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बाखबर: यह है गीता का ज्ञान

एंकर बोली कि मैं इस वक्त विकास की नहीं, दिल्ली में बढ़ते अपराधों की बात कर रही हूं, तो वे कहने लगे कि देखिए दिल्ली की सीमाएं खुली हैं तब भी कानून अपना काम कर रहा है, और करेगा।

Author Published on: September 29, 2019 2:02 AM
ग्रेटा थनबर्ग

एक चैनल-चर्चा में एक वरिष्ठ वकील ने बताया कि चालीस साल पहले उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय में भारतीय दर्शन पढ़ा था, जिसमें वेदांत, उपनिषद्, गीता सब शामिल थे। जब तब किसी ने खतरनाक नहीं माना, तो अब आपत्ति क्यों? हाउडी मोदी’ सुपर हिट शो रहा! पूरे समय ‘मोदी-ट्रंप’ की जोड़ी ने जम कर तालियां बटोरीं! मोदी के एक एक वाक्य पर तालियां बजीं और देर तक बजती रहीं। यह शो पिछले न्यूयार्क वाले शो से भी सवाया दिखा। ‘अबकी बार ट्रंप सरकार’ के जवाब में ट्रंप जी भी बोल उठे कि मोदी जी रॉक स्टार हैं। एल्विस प्रेस्ले हैं।… उन्होंने भारत को एक किया है, हम उनको भारत का पिता मानते हैं! इस नए ‘पितृत्व’ पर जारी एक चैनल की बहस में एक पत्रकार कहिन कि ट्रंप जोकर हैं, उनके कहे को ‘सीरिसयली’ न लें।

इसे देख विपक्ष को सही समय पर ‘ईर्ष्या’ महसूस हुई। राहुल ने ट्वीट कर खिल्ली उड़ाई और एक चर्चक से ‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’ की उपाधि पाई! लेकिन हाय री बिटिया ग्रेटा थनबर्ग! यूएन सभा का शो तो असल में तूने लूटा, जब तूने गुस्से में दुनिया के उपस्थित मठाधीशों को फटकार लगाते हुए कहा कि ‘तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई?’ (हाउ डेअर यू?) कि पानी को गंदा करो, हवा को गंदा करो और हमारे जीने के हक को छीनो! तुम्हारी इस प्यारी फटकार पर सारे मठाधीश मुग्ध हुए और तुम्हारे लिए एक समांतर नोबेल का रास्ता खुला! पर्यावरण बिगाड़ेंगे गोरे और बचाएंगे भी गोरे और इनाम भी ले जाएंगे गोरे और खाली ताली बजाएंगे हम आप!

इसी सप्ताह शाहजहांपुर की कानून की उस छात्रा की वह ‘कॉमिक-ट्रेजिक’ कहानी भी दिखी, जिसमें एक स्वामी जी पर छात्रा ने बलात्कार का आरोप लगाया था और न्याय की मांग की थी, लेकिन ‘लेटेस्ट सीन’ में रेप आरोपित स्वामी जी अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ करते दिखते रहे, जबकि आरोप लगाने वाली छात्रा ‘ब्लैकमेल’ के आरोप में अंदर कर दी गई! एक बहस में एक आलोचनात्मक पत्रकार बोला कि यह तो उल्टा न्याय है, तो इसके जवाब में भक्त बोले कि स्वामी जी हमारी पार्टी के सदस्य नहीं हैं और कानून अपना काम कर रहा है।

इसी तरह एक शाम एक एंकर ने खबर दी कि बुलंदशहर के पुलिस अफसर सुबोध के उस ‘कथित’ हत्यारे को ‘बेल’ मिल गई है, जिसने मौका-ए-वारदात से ही एक घंटे में हजार फोन किए थे। इस पर भी एक अन्य भक्त प्रवक्ता ने प्यार से समझाया कि देखिए, कानून अपना काम कर रहा है! दोषी बख्शे नहीं जाएंगे और निर्दोष सजा नहीं पाएंगे! कुछ विद्वानों ने एक शाम एक चैनल में एक दार्शनिक किस्म का सवाल किया कि जब चुनाव आते हैं तो कोई न कोई, किसी न किसी बड़े विपक्षी नेता को अंदर ले जाने की तैयारी क्यों करने लगता है?

