राम के आदर्श का केंद्र है अयोध्या

उत्तर प्रदेश के फैजाबाद के जिला सहादतगंज में एक नवंबर 1954 को लल्लूसिंह का जन्म हुआ। स्नातकोत्तर तक की शिक्षा हासिल की। भारतीय जनता पार्टी की ओर से 1991 से 2012 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में फैजाबाद के सांसद के रूप में जीत दर्ज की। रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या के विकास पर पूरे देश की नजर है। वैश्विक पर्यटन के मानचित्र पर अयोध्या और राममंदिर को पहचान दिलाने की कवायद में जुटे हैं। आम आदमी से जुड़े और जमीनी नेता की पहचान रखते हैं।

भारतीय जनता पार्टी के नेता लल्लू सिंह

फैजाबाद के सांसद और भारतीय जनता पार्टी के नेता लल्लू सिंह का कहना है कि अयोध्या को वैश्विक धार्मिक केंद्र बनाने की मुहिम तेजी से शुरू हो चुकी है। प्राचीन शहर होने के कारण यहां तोड़-फोड़ संभव नहीं है, लेकिन अन्य उपायों को अपना कर दो से तीन साल के अंदर भव्य राम मंदिर बन कर तैयार हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अयोध्या को केवल भव्य राममंदिर की दृष्टि से न देखें। राम ने जो आदर्श स्थापित किए, वह पूरे देश की संस्कृति से जुड़ा हुआ है। अयोध्या आदर्श का भी केंद्र बनेगी। बातचीत कार्यक्रम का संचालन किया कार्यकारी संपादक मुकेश भारद्वाज ने।

मनोज मिश्र : अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद वहां क्या-क्या बदलाव हुआ है?
लल्लू सिंह : अभी तो कोई बदलाव नहीं हुआ है, पर बहुत तेजी से बदलाव की ओर अग्रसर है। पूरे देश की निगाहें अयोध्या पर लगी हैं। पूरे देश से जो स्वयंसेवी संस्थाएं हैं, होटल वाले हैं, बहुत सारे लोग वहां पर अपने कारोबार शुरू करेंगे। स्वयंसेवी संस्थाएं श्रद्धालुओं के लिए धर्मशालाएं वगैरह बनाना चाहती हैं। अभी तो सरकार की तरफ से भी कई योजनाएं बन रही हैं कि अयोध्या का किस तरह से विकास किया जाए और मोटे-मोटे रूप से योजना लगभग बन चुकी है, उसमें राष्ट्रीय स्तर पर और प्रदेश के स्तर पर कुछ संशोधन होगा। जब नरेंद्र मोदी जी प्रधानमंत्री बने थे, तभी तय हो गया था कि देश भर में हमारे जो आस्था के केंद्र हैं, उनका ठीक से विकास हो। कार्यकर्ता के नाते मैंने भी अपनी समझ से स्थानीय कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, से मिलकर विचार-विमर्श किया कि क्या काम किया जा सकता है। वह सब मैंने किया। खासकर रेल और सड़क मार्ग के विकास के मामले में बहुत काम हुआ है। जैसे बाराबंकी-जाफराबाद के बीच रेल लाइन का दोहरीकरण स्वीकृत हुआ। प्रयाग से फैजाबाद, प्रयाग से बस्ती तक रेल लाइनों का काम शुरू हुआ। पिछली सरकार में जब प्रभु जी रेलमंत्री थे, तो उनसे मैंने आग्रह किया था कि फैजाबाद से रामेश्वरम के बीच रेल चलाई जाए, क्योंकि अयोध्या और रामेश्वरम का गहरा नाता है। तो, प्रभुजी ने उसे स्वीकृत कर दिया था। अब वह ट्रेन चलने लगी है। इसके अलावा अयोध्या के चारों ओर जो सड़कें हैं, उन्हें ठीक करने का काम शुरू हो चुका है। एक मेडिकल कॉलेज भी वहीं बन कर शुरू हो चुका है। अयोध्या में चौरासी कोसी परिक्रमा होती है। उस मार्ग में अनेक ऋषि-मुनियों के आश्रम हैं। उनका विकास किया जा रहा है। अगर हमें राम को जानना है, तो राम की उत्पत्ति को भी तो जानना जरूरी है। उनसे जुड़े तमाम स्थलों को विकसित किया जा रहा है, ताकि लोग राम से जुड़े सभी स्थलों के बारे में जानें। ऐसे करीब डेढ़ सौ स्थल हैं। हमने नितीन गडकरी जी से बात की कि चौरासी कोसी परिक्रमा के रास्ते में पड़ने वाले इन सभी स्थलों का विकास हो, ताकि लोग अयोध्या आएं, तो उन्हें देखने के लिए और भी जगहें हों।

