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बाखबरः राहुल नाम केवलम्

राहुल भी छेड़ने से बाज नहीं आते। अच्छे-खासे कैलास जा रहे थे। जा रहे थे तो शिवमहिम्न स्तोत्र का जाप करते, लेकिन जाने से ऐन पहले उनको न जाने क्या सूझी कि ‘राफेल स्तोत्र’ का उलटा जाप कर गए और इस तरह अपनी धुलाई का इंतजाम कर गए!

Author September 9, 2018 3:12 AM
राहुल भी आए दिन अपनी हरकतों से मित्रों को चिढ़ाए रहते हैं और खबरों में बने रहते हैं।

राहुल घर से निकलें तो उनके रकीब परेशान, और न निकलें तो परेशान!

– जनेऊधाारी राहुल!

– मंदिरवादी राहुल!

– कैलास मानसरोवर गामी राहुल!

– नरम हिंदुत्व का कार्ड खेलते राहुल!

एक ही शो में सारे विशेषण खपा दिए! एंकर परेशान। प्रवक्ता परेशान। राहुल जब भी चैनलों में आते हैं, बहुतों को चिढ़ा कर निकल जाते हैं! भाजपा के एक एमपी ने उनको ‘नाली का कीड़ा’ कहा! फिर सुनाई दिया कि वो ‘सीजोफ्रीनिक’ (स्कीजोफ्रीनिक) है! और फिर एक दिन तेलंगाना के सीएम राहुल को ठोक उठे : वो सबसे बड़ा विदूषक (बफून) है! ये कैसा ‘विदूषक’ है कि सारे रकीबों को हिला के रखे हुए है! लगता है, राहुल के मित्रों को राहुल का ‘आब्सेसन’ है! यह बात एक चर्चा में राजदीप सरदेसाई ने इंडिया टुडे में कही कि भाजपा राहुल से ‘आब्सेस्ड’ लगती है, तो प्रवक्ता बोले कि मीडिया को ही राहुल का ‘आब्सेसन’ है!

और राहुल भी आए दिन अपनी हरकतों से मित्रों को चिढ़ाए रहते हैं और खबरों में बने रहते हैं। कुछ ऐसे भी हैं, जो चिढ़ने के लिए उधर बैठे रहते हैं। और हर वक्त ‘राहुल नाम केवलम्’ जपते रहते हैं। ऐसी कोई चर्चा नहीं, जिसमें राहुल का नाम दस-बीस बार न आए। कई एंकर सिर्फ राहुल-राहुल जपने की तनखा पाते लगते हैं। राहुल मीडिया के अनिवार्य ‘भजन’ हैं। यही उनकी यूएसपी है। एक्सिस- इंडिया टुडे के सर्वे में इसीलिए राहुल अब पैंतीस प्रतिशत लोगों के प्रिय हो चले हैं! ‘जस जस सुरसा बदन बढ़ावा/ तासु दून कपि रूप दिखावा!’

राहुल भी छेड़ने से बाज नहीं आते। अच्छे-खासे कैलास जा रहे थे। जा रहे थे तो शिवमहिम्न स्तोत्र का जाप करते, लेकिन जाने से ऐन पहले उनको न जाने क्या सूझी कि ‘राफेल स्तोत्र’ का उलटा जाप कर गए और इस तरह अपनी धुलाई का इंतजाम कर गए! वे ज्यों ही कैलास गमन किए, त्यों ही एबीपी पर भाजपा प्रवक्ता कह उठे : राहुल कभी कहीं निकल जाते हैं, कभी कहीं। उनको बताना चाहिए कि वहां क्या करने गए हैं? वाड्रा पर केस हुआ। आरोप वही रहे, जो मुअनजोदड़ो काल के हैं और रिपीट होकर अपनी चमक तक खो बैठे हैं। लेकिन इस उबाऊ कहानी को बताते हुए अंग्रेजी के दो एंकरों से पहले वाड्रा ठुके, फिर एंकर चिल्लाए : राहुल जवाब दें! राहुल जवाब दें!

राहुल इस दौर में निंदा का महत्त्व जानते हैं। वे जान गए हैं कि जितने कुसेंगे उतने ही मूल्यवान बनेंगे! आश्चर्य कि कुछ भाजपा नेता भी इस पुण्यकर्म में उनकी पूरी मदद करते हैं। आमीन! पता नहीं क्या हुआ है कि एनडीटीवी के श्रीनिवासन जैन इन दिनों कुछ ज्यादा ही ‘ट्रुथ बरक्स हाइप’ करने लगे हैं। एक रोज वे भीमा कोरेगांव और दलित-माओवादी कहानी का ‘सच’ बताते रहे। इतना भी नहीं समझते कि पुलिस पहले पकड़ती है। तीन महीने बाद चार्जशीट होती है। अगर कुछ बंदों को तीन महीने के लिए बंद या नजरबंद कर लिया तो क्या गुनाह हो गया?

देश को बचाने के लिए क्या-क्या नहीं करना पड़ता? सबसे बढ़िया लगते हैं हमें अपने देशप्रेमी भैया जी! वे न हों तो देश प्राइम टाइम यानी नौ बजे ही सोने चला जाए! आप उनके दर्शन के लिए जगे रहते हैं, तभी तो उनकी दो टूक लाइनें देश को बचाती रहती हैं, जैसे कि एक रात लाइन दे दिए : ‘डेस्ट्राय माओइस्ट’ और हो गए माओवादी खत्म! ये जो चंद लुटियन, लिलिपुटियन टाइप माओवादी हमारे जैसे चुटियन वालों को आए रोज परेशान करते रहते हैं वे अब परेशान नहीं कर सकते, क्योंकि भैया जी ने कह दिया है : ‘डेस्ट्राय माओइस्ट’!

बाकी एंकर उतने वीर नहीं दिखते। वे ‘डेस्ट्राय माओइस्ट’ लिखने की जगह ‘असहमति’ (डिस्सेंट) या ‘देशद्रोह’ जैसी नरम लाइन लिखते हैं। लेकिन यह भी क्या प्रस्तुति हुई? असहमति ही तो देशद्रोह है! कमलनाथ गांव गांव गौशाला खोलेंगे! हाय हाय हाय हाय! सुरजेवाला बोले : कांग्रेस का डीएनए ब्राह्मण! हाय हाय हाय हाय! सवर्ण मांगते हैं आरक्षण! कांग्रेस उकसा रही है! हाय हाय हाय हाय! उन्नीस में सवर्ण वोटों का क्या होगा? हाय हाय हाय हाय!एंकरों को खुश किया तो एलजीबीटीक्यू पर अदालत के अनुकूल फैसले ने वरना राहुल नाम केवलम ही जपा जाता रहता! आह! एलजीबीटीक्यू के निरपराधीकरण का फैसला ज्यों ही आया, त्यों ही चैनलों ने सवर्ण आंदोलन के लाइव कवरेज से मुंह मोड़ कर एलजीबीटीक्यू की आजादी का ऐसा गुणगान शुरू किया कि लगा देश में सिर्फ एक समस्या बची थी वह थी एलजीबीटीक्यू समुदायों की ‘सेक्सुअलिटी’ की आजादी की समस्या!

 

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