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बाखबर: इब्तिदा-ए-इश्क है रोता है क्या

एंकर पूछते कि तीन कोने के चुनाव में प्रियंका किसे नुकसान पहुंचाएंगी? सपा, बसपा को या भाजपा को? भाजपा वाले कहते कि हमें कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता। हमारी योजनाएं जनता के बीच काम कर रही हैं।

Author January 27, 2019 3:56 AM
Mamata Banerjee Rally: कोलकाता में यूनाइटेड इंडिया रैली में प.बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और विपक्ष के बाकी नेता।

एक से एक आश्वस्तिकारी दृश्य दिखते हैं: कोलकाता में पीएमों की पैठ लगी है। पीएम के योग्य एक से एक उत्तम कोटि के कैंडीडेट एक मंच पर हैं। एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं, पूरे चौबीस हाजिर हैं। देख लो, परख लो और तोल लो! राजनीति का स्वयंवर होने वाला है। सब चैनल भविष्य के पीएमों को दिखा रहे हैं और कटाक्ष कमेंट करके मजे ले रहे हैं। न माया आर्इं, न राहुल आए। न ये आए न वो आए! माया ममता में नहीं पटती! इनमें और उनमें नहीं पटती! कहा भी है- ‘कहि रहीम कैसे निभे बेर-केर को संग वे डोलत रस आपने उनके फाटत अंग।’ सबके अपने-अपने पीएम हैं। सबके अपने-अपने मोर्चे हैं। सबके अपने-अपने ताली बजाने वाले हैं। सबके अपने-अपने दांव हैं और अखाड़ा अभी-अभी खुला है। एक का नाम लो तो दस नाम आते हैं। अंत में सब जनता की शरण होकर कहते हैं कि पीएम हम नहीं बनाते, जनता बनाती है, वही बनाएगी!

इतनी बढ़िया कहानी को काटा किन्हीं स्वनामधन्य कथित हैकिंग एक्सपर्ट सैयद सूजा ने, जिनने वाया लंदन वीडियो कान्फ्रेंसिंग करके ‘ईवीएम मशीनें हैक होती हैं’ का आरोप लगा कर सबको हिला दिया। अमेरिका में छिपे, अपना चेहरा कैमरे से छिपाए सूजा बोलता रहा कि मशीन में चिप लगी है।… जो इस रहस्य को जानता था, मारा गया। मैं जान बचा कर किसी तरह अमेरिका में शरण लिए हूं। चौदह वाले चुनाव की ‘हैकिंग’ हमने रोकी थी।…

सबसे पहले एक अंग्रेजी चैनल ने इसे पूरा दिखाया, उसके बाद दूसरों ने लिया। कुछ देर तक तो हर चैनल पर सनसनी फैली रही। उसके बाद एंकर होश में आए। फ्रेम में कपिल सिब्बल की मौजूदगी ने इस विस्फोटक किस्म की कहानी को धराशायी कर दिया। सारी व्याख्या वाया सिब्बल कांग्रेस के संदर्भ से होने लगी।
उसके बाद तो चैनलों ने खोद-खोद कर कहानी को एकदम ‘फेक’ करार दिया कि इसका आयोजन करने वाले कांग्रेसी थे। सूजा की कहानी पूरी तरह झूठी थी। जो पते उसने बताए, वे गलत थे। अगर वह सच होता तो मशीन लेकर हैक करके दिखाता। सिर्फ आरोप लगाता रहा कि यह एक फेक न्यूज थी।… इसके बाद चैनलों में कांगे्रस की जो कुटाई हुई, वह देखने लायक थी। वह सिब्बल की लंदन में मौजूदगी को उनका निजी
मामला कह कर बचाती रही, लेकिन कहां तक बचाती? इसे कहते हैं : ‘आ बैल मुझे मार!’

सूजा की इस ‘फेक’ कहानी से बचाया प्रियंका की राजनीतिक ‘एंट्री’ ने। प्रियंका के महासचिव बनाए जाने के बाद सारा मीडिया प्रियंकामय हो गया।
प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी बोलीं : ये तो जोर का झटका धीरे से लगा है, आगे-आगे देखिए होता है क्या!
कोई बोला, ‘गेमचेंजर’! कोई बोला, ‘प्रियंका पूरे देश की हैं’! बीजेपी प्रवक्ता बोला : इसका मतलब है कि राहुल ने अपनी असफलता मान ली है। यह कांगे्रस का वंशवाद है।
‘प्रियंका तत्व’ को परिभाषित करने में एंकर और चर्चाकार देर तक बहसते रहे। कोई कहता कि प्रियंका का जादू बहुत नहीं चलने वाला। कोई कहता : वे इंदिरा की याद दिलाती हैं। कोई कहता कि यूपी में चार सीटों पर कुछ असर हो जाए, तो बहुत मानिए। कोई कहता कि बीस पच्चीस सीटों पर असर होगा। युवाओं को कांग्रेस की ओर आकर्षित कर सकती हैं। वे युवा हैं और आकर्षक व्यक्तित्व की धनी हैं।
एंकर पूछते कि तीन कोने के चुनाव में प्रियंका किसे नुकसान पहुंचाएंगी? सपा, बसपा को या भाजपा को? भाजपा वाले कहते कि हमें कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता। हमारी योजनाएं जनता के बीच काम कर रही हैं। मोदी सबसे पापूलर नेता हैं। प्रियंका को आगे करके राहुल ने अपनी असफलता स्वीकार की है।

ऐसे हिलते हुए पलों मे ‘नेशन का मूड’ बताने वाले ओपिनियन पोलों के मुकाबले और कुछ देखने लायक नहीं लगता। सो, दो चैनल ‘मूड ऑफ द नेशन’ बताने लगे। उनके पास सी-वोटर का सर्वे था और तीसरा चैनल कर्वी का सर्वे दिखाने लगा। तीनों के पास ‘आल इंडिया सेंपल’ थे। पहले सर्वे देने वाले एबीपी का पहला सवाल चैंकाता था कि ‘मोदी जीतेंगे या नहीं’!उसी का अगला सवाल था : ‘राहुल में दम है या नहीं’ और तीसरा सवाल था : ‘तीसरा कोई है या नहीं!’ यह सर्वे बताता था कि अगर आज चुनाव हों तो एनडीए कुल मिलाकर 233 सीट ले सकती है और यूपीए को 167 मिल सकती है और ‘अन्यों’ 143 सीटें मिल सकती हैं!यही दूसरे चैनल पर रिपीट हुआ! और इंडिया टुडे के कर्वी वाले ने भी लगभग ऐसी ही निराशावादी खबर दी। राज्यवार आंकड़ा बताते हुए बताया कि अगर आज चुनाव हों तो एनडीए को कुल 237 सीटें मिल सकती हैं, जबकि यूपीए को 166 सीटें मिल सकती हैं और ‘अन्यों’ को 140 सीटें मिल सकती हैं!

एक चैनल पर बीजेपी के एक प्रवक्ता ने तसल्ली दी कि ये सर्वे ‘सवर्णों’ को दिए दस प्रतिशत आरक्षण की घोषणा के पहले के हैं, यानी अगले सर्वे ही असली तस्वीर बता सकते हैं। लेकिन सर्वेक्षक यही कहते रहे कि इस बार किसी एक मोर्चे या एक दल को बहुमत नहीं मिलने वाला। संसद लटकंत होगी। त्रिशंकु होगी! जो भी सरकार बनेगी, समझौता सरकार ही बनेगी: ‘इब्तिदा-ए-इश्क है रोता है क्या, ओगे आगे देखिए होता है क्या!’

 

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