ravi shankar prasad article about 4 years of narendra modi government - उम्मीद और विकास के चार साल - Jansatta
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उम्मीद और विकास के चार साल

ये चार साल उम्मीद और विकास के रहे हैं, और आगे भी हमारा यही प्रयास रहेगा, क्योंकि हम साधारण भारतीयों के चेहरों पर मुस्कान लाना चाहते हैं और भारत को नई मंजिलों की तरफ बढ़ता हुआ देश बनाना चाहते हैं।

Author May 27, 2018 4:35 AM
केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद (PTI File Photo)

रविशंकर प्रसाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजग सरकार ने पिछले चार साल में देश को रूपांतरित किया है- निराशा से आशा में, नीतिगत पक्षाघात से नीतिगत सक्रियता में, बजबजाते भ्रष्टाचार से साफ-सुथरी सरकार में, और सर्वोपरि, एक उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में भारत की छवि निर्मित की है, जिसका नेतृत्व गौरवशाली वैश्विक नेता नरेंद्र मोदी के हाथ में है, वैश्विक मामलों में जिनकी राय को बहुत महत्त्व दिया जाता है। अनेक तरह से भारत के लोगों की वे अपेक्षाएं फलीभूत हुर्इं, जिन अपेक्षाओं के साथ उन्होंने भाजपा को स्पष्ट बहुमत दिया था, जो कि तीस वर्षों में पहली बार हुआ। वर्ष 2014 का जनादेश आकांक्षा और परिवर्तन के लिए था, और इस सब से बढ़ कर, देश की डूबती छवि को बचाने तथा देश को विकास व सुशासन के रास्ते पर लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अंत:शक्ति और क्षमता पर विश्वास का जनादेश था यह।

चार साल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का कद बढ़ा है। चाहे चीनी राष्ट्रपति हों या नवनिर्वाचित रूसी राष्ट्रपति, वैयक्तिक कूटनीति की एक रूपरेखा अनौपचारिक शिखर वार्ताओं के जरिए उभरी है, जिसकी परिणति रूसी राष्ट्रपति के ऐतिहासिक उदाहरण में हुई, जब वह पहली बार, किसी नेता को विदा करने हवाई अड्डे गए। अफगानिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, ओमान और ईरान ने नरेंद्र मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से विभूषित किया। जॉर्डन के बादशाह भारत आए, आतंकवाद के खिलाफ महत्त्वपूर्ण और मुखर संदेश लेकर। भारत के प्रधानमंत्री पहली बार, इजराइल की ऐतिहासिक यात्रा पर गए, फिर फिलस्तीन भी। आसियान के दस नेता एक साथ नई दिल्ली आए, 26 जनवरी को, हमारे साथ एकजुटता जाहिर करने के लिए। ये सभी देश वैश्विक आतंकवाद से लड़ने के मुद्दे पर भारत के साथ जुड़ रहे हैं। हमारी सरकार ने भारत के सुरक्षा संबंधी हितों की रक्षा के लिए हमारी सेनाओं को भी नया आत्मविश्वास दिया है।

यूपीए सरकार ने विरासत में आर्थिक बदइंतजामी दी थी। जबकि पिछले चार सालों में भारतीय अर्थव्यवस्था के सभी बुनियादी तत्त्वों को लगातार मजबूती मिली है। इस दौरान एफडीआइ की रफ्तार अपूर्व रही, विदेशी मुद्रा भंडार रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया, और साथ ही सुशासन के फलस्वरूप अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष, विश्व बैंक और अन्य शीर्ष वैश्विक संस्थाओं की सराहना मिली कि भारत सबसे तेज वृद्धि वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है और अगले साल इसकी वृद्धि दर 7.5 फीसद होगी। राजकोषीय घाटा और मुद्रास्फीति नियंत्रण में रहे हैं, जो कि हमारी अर्थव्यवस्था की अच्छी सेहत को प्रतिबिंबित करता है।

गरीबों के हक और हिस्सेदारी पर जोर देते हुए चार साल में जो हासिल किया गया वह है समावेशी विकास। एक अभियान की तरह 7.5 करोड़ शौचालयों का निर्माण, गरीब तथा वंचित परिवारों को 3.5 करोड़ उज्ज्वला एलपीजी गैस कनेक्शन, मुद्रा योजना के तहत 12.33 करोड़ लोगों को 5.67 लाख करोड़ रु. का ऋण वितरण, जिनमें से एक खासी संख्या अनुसूचित जाति, जनजाति और अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों की थी- ये सब गरीबों के सशक्तीकरण की दिशा में क्रांतिकारी कदम रहे हैं। वैश्विक स्तर पर सराही गई ‘जेएएम’ त्रयी (31 करोड़ जन धन बैंक खाते, 121 करोड़ मोबाइल फोन और 120 करोड़ आधार डिजिटल पहचान पत्र) के फलस्वरूप कल्याणकारी लाभ सीधे गरीबों के खातों में पहुंच रहे हैं, और इससे सरकारी खजाने के नब्बे हजार करोड़ रु. बचाए गए, जो पहले बिचौलियों और फर्जी दावेदारों की जेब में चले जाते थे।

डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया और स्टैंड-अप इंडिया जैसे कार्यक्रम तकनीक की शक्ति का इस्तेमाल आम भारतीयों का सशक्तीकरण करने और उनके जीवन को बेहतर बनाने में कर रहे हैं। डिजिटल इंडिया एक जन आंदोलन बन गया है जिसके तहत 2 लाख ग्राम पंचायतों तक फैले हुए 2.9 लाख कॉमन सर्विस सेंटर हैं, जो बैंकिंग, बीमा, भूमि रिकार्ड जैसी दो सौ से अधिक सेवाएं डिजिटल तरीके से मुहैया कराते हैं और ये जन-सेवा केंद्र नए उद्यमी और नए अवसर पैदा कर रहे हैं। वे डिजिटल साक्षरता का प्रसार और ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ते सैनिटरी नैपकिन मुहैया कराने जैसे काम भी करते हैं। दस लाख लोग इन सेवा केंद्रों पर काम करते हैं और जो ग्राम-स्तरीय उद्यमी इन्हें चलाते हैं उनमें बावन हजार महिलाएं हैं।

सरकार की मदद से सत्ताईस राज्यों और केंद्रशासित राज्यों में 89 बीपीओ खोले गए हैं। ई-अस्पताल, ई-छात्रवृत्ति, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, जीवन प्रमाण जैसे कम लागत वाले, देशी तरीके से विकसित किए गए तकनीकी समाधान उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल सेवाएं लोगों के घरों तक पहुंचा रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में नए मुकाम तय किए जा रहे हैं, जहां 2014 में मोबाइल फोन और उपकरण बनाने वाली केवल दो फैक्टरियां थीं, वहीं अब ऐसी एक सौ बीस फैक्टरियां देश में काम कर रही हैं जो दुनिया के लगभग सभी ब्रांडों का प्रतिनिधित्व करती हैं। कृषिक्षेत्र में भी, फसल बीमा और सिंचाई से लेकर दूध की नई योजनाओं और नीली क्रांति से लेकर बेहतर बाजार-पहुंच तक (जो ई-एनएएम जै से समाधान के माध्यम से मूर्तिमान हुई है, जो 78.8 लाख पंजीकृत किसानों को चौदह राज्यों में 585 कृषि उपज मंडियों से जोड़ता है)- ये कदम किसानों के सशक्तीकरण और उनकी बेहतरी का जरिया बन रहे हैं। नीम-चढ़ाई यूरिया जैसी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन ने फर्टिलाइजर आपूर्ति के मसले को हल कर दिया है।

लघु सिंचाई, किसानों के लिए ऋण सुविधा और प्रधानमंत्री कृषि संपदा योजना जैसी योजनाओं के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे के निर्माण पर जोर देकर एक ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही है जो किसानों का सशक्तीकरण करती है। आयुष्मान भारत राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना गंभीर बीमारी की स्थिति में प्रति परिवार पांच लाख रुपए तक बीमा मुहैया कराती है और इस योजना के दायरे में समाज के आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के दस करोड़ परिवार आएंगे। जिस तीव्र गति से आधारभूत ढांचों का निर्माण हो रहा है और लंबित परियोजनाएं पूरी की जा रही हैं, वह आम लोगों की भलाई का नया प्रतिमान है- चाहे वे राष्ट्रीय राजमार्ग हों या ग्रामीण सड़कें, या अंधेरे में डूबे रहे गांवों तक बिजली पहुंचाना- यह कार्य रिकार्ड समय में पूरा किया गया। नई उड्डयन नीति ने ऐसी स्थिति निर्मित की है कि ‘हवाई चप्पल’ पहनने वाला भारतीय भी ‘हवाई जहाज’ में उड़ सकता है। ये हमारी सरकार की विशेषता बताने वाली उपलब्धियां हैं।

‘सबका साथ, सबका विकास’ की टिकाऊ शक्ति हमारी सभी गतिविधियों में प्रतिबिंबित होती है और यह हमारी सरकार की मूल विशेषता बनी रहेगी- भेदभाव के बगैर तथा समावेशी। ये चार साल उम्मीद और विकास के रहे हैं, और आगे भी हमारा यही प्रयास रहेगा, क्योंकि हम साधारण भारतीयों के चेहरों पर मुस्कान लाना चाहते हैं और भारत को नई मंजिलों की तरफ बढ़ता हुआ देश बनाना चाहते हैं।

(लेखक केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं विधि मंत्री हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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