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बाखबरः नया भक्तिकाल

इस देश के सामने एक आफत थोड़े है! आजकल तो भक्त ही एक-दूसरे से स्पर्धा कर रहे हैं। एक ओर शिवसेना अयोध्या के लिए कूच कर रही है, दूसरी ओर हिंदू परिषद पहले ही अयोध्या में है। मंदिर को लेकर दोनों में बदाबदी चल रही है।

Author November 25, 2018 5:46 AM
प्रतीकात्मक फोटो (फाइल)

अपने चैनल भी बड़े जादूगर हैं। जब चाहे जिस कहानी को मार दें, जब चाहें मरी कहानी को जिंदा कर दें। इसी जादू के चलते एक शाम एक मामूली-सी झलकी देकर रफाल की बड़ी कहानी गायब कर दी गई। सीबीआई के बड़े अफसरों की राजनीति और मूंछों की लड़ाई भी आई गई कर दी गई। हां बड़े सीबीआई अधिकारी के बड़े वकील के रिपोर्ट लीक को लेकर बड़ी अदालत की फटकार की कहानी कुछ देर अवश्य बजाई गई। लेकिन सीबीआई के तीसरे अधिकारी मनीष सिन्हा की अभागी कथा तो एंकरों का जरा भी ध्यान नहीं खींच सकी।
जिस दिन सीबीआई की कहानी को होना था, उस दिन एक चैनल मिचेल जी की कहानी कहता रहा कि अब आने वाले हैं मिचेल साहब, अब होगी कांग्रेस की सिट्टी पिट्टी गुम। मिचेल जी को भारत लाया जा सकता है। लाओ मिचेल को लाओ। आओ मिचेल जी आओ। कांग्रेसी भ्रष्टाचार पर हमारा ज्ञान बढ़ाओ! एक चैनल का तो एजंडा ही राहुल-कांग्रेस की नित्य ठुकाई का लगता है। हर रोज प्राइम टाइम के तीस मिनट वह इस काम के लिए देता ही है।

इन दिनों खबर चैनलों के लिए मध्यप्रदेश की जनता बहुत महत्त्वपूर्ण हो चली है। हर चैनल किसी न किसी शहर में वहां की जनता को कैमरों के आगे बिठा लेता और जनता का मूड बताने लगता है। लेकिन मध्यप्रदेश की जनता भी इतनी शैतान है कि अपने तीखे कटाक्ष-कमेंटों से सबकी खिंचाई तो करती रहती है और कैमरों में एक मिनट के लिए हीरो बनने का मजा भी लेती रहती है, लेकिन मन में क्या है, इसे बाहर नहीं आने देती। जनता बड़ी चतुर सुजान है। हां, एक चर्चा में जैसे ही एक ने शिवराज को ‘मामा’ कहा तो दूसरे ने ‘कंस मामा’ का रूपक देकर यह भी कह दिया कि मामाओं का हम क्या करते हैं, ये तो मालूम ही है।…

इसी बीच कमलनाथ का एक वीडियो खूब बजाया गया, जिसमें वे मुसलमानों के नब्बे फीसद वोट चाहते थे। कांग्रेस विरोधियों के भागों मानो छींका टूटा। भाजपा प्रवक्ताओं की बांछें खिल उठीं। वे कांग्रेस को जम के रगड़ते रहे कि यह निर्लज्ज ध्रुवीकरण करने की राजनीति है। गैर-सांवैधानिक बयान है। चुनाव आयोग इसका संज्ञान ले।लेकिन एक चैनल में एक कांग्रेस प्रवक्ता ने कमलनाथ के वीडियो के बारे में सीधे प्रत्याक्रमण कर जवाब दिया कि कमलनाथ ने जो कहा है, उसमें गलत क्या है? आपके नेता तो आए दिन सांप्रदायिक धुवीकरण वाले बयान देते रहते हैं।…

ज्योतिरादित्य सिंधिया की टीवी कैमरोें से बात करने की शैली देखने लायक होती है। वे बिना किसी उत्तेजना के, हर टेढ़े सवाल का सरल और सटीक जवाब दे सकते हैं।
इन्हीं दिनों एक शाम दिग्विजय सिंह की भी एक बेहद संभली हुई बातचीत दिखाई दी। ज्योतिरादित्य से झगड़े का निराकरण करते हुए उन्होंने कहा कि वे मेरे बेटे जैसे हैं, उनसे कैसा झगड़ा?
एक अंग्रेजी चैनल के प्राण सबरीमला में ही अटके रहे। रिपोर्टर बताती रही कि सबरीमला के दर्शन के लिए आज एक भी महिला नहीं नजर आई। देवासम बोर्ड बड़ी अदालत गया है, तारीख मिल गई है सुनवाई की!

लेकिन सर जी दीप-वीर की शादी की दो करोड़ी की कहानी का अंत ही नहीं हो रहा। अरे चैनलो! क्या दर्शकों की जान लेकर छोड़ोगे? शादी होनी थी, सो हो गई। और कौन देवता हैं ये दीप-वीर टाइप। हमारे बनाए हीरो-हीरोइन हैं न! इतना न दिखाओ कि जनता इतनी ऊब जाए कि इनकी एक पिक्चर भी न चले।
वह तो खैरियत रही कि जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला, महबूबा और कांगे्रस द्वारा एक ‘अपवित्र गठबंधन’ बना कर अचानक सरकार बनाने के मंसूबों को एक फैक्स मशीन ने सूंघ लिया और सही वक्त पर खराब हो गई।… ऐसे ‘अपवित्र गठबंधन’ को भला वह कैसे आगे आने देती?

विधानसभा गई तो क्या? कश्मीर तो बच गया! अब रोते रहें तनतंत्र के लिए उमर अब्दुल्ला और कांग्रेस! जो होना था, सो हो गया!
वृहस्पतिवार को अचानक सरकार चेती और एक बडे मंत्री जी ने कह दिया कि सरकार करतारपुर साहिब कारीडोर की योेजना की पक्षधर है। अंतर्धार्मिक अध्ययन केंद्र बनाया जाएगा। गुरु नानक जी की पांच सौ पचासवीं वर्षगांठ पर बड़ा समारोह किया जाएगा। सिक्का और स्टांप भी जारी किए जाएंगे। सरकार की ओर से इतनी घोषणा होनी थी कि पंजाब के सीएम ने सीधे प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया! बेचारे नवजोेत सिद्ध्ू की पाकिस्तान जाकर करतारपुर कारीडोर की बात करने का गुनाह इस कदर बेलज्जत हुआ कि सारे उपक्रम में उनका किसी ने नाम तक न लिया, जबकि आइडिया उन्हीं का था।

कारीडोर संबंधी योजना की खबर के बाद की चर्चा में (न्यूज एक्स) में एक सेना अधिकारी ने बार-बार कहा कि ठीक है, आप कारीडोर की तैयारी करें, लेकिन पाकिस्तान के इरादों से भी सावधान रहें, क्योंकि उसका कोई भरोसा नहीं। लेकिन इस देश के सामने एक आफत थोड़े है! आजकल तो भक्त ही एक-दूसरे से स्पर्धा कर रहे हैं। एक ओर शिवसेना अयोध्या के लिए कूच कर रही है, दूसरी ओर हिंदू परिषद पहले ही अयोध्या में है। मंदिर को लेकर दोनों में बदाबदी चल रही है। भक्तों के बीच भी ऐसी स्पर्धा! हे प्रभु! आपकी लीला आप ही जानें! हमें तो लगता है कि एक नए किस्म के भक्तिकाल का आरंभ होने वाला है!

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