखे : हवाई हमलों के जरिए पाकिस्तान के आतंकी मारे कि सिर्फ कुछ पेड़ उड़ाए?
एक देशभक्त बोला : खाते यहां की हैं, गाते पाक की हैं! धिक्कार है!
कई अंग्रेजी चैनलों ने मोटे-मोटे रोमन अक्षरों में लाइनें लगार्इं :
‘घुस के मारा’! ‘घर में घुस के मारा’!
इतने में शिवसेना बोली कि पब्लिक प्रमाण मांग रही है, तो देते क्यों नहीं?
सर जी, ये शिवसेना दोस्त है कि दुश्मन? लगता है कि शिवसेना वाले अपनी ‘सेना’ का भी भरोसा नहीं करते? हर विपक्षी सबूत मांग रहा है। सिब्बल मांग रहे हैं। ममता मांग रही हैं। सबूत बड़ा है कि देश? कितने देशद्रोही लोग हैं ये?
दिग्विजय जी ने फिर ललकारा कि आतंकी हमला एक ‘दुर्घटना’ थी! इसके बाद कुछ चैनलों में ज्ञानीजनों के बीच ‘घटना’ ‘दुर्घटना’ और ‘हमले’ के बीच बड़े ही ‘तत्त्वमीमांसापरक’ विचार चले। लेकिन इस बीच ‘दुर्घटना’ शब्द एक भाजपा नेता को इतना पसंद आया कि उसने भी पुलवामा को ‘दुर्घटना’ कह दिया! हाय हाय! जोश में फिर होश खो दिए भाई जी ने! इसे देख दिग्विजय ने फौरन चिपकाया : अब क्या कहना है भाजपा का?
सबूत फिर भी मांगे जाते रहे! एक एंकर ने कहा कि अमेरिका ने लादेन को मारा तो वीडियो दिया। इजराइल ने फिलस्तीनों को मारा तो वीडियो दिखाया! आप भी वीडियो दिखा दें। सारी बहस खत्म!
यह क्या बात हुई? हम क्यों दें सबूत? हम ही हैं सबूत! जब आज तक नहीं दिए किसी बात के सबूत, तो अब क्यों दें सबूत? क्या देशद्रोहियों को दें सबूत? एक मंत्री जी ने तंज कसा : बालाकोट जाकर देखें सबूत! दूसरे मंत्री जी बोले : पाक जाकर देख आएं सबूत!
एक चैनल पर एक ज्ञानीजन रोने लगा कि जरा-सा कुछ पूछो तो पाकिस्तानी कह देते हैं! अरे भैये! यही तो है, देशभक्ति का धोबीपाट!
अंत में कुछ चैनल बालाकोट के सेटेलाइट फुटेज खोज ही लाए और बुधवार को दिन भर बजाते रहे कि एनटीआरओ ने बताया है कि बालाकोट के टारगेट में तीन सौ मोबाइल सक्रिय थे, यानी तीन सौ आतंकी सक्रिय थे। सेटेलाइट बताती है : ये हमले से पहले वाली बिल्डिंग है और ये हमले के बाद वाली है। बाद वाली बिल्डिंग की छत में छेद ही छेद दिखते हैं। ये हमारे बमों ने किए हैं। रायटर झूठ कहता है कि कुछ नहीं हुआ! अरे, जब हम ‘घर में घुस कर मारते हैं’ तो ऐसे ही मारते हैं।
लेकिन बुधवार की सुबह इस शौर्यगाथा पर अचानक गाज गिरी! खबर आई कि राफेल की फाइल चोरी हो गई है और जो पेपर ‘रिव्यू पिटीशन’ में दाखिल किए गए हैं, उन पर विचार नहीं होना चाहिए!
कई चैनलों पर हिंदू के एन. राम ने कहा कि हमने न कोई जासूसी की, न पेमेंट किया। राफेल दस्तावेज जनहित में छापे। संविधान की धारा उन्नीस और आरटीआई कानून सुरक्षा देते हैं… ‘आफिशियल सीक्रेट्स एक्ट’ कोलोनियल समय का, 1923 का है… मैं डरता नहीं!
ज्यादातर एंकर चकित-विस्मित कि इतनी संगीन चोरी की खबर पहले क्यों नहीं दी गई?
राहुल ने प्रेस कान्फ्रेंस कर तुरंत टीप जड़ी : ये गायब… वो गायब… अब राफेल की फाइल गायब! इसकी जांच होनी चाहिए!
जाने किस दुष्ट की नजर लगी कि एक सुंदर ‘शौर्यकथा’ की जगह अचानक एक ‘चौर्यकथा’ छा गई और कहानी फिर निगोड़े राफेल पर आ टिकी!
फिर भी, अपनी धरती वीरों से खाली नहीं हुई। कबीरनगर की मीटिंग में एक भाजपा सांसद और एक एमएलए ने आपस में ऐसी ‘जूतालीला’ की कि उसे देख लोग कुछ देर के लिए बालाकोट की वीरता भूल गए!
सीन देख एक चैनल ने यह लाइन जड़ी : ‘मेरा बूट सबसे मजबूत’!

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