पंकज रोहिला : सरकार अयोध्या को पर्यटन केंद्र बनाना चाहती है। मगर अभी रामजन्मभूमि तक पहुंचने के रास्ते सुगम नहीं हैं, उसे कैसे ठीक करने जा रहे हैं?
’वह भी होने जा रहा है। उसकी योजना का प्रारूप तैयार है। आपको साल भर में वहां चौड़ी और सुंदर सड़कें मिलेंगी। शहर के भीतर भी और बाहर भी। शहर के भवनों को उजाड़ा तो नहीं जा सकता, पर जो अतिक्रमण है, उसे हटा कर इस काम को पूरा किया जाएगा। गडकरी जी ने चौरासी कोसी का भी उद्घाटन कर दिया है। प्रधानमंत्री जी, पर्यटनमंत्री जी, मुख्यमंत्री जी को हमने उन स्थानों की महत्ता बताई है। पुराणों और ऐतिहासिक ग्रंथों में उनके बारे में उपलब्ध समस्त जानकारियां इकट्ठा करके हमने दे दी है। वे इस पर काम कर रहे हैं।

दीपक रस्तोगी : सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब सरकार को ट्रस्ट का गठन करना है। इसे लेकर भी विवाद हैं। सरकार ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। वहां का सांसद होने के नाते आपने कोई सुझाव दिया है क्या?
’देखिए, जो जिसका काम है, उसे ही वह काम करना चाहिए। वह सरकार का काम है, राष्ट्रीय नेतृत्व का काम है। वह अपना काम करेगी। हमारा ट्रस्ट से बहुत कुछ लेना-देना नहीं है। हम शुरू से ही यह मान कर चलते ही हैं कि हम अयोध्या के राम भक्तों की सेवा करते हैं। कौन ट्रस्ट में रहेगा, कौन रहेगा, इससे हमारा मतलब नहीं है। अगर कोई सुझाव मांगा जाएगा, तो देंगे।

मुकेश भारद्वाज : मंदिर कब तक बन जाएगा?
’मंदिर बनने का काम मुझे लगता है कि दो-तीन महीने में शुरू हो जाएगा। उसे तैयार होने में दो-तीन साल तो लगेंगे। पर मंदिर भव्य बनेगा, यह हम विश्वास दिलाते हैं।

मृणाल वल्लरी : मस्जिद निर्माण के लिए जो फैसला आया है, उस पर क्या हो रहा है?
’उस पर भी सरकार विचार कर रही है कि उसके लिए जमीन कहां दी जाए। बहुत सारे स्थानों के बारे में विचार हो रहा है। जो तय होगा, वह उसे दे देंगे पांच एकड़।

सूर्यनाथ सिंह : अब अयोध्या पर फैसला आ गया है। यह भाजपा का पुराना मुद्दा रहा है। इस फैसले से भाजपा को कितना लाभ मिलेगा?
’हम राजनीतिक दृष्टि से इस पर विचार नहीं करते और करना भी नहीं चाहिए। नुकसान फायदा तो स्वाभाविक प्रक्रिया है। चलता रहता है। जैसे अभी मैं अपने बारे में यह कह सकता हूं कि मैंने यही सीखा है कि कर्तव्य करते रहो, लोगों को जोड़ते रहो। विरोधियों के भी काम करो, वे आज नहीं तो कल तुमसे जुड़ेंगे जरूर। वोट से उनको न जोड़ो। आज भाजपा को जो वोट मिल रहा है, कभी किसी ने सोचा था कि इतना वोट मिलेगा। इसलिए मिल रहा है कि लंबे समय से लोगों ने काम किया है।