जब उस ‘कोआपरेटिव बैंक’ का बोर्ड ‘सर्वदलीय’ था, तो धन की धुलाई भी ‘सर्वदलीय भाव’ से हुई होगी। ऐसे में अकेले शरद पवार और उनके भतीजे को ही ‘टारगेट’ क्यों किया जा रहा है?
इसके जवाब में चैनलों में कुछ भक्त प्रवक्ता एकदम शांत स्वर में कहते रहे कि देखिए बेगुनाह को सजा नहीं होगी और गुनहगार बख्शे नहीं जाएंगे। कानून अपना काम कर रहा है। उसे अपना काम करने दें।
इस बीच आरएसएस दो बार चर्चाओं में आया। पहले संघ ने एक ‘महिला सर्वे’ देकर बताया कि ‘सिंगिल लिविंग’ महिला के मुकाबले परिवार वाली महिलाएं (चौंसठ फीसद) अधिक सुखी रहती हैं और फिर वह एनआरसी के संदर्भ में भागवत जी का बयान के जरिए चर्चा में आया कि देश मे रहने वाले सब भारतीय हिंदू हैं!
संघ की ऐसी ‘उदार हृदयता’ देख कई भक्त एंकरों के चेहरे खिल उठे। इस उदारता को वे किसी दिव्य राष्टÑीय प्रसाद की तरह चर्चाओं में बांटते रहे और साथ ही कांग्रेस, राहुल और सेक्युलर विपक्षियों पर हाथ साफ करते रहे।
ऐसे एंकरों का आभार कि इसी बहाने विपक्ष कुछ चैनलों में जिंदा बना रहता है!

एक चैनल वृहस्पतिवार को बार-बार दिल्ली में कानून-व्यवस्था की बदहाली को दिखाता रहा। एंकर कहती रही कि दिल्ली में दस दिन में दस अपराध हुए हैं। चेन-स्नैचिंग, लूट, गोली चालन और हत्या की वारदातें हुई हैं। सब सीसीटीवी में कैद हुई है और ये देखिए, यहां यहां यहां हुई हैं फिर भी पुलिस कुछ नहीं कर पा रही है। दिल्ली एकदम असुरक्षित शहर हो गया है, तो एक प्रवक्ता जी देर तक समझाते रहे कि यह हो रहा है। यह सब सच है। लेकिन देश विकास कर रहा है, यह भी तो सच है।

एंकर बोली कि मैं इस वक्त विकास की नहीं, दिल्ली में बढ़ते अपराधों की बात कर रही हूं, तो वे कहने लगे कि देखिए दिल्ली की सीमाएं खुली हैं तब भी कानून अपना काम कर रहा है, और करेगा। इसी शाम जैसे ही यह खबर टूटी कि चेन्नई के अन्ना विश्वविद्यालय ने दर्शन के पेपर में ‘भगवद्गीता’ को वैकल्पिक रूप में लगा दिया है तो एक बार फिर द्रमुक के स्टालिन जी को ‘गीता’ तमिल अस्मिता पर ‘खतरा’ लगी।

एक द्रमुक प्रवक्ता बोला कि यह भगवाकरण की साजिश है। संस्कृत थोपना है। उत्तर भारतीय लोग पहले तमिल गं्रथ ‘तिरुक्कुरल’ को तो पढ़ें, फिर गीता की बात करें! एंकर कहती रही कि तमिल वीर जी!‘गीता’ को संस्कृत के साथ तमिल भाषा में भी पढ़ाए जाने की व्यवस्था भी है और कि यह पर्चा ‘कंपल्सरी’ नहीं, वैकल्पिक है, लेकिन तब भी न माने तमिल के लाल! और तो और लेफ्ट भी बोल उठा यह सेक्युलर मूल्यों के खिलाफ है, जबकि ‘गीता’ वाले पूछते रहे कि सुकरात, प्लेटो बुद्ध दर्शन का पाठ ठीक और ‘गीता पाठ’ खतरनाक! यह क्या बात हुई? एक चैनल-चर्चा में एक वरिष्ठ वकील ने बताया कि चालीस साल पहले उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय में भारतीय दर्शन पढ़ा था, जिसमें वेदांत, उपनिषद्, गीता सब शामिल थे। जब तब किसी ने खतरनाक नहीं माना, तो अब आपत्ति क्यों?

यह है गीता का ज्ञान!

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