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बाखबर: एक धर्मयुद्ध के आसपास

एक हिंदू लड़की द्वारा एक ‘हेट-पोस्ट’ को फारवर्ड करने के ‘अपराध’ का संज्ञान लेते हुए झारखंड की एक अदालत ने सजा के रूप में उस लड़की को कहा कि वह लोगों को पांच कुरान बांटे। इस आदेश के बाद कई हिंदुत्ववादी संगठन मैदान में कूद पड़े।

Author July 21, 2019 1:27 AM
देखते-देखते, खबर चैनलों की बहसें धार्मिक घमासान से भर उठीं।

टिक टॉक’ घृणा फैलाता है। वह ऐसा ‘ऐप्प’ है, जो चीन का है। उसमें एक से एक घृणामूलक बातें कही-सुनी जाती हैं। वह बदलेखोरी को उकसाता है। ‘बैन’ करो। बैन करो। एक चैनल की मरी-मरी सी बहस में एक ‘एंटी टिक टॉक’ मैडम बोलती रहीं कि देश तेजी से विकास कर रहा है। उसमें ऐसे ‘हेट’ संदेश खतरनाक हंै, उनको बैन कर देना चाहिए। एक अल्पख्यात अभिनेत्री ने प्रतिवाद किया कि यह क्या बात हुई जी? यह तो एक ऐप्प है। आप किस किस ऐप्प को बंद करेंगे? क्या आप फेसबुक बैन करेंगे? ट्विटर बैन करेंगे, जो ‘हेट’ कमेंटों का अखाड़ा है?

एक ‘लिबरल’ जी कहे कि ऐप्प सब देशों में नियंत्रित किए जाते हैं, चीन खुद करता है, तो यहां भी नियंत्रित करें। बैन न करें। बैन करना जनतंत्र का गला घोंटना होगा। एंकर बोली कि भारत में बीस करोड़ ‘टिक टॉकिए’ हैं और दिन-रात बढ़ रहे हैं। नियंत्रित करना ठीक है। इधर जल मंत्रालय की स्थापना क्या हुई कि सारी एनजीओ छाप जलरक्षक बिरादरी अपनी-अपनी बिसलहरी ले-ले कर बहसों में आ बिराजी कि इतनी बारिश बेकार जाती है। सरकार कह रही है कि कुछ करना है। हम भी कह रहे हैं कि कुछ करना है। जल संचयन करना है। अगला विश्वयुद्ध पानी पर होना है।…

चैनल बोले कि नीति जब बनेगी तब बनेगी। फिलहाल देखिए पानी पानी पानी पानी।… सबसे पहले हम दिखा रहे हैं आपको पानी। हमारा पानी देखिए। हमारे रिपोर्टर गंदे पानी में डूब कर भी आपको पानी दिखाते हैं। अरे चंपक! जरा डुबकी मार के बता कि पानी कितना गहरा है? हाय! मैं चंपक! मेरे गले तक पानी है ये देखिए।

इसी चक्कर में बिहार के उप-मुख्यमंत्री को ‘सुपर थर्टी’ नामक पिक्चर देखते मीडिया ने देख लिए और कूट दिए गए कि इधर लोग डूब रहे हैं उधर सुशील मोदी पिक्चर का मजा ले रहे हैं।…  पूरे सप्ताह बारिशें ही बारिशें थीं। असम, बिहार, यूपी, राजस्थान में पानी ही पानी था। अस्पताल में पानी, सिनेमा में पानी, दफ्तर में पानी, सड़कों पर पानी।… ये देखिए, मुंबई में वो सौ साला इमारत गिरी, जो पहले से ही ‘गिराऊ’ थी।

और ये रही चेन्नई। पीने के पानी के लिए तरसती चेन्नई!
फिर भी एक तमिल नेताजी पानी के लिए लड़ने की जगह हिंदी से ही ‘फाइट’ करने लगते है कि हिंदी ने संसदीय बहसों का स्तर गिरा दिया है कि अंग्रेजी की बहसें बड़े ऊंचे स्तर की होती हैं, लेकिन हमने जब इन हिंदी-द्वेषी जी की ‘तंगे्रजी’ सुनी, तो धन्य हो गए। विचार का ऐसा महान स्तर था कि चेन्नई के लोग पानी के लिए आपस में लड़ रहे थे और उनके नेताजी हिंदी से लड़ रहे थे। सिर्फ कर्नाटक ने एक करामाती राजनीतिक कॉमेडी पेश की। न ‘फ्लोर टेस्ट’ हुआ न मालूम हुआ कि बहुमत किसका है? एक सरकार गिरने से पहले बहस के लंबे नाटक में फंसी रही। कोई चैनलों से पूछे कि यूपी की उस लड़की की प्रेम कहानी का क्या हुआ?