मृणाल वल्लरी : आप जोड़ने की बात कर रहे हैं, पर कश्मीर और असम, पूर्वोत्तर हमसे दूर क्यों होते जा रहे हैं?
’अच्छा, यह बताइए कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद तीन सौ सत्तर खत्म होना चाहिए था कि नहीं? जो पूरा देश चाहता था, वह हो गया, तो बुरा क्या है। देश के आजाद होने के बाद भी, देश का अभिन्न हिस्सा होने के बाद भी वहां का निशान अलग, विधान अलग क्यों होना चाहिए? क्या लोगों को लगता नहीं था कि वह हमसे अलग है? वहां व्यापार नहीं कर सकते थे, जमीन नहीं खरीद सकते थे। वहां शादी-विवाह नहीं कर सकते थे। और वह आतंकवादियों की शरणस्थली बन गया था। अगर हमें आतंकवाद समाप्त करना है, पीओके को लेना है, तो यह सब तो करना पड़ेगा न कभी न कभी!

मृणाल वल्लरी : नागरिकता संशोधन बिल के पास होने के बाद कई देशों के नेताओं ने अपने भारत दौरे रद्द कर दिए। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को भी अपने दौरे रद्द करने पड़े। इसे आप किस रूप में देखते हैं?
’हम अगर अपने देश को जोड़ने का काम करें, आतंकवाद को समाप्त करने का काम करें, देश के हित में काम करें, तो उसमें दो-चार दौरे रद्द भी हो जाएं, तो क्या फर्क पड़ता है! इससे देश की प्रतिष्ठा पर कोई असर नही पड़ेगा। इससे विश्व बिरादरी में भी कोई असर नहीं पड़ेगा। वैचारिक संघर्ष इस समय पूरी दुनिया में हो रहा है। इसलिए कुछ न कुछ मुद्दे उठा कर हमारी विचारधारा के विरोधी लोग इस तरह का आंदोलन करते रहते हैं। नौजवानों को प्रेरित करते रहते हैं। यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।

पंकज रोहिला : पहले जो नागरिकता कानून था, वह तो सबके लिए था, मगर नए कानून में मुसलमानों को क्यों छोड़ दिया गया?
’इसमें मुसलमानों को छोड़ने का तो कोई मतलब ही नहीं है। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश ने अपने संविधान में इस्लाम को मान लिया है। इसलिए स्वाभाविक रूप से वहां जो हिंदू, जैन, सिख, ईसाई आदि हैं उनके धर्मांतरण करने का प्रयास हुआ, उन्हें प्रताड़ित किया गया, उनकी बहन-बेटियों को बेइज्जत किया गया और वे वहां छोड़ कर यहां शरणार्थी के रूप में आए, उन्हें नागरिकता देने का मामला है। मगर जो इस्लामिक देश हैं वहां के लोग आते हैं, तो उन्हें नागरिकता देने का सवाल ही नहीं है, क्योंकि उन्हें तो वहां सारे अधिकार मिले हुए हैं। जो आतंकवाद फैलाते हैं, उन्हें नागरिकता दें, तो वह हमारे देश के हित में नहीं होगा।

मनोज मिश्र : मगर संसद में सवाल उठाया गया कि अगर उन देशों से गैर-मुसलिम आतंकवादी भी आते हैं, तो उन्हें कैसे पहचानेंगे?
’अमूमन देखा गया है कि सिर्फ इस देश में नहीं, पूरी दुनिया में जहां भी आतंकवादी घटनाएं हुई हैं, वहां एक ही समुदाय के लोग उनमें लिप्त पाए गए। इक्का-दुक्का को छोड़ दें। मगर जो यहां स्वाभाविक रूप से नागरिक हैं, उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है। हम प्रयास भी कर रहे हैं।

