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बाखबर: वक्र चंद्रमा ग्रसहि न राहू

मसूद दुश्मन, तो उसे पालने वाला पाकिस्तान दुश्मन! एकदम सही बात। लेकिन उसे बार-बार बचाने वाला चीन दुश्मन क्यों नहीं? उसकी कुटाई क्यों नहीं की गई? हमारे परमवीर एंकर चीन को लेकर क्यों चुप लगा गए?

Author March 17, 2019 3:43 AM
मसूद अजहर। फोटो सोर्स : इंडियन एक्सप्रेस

हर शाम हिंदी का लगभग हर चैनल एक ‘जनता’ बनाता है और उसके मुंह में माइक ठूंस कर कहलवाता है कि कौन बनेगा अगला पीएम? किसकी बनेगी अगली सरकार?
कहीं किसी की ‘चौपाल’ लगी होती है, तो कोई कहीं ‘दंगल’ करा रहा होता है, कहीं कोई ‘जनता’ का ‘मूड’ बता रहा होता है।
‘जनता’ के नाम पर जुटाए गए ‘सलेक्ट लोग’ अपने-अपने पक्ष को जिताने के लिए जैसा हल्ला मचाते हैं, वही सीधा प्रसारित होता है और संदेश यही जाता है कि आप कुछ भी कहें सरकार तो यही रहने वाली है! बालाकोट कार्रवाई ने लोगों को अतिरिक्त जोशीला बना दिया है। हिंदी चैनलों की मानें तो भाजपा जीत चुकी है।
एक चैनल ने मूड भांप कर राजग सरकार की ‘पॉपुलरिटी की रेटिंग’ भी दे डाली, जिसमें ‘जनता’ के सबसे अधिक ‘चहेते’ (प्रेफर्ड) पीएम यही नजर आए। बालाकोट के बाद उनकी लोकप्रियता में चार से पांच फीसद इजाफा हुआ बताया गया, जबकि राहुल की लोकप्रियता में एक फीसद की गिरावट आई बताई गई।
इसके बरक्स एक हिंदी चैनल ने सीटों के हिसाब से सर्वे दिया और बताया कि सब कुछ के बावजूद भाजपा को 264 सीटें ही मिल सकती हैं। यूपी में सपा-बसपा 47 सीट ले सकती हैं।… ऐसी ही बातें इस चैनल ने अपने पिछले सर्वे में कही थीं! इसमें नया क्या था?
इसी बीच राहुल ने एक भाषण में तंज कसते हुए कुख्यात आतंकवादी मसूद अजहर को मसूद ‘जी’ क्या कह दिया कि कहर बरपा हो गया!

पहले से ही देशभक्त हुए कई एंकरों को अपने देशप्रेम को प्रदर्शित करने का अवसर मिल गया। इसके बाद राहुल की जो चौतरफा ठुकाई हुई, वह याद रहेगी। सब एंकर एक स्वर में कोसने लगे कि दिग्विजय ने ओसामा ‘जी’ कहा था, राहुल ने मसूद ‘जी’ कहा। कैसी समानता है!
दूसरे एंकर ने ताना कसा : ‘राहुल लव्स टेररिस्ट्स’! राहुल आतंकवादियों को प्यार करते हैं! एक और एंकर दहाड़ा : भारत के दुश्मन आतंकवाद के सरगना मसूद के नाम के आगे ‘जी’ लगा कर उसे इतना सम्मान क्यों दिया?
कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने समझाया कि राहुल का पूरा वक्तव्य देखें। वे तो व्यंग्य में कह रहे थे!
सर जी! वह व्यंग्य भी क्या कि जिसको अलग से ‘अर्थाना’ पड़े? और यह भी व्यंग्य कम ‘काकु कथन’ अधिक था। लेकिन दिन-रात देश को बचाने में व्यस्त एंकरों को इससे क्या? वे तो भाषा के मोटे-मोटे अर्थ ही समझ सकते हैं। ‘जी’ के ‘काकु’ को जिस तरह भाजपा के प्रवक्ताओं ने ‘अभिधा’ में लिया, उसी तरह एंकरों ने लिया! ‘काकु’ की बारीकियां समझें कि देश के दुश्मन को कूटें!
एक एंकर ने राहुल पर तरस खाया कि राहुल के पास न ‘विजन’ (दृष्टि) है न ‘कैपेसिटी’ (क्षमता) है!
दूसरा एंकर, जो हमेशा गुस्से में गरजता रहता है, एक बार फिर गरजा कि ये टुकड़े टुकड़े गैंग मुझसे तथा देश से माफी मांगें!
‘देश से माफी मांगें’ ये तो समझ आता है, लेकिन एंकर जी! तू क्या देश से भी बड़ा है?
कोढ़ में खाज इसी को कहते हैं कि जब राहुल हर चैनल पर मार खा रहे थे तभी टॉम वडक्कन कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो गए!

एक अंग्रेजी चैनल पर आकर टॉम वडक्कन ने बताया कि पुलवामा असली कारण बना। कांग्रेस ने सेना पर सवाल उठाए। इससे मैं सहमत न था। मेरे लिए कांग्रेस से देश महत्त्वपूर्ण है। दफ्तर में बीस लोग होते हैं। कोई नीति के बारे में नहीं सोचता। जब कोई सुनने वाला नहीं होता, तो वफादार बाहर हो जाते हैं।… भाजपा की विचारधारा मुझे पंसद आई।…
बीस साल तक एक विचार के प्रवक्ता और फिर एक दिन जिसकी जिदंगी भर आलोचना करते रहे, उसी की चरण वंदना! राजनीतिक शीर्षासन इसी को कहते हैं।
लेकिन दलबदल का मामला भी एकतरफा न रहा। इधर टाम वडक्कन भाजपा के अंगवस्त्र से सज्जित दिखे, तो लगभग उसी समय में एक चैनल पर उत्तराखंड के बड़े भाजपा नेता खंडूरी के सुपुत्र कांग्रेस में जाते दिखे! हिसाब बराबर!
ये ऐसे ही चमत्कारी दिन हैं। कल तक पार्टी का दुश्मन रहा बंदा पार्टी में आते ही देवता बन जाता है। विचारधारा गई तेल लेने!

इसके आगे ठुकने की बारी चीन की होनी थी, जिसने मसूद को ‘बैन’ होने से बचाया। लेकिन चीन का भाग्य देखिए कि मसूद अजहर को यूएन द्वारा प्रतिबंधित करने में चौथी बार अड़ंगा डालने पर भी चीन को न किसी प्रवक्ता ने यथेष्ट कोसा, न चीन की भर्त्सना की, बल्कि भाजपा द्वारा चीन के अड़ंगे के लिए भी नेहरू को ही अपराधी ठहरा दिया गया।
चीन के सर्वेसर्वा जिन पिंग के साथ पीएम की झूला-कूटनीति पर राहुल के कटाक्ष का जवाब देते हुए भाजपा के मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रत्यारोप लगाया कि यह नेहरू ही थे, जिनने चीन को सुरक्षा परिषद का सदस्य बनने दिया! इस तर्क से अजहर को बैन करने में चीन के अड़ंगे के लिए नेहरू ही जिम्मेदार हुए!
मसूद दुश्मन, तो उसे पालने वाला पाकिस्तान दुश्मन! एकदम सही बात। लेकिन उसे बार-बार बचाने वाला चीन दुश्मन क्यों नहीं? उसकी कुटाई क्यों नहीं की गई? हमारे परमवीर एंकर चीन को लेकर क्यों चुप लगा गए?
सच कहा है : वक्र चंद्रमा ग्रसहि न राहू!

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