खबर चैनलों ने बताया था कि यूपी की उस लड़की ने अदालत से गुहार लगाई थी कि उसकी जान को खतरा है, उसे सुरक्षा दी जाए।… लेकिन तभी खबर आई कि इलाहाबाद की अदालत के गेट के बाहर एक युगल को एक गाड़ी में कुछ लोग अगवा कर ले गए हैं।… इस कहानी का क्या हुआ पता नहीं चला। चैनल अचानक चुप लगा गए! क्यों? इसके आगे कलजुगी खबरों के बीच झारखंड की एक अदालत ने अचानक खबरों में ‘धर्मयुद्ध’ की वापसी कर दी।

एक हिंदू लड़की द्वारा एक ‘हेट-पोस्ट’ को फारवर्ड करने के ‘अपराध’ का संज्ञान लेते हुए झारखंड की एक अदालत ने सजा के रूप में उस लड़की को कहा कि वह लोगों को पांच कुरान बांटे। इस आदेश के बाद कई हिंदुत्ववादी संगठन मैदान में कूद पड़े। एंकर भी अदालत से पूूछने लगे कि क्या यह सेक्युलर निर्णय है? बहसों में कई पैनलिस्ट बोले कि इसमें सांप्रदायिकता की बू आती है। देखते-देखते, खबर चैनलों की बहसें धार्मिक घमासान से भर उठीं।

ऐसे हर अवसर पर खबर चैनल एक ओर दो हिंदू विशेषज्ञ बिठा लेते हैं। दूसरी ओर दो मुसलिम विशेषज्ञ। फिर एक या आधा घंटे लंबा विचारों का एक ‘धर्मयुद्ध’ छिड़वा दिया जाता है। कुरान बांटने को लेकर हिंदू विशेषज्ञ कहते कि कुरान बांटने को क्यों कहा अदालत ने? एक वक्ता बोला कि आज कुरान बांटने की कही तो कल क्या मुसलमान बनने को कहेंगे? इसके जवाब में मुसलमान बोलते कि यह तो अच्छी बात है कि कुरान बांटे। सब धर्म बराबर हैं। लेकिन झारखंड के वकीलों ने इस आदेश का विरोध किया और अगले रोज अदालत ने इस आदेश को वापस ले लिया।

लेकिन इस ‘धर्मयुद्ध’ का पलट-रिकार्ड कोलकाता में बजा। तीन तलाक के खिलाफ ‘फाइट’ करने वाली, भाजपा की सदस्या इशरत जहां ने बहुत-सी औरतों के साथ एक सड़क पर बैठ कर हनुमान चालीसा का पाठ कर के मुसलिम विशेषज्ञों के बीच खलबली पैदा कर दी और ‘धर्मयुद्ध’ छिड़ गया।

एक ओर दो हिंदू विशेषज्ञ नजर आते, दूसरी ओर दो मुसलिम विशेषज्ञ दिखते। जो मुसलिम विशेषज्ञ कुछ पहले कहते थे कि कुरान बांटना अच्छा है, वही कहते दिखते कि इशरत ने हिजाब पहन कर हनुमान चालीसा का पाठ कर इस्लाम के अनुसार आचरण नहीं किया। एक सच्चे मुसलमान के लिए दूसरे धर्म के देवता की पूजा करना ‘शिर्क’ है, ‘हराम’ है। उधर कुछ पहले जो हिंदुत्ववादी लोग एक हिंदू लड़की को कुरान बांटने के आदेश को लेकर अदालत से नाराज थे, अब कह रहे थे कि इशरत ने अपनी मर्जी से हनुमान चालीसा का पाठ किया है! खबर चैनलों के प्राइम टाइम में ऐसे ‘धर्मयुद्ध’ आम बात है।

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