सूर्यनाथ सिंह : आप उत्तर प्रदेश से हैं। वहां जब दूसरे दलों की सरकारें थीं, तो अपराध काफी बढ़ा हुआ था। भाजपा सरकार आने के बाद माना जा रहा था कि अपराधों पर काबू पाया जा सकेगा। पर ऐसा नहीं हो पाया। अपराध बढ़े हैं। क्यों?
’ऐसा नहीं है। आज सड़कों पर अपराधी नहीं दिखाई देते, जो गाड़ी में असलहे लेकर निकला करते थे। मगर पिछले पंद्रह-बीस सालों में सरकार की नीतियों के कारण जो बढ़ा था, वह एकदम से नहीं खत्म किया जा सकता। धीरे-धीरे उस पर अंकुश लगाया जा रहा है। प्रदेश सरकार का प्रयास है कि वहां का अपराधीकरण खत्म हो। इसके लिए समाज को भी मिल कर वातावरण बनाना पड़ेगा।
मृणाल वल्लरी : आपकी पार्टी के नेता अक्सर लड़कियों के कपड़े, मोबाइल फोन वगैरह की बातें छेड़ देते हैं। ऐसे में स्त्रियों की सुरक्षा कैसे संभव होगी?
’यह सब फालतू की बात है। कोई भी अगर ऐसा करता है, तो नहीं करना चाहिए। समाज की मानसिकता ठीक बने, इसके लिए वातावरण बनाने के लिए सभी को मिल कर प्रयास करना चाहिए।

दीपक रस्तोगी : नागरिकता संशोधन के बाद पूर्वोत्तर में जो विद्रोह हुआ है, वहां तो हिंदू मुसलमान का मुद्दा है ही नहीं। उससे कैसे निपटेंगे?
’उस पर भी संसद में बात उठी। वहां के सांसद लोग जो कह रहे हैं, उनके विचारों को सुना जाएगा। उनकी मांगों पर विचार होगा, यह बात है केंद्र सरकार के मन में।
पंकज रोहिला : रोजगार के मोर्चे पर उत्तर प्रदेश को कहां खड़ा पाते हैं?
’हमको लगता है कि उत्तर प्रदेश में सरकार कृषि के क्षेत्र में काम कर रही है, उससे बेरोजगारी की समस्या का समाधान जल्दी हो जाएगा। फिर पिछले दो सालों में योगी जी ने जिस तरह उद्योग-धंधों को बढ़ावा देने का काम किया, जिस प्रकार से समिट कराई है उसमें कुछ ऐसे काम होंगे, उद्योग लगेंगे कि जिस जिले में जो उत्पाद होता है, उसे बढ़ावा मिले। इससे लोगों को रोजगार मिलेगा। जैसा कि चौरासी कोसी परिक्रमा की बात की। वहां डेढ़ सौ जगहों पर पर्यटन के लिहाज से विकास होगा तो वहां दुकानें खुलेंगी, वहां लोगों के रुकने के लिए होटल बनेंगे, ढाबे खुलेंगे, कई धंधे पनपेंगे। इस तरह बहुत सारे लोगों को स्वाभाविक रूप से रोजगार मिलेंगे।

आर्येंद्र उपाध्याय : देश की अर्थव्यवस्था निरंतर बिगड़ रही है। उसे संभालने की तरफ सरकार गंभीर क्यों नजर नहीं आती?
’सरकार इसे लेकर सजग है। हम सबको भरोसा है कि भविष्य में इस समस्या से पार पा लेंगे। देखिए, जब आप कुछ करते हैं, तो उसके कुछ अच्छे और बुरे दोनों तरह के परिणाम आते हैं। स्वाभाविक रूप से नोटबंदी हुई और जीएसटी भी लागू हुई। उसके परिणाम भविष्य में नजर आएंगे, कुछ दुष्परिणाम भी हो सकते हैं। भारतीय जनता पार्टी मानती है कि भविष्य में इससे देश मजबूत ही होगा। कुछ समय के लिए कठिनाई जरूर है, पर इससे पार पा लिया जाएगा।

 

पढें रविवारीय स्तम्भ समाचार (Sundaycolumn News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

अपडेट