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दूसरी नजरः ये हैं दस कारण, अब कराइए जांच

रक्षामंत्री बहुत सीधी महिला हैं। पिछले साल तीन सितंबर को रक्षामंत्री का पद संभालने से पहले रफाल सौदे को लेकर जो कुछ हुआ था, उसके बारे में उन्हें बहुत-सी बातें पता नहीं हैं।

Author October 7, 2018 3:51 AM
हाल में, रक्षामंत्री ने कहा, ‘मैं जांच का आदेश क्यों दूं?’ मेरा मानना है कि उन्हें संदेह का लाभ देते हुए छोड़ दिया जाए, हम लोग सीधे और निर्दोष लोगों के पीछे न पड़ें। बेहतर यही होगा कि वे कारण बताए जाएं, जिनकी वजह से जांच होनी चाहिए।

रक्षामंत्री बहुत सीधी महिला हैं। पिछले साल तीन सितंबर को रक्षामंत्री का पद संभालने से पहले रफाल सौदे को लेकर जो कुछ हुआ था, उसके बारे में उन्हें बहुत-सी बातें पता नहीं हैं। लगता है, अपने रोजाना के कार्यक्रमों के बारे में भी उन्हें कुछ पता नहीं रहता होगा। रफाल विमान सौदा भारत और फ्रांस की सरकारों के बीच हुआ था। इसकी घोषणा 10 अप्रैल, 2015 को पेरिस में प्रधानमंत्री ने की थी और 23 सितंबर, 2016 को इसके समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस सौदे को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है और जांच की मांग की गई है। हाल में, रक्षामंत्री ने कहा, ‘मैं जांच का आदेश क्यों दूं?’ मेरा मानना है कि उन्हें संदेह का लाभ देते हुए छोड़ दिया जाए, हम लोग सीधे और निर्दोष लोगों के पीछे न पड़ें। बेहतर यही होगा कि वे कारण बताए जाएं, जिनकी वजह से जांच होनी चाहिए। इसके दस कारण हैं-

1- भारत और फ्रांस की सरकारों ने एक समझौता किया था, जिसके तहत भारत को दो इंजन वाले एक सौ छब्बीस रफाल लड़ाकू विमान खरीदने थे। 12 दिसंबर, 2012 को अंतरराष्ट्रीय निविदा के जरिए एक विमान की कीमत 526.10 करोड़ रुपए सामने आई थी। इन विमानों को बनाने वाली कंपनी दासो को अठारह विमान एकदम तैयार हालत में देने थे। बाकी एक सौ आठ विमान भारत में हिंदुस्तान एअरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के बंगलूर स्थित कारखाने में बनने थे और इसके लिए तकनीक दासो से ही लेनी थी। इसके लिए दासो और एचएएल के बीच तकनीकी हस्तांतरण समझौता भी हो चुका था। उस समझौते को रद्द कर दिया गया और प्रधानमंत्री ने 10 अप्रैल, 2015 को नए ‘सौदे’ का एलान कर दिया। क्या रक्षामंत्री हमें यह बताएंगी कि पहले वाले समझौते को रद्द करने का फैसला क्यों किया गया और क्यों नया समझौता किया गया?

2- नए समझौते के तहत भारत छत्तीस विमान खरीदेगा, जिनकी कीमत को छुपा कर रखा गया है। भारतीय वायुसेना का कहना है कि उसे लड़ाकू जेटों के बयालीस बेड़ों (स्क्वाड्रन) की जरूरत है और उसके पास अभी इकतीस बेड़े ही हैं। तब सरकार ने सिर्फ छत्तीस विमान (दो स्क्वाड्रन) खरीदने का निर्णय क्यों किया, जबकि उसे एक सौ छब्बीस विमानों यानी सात बेड़ों और शायद इससे भी ज्यादा की जरूरत है?

3- सरकार ठीक वही विमान, उसी निर्माता से और उसी रूप में खरीद रही है। क्या यह सही है कि नए समझौते के तहत एक विमान की कीमत 1670 करोड़ रुपए है (जैसा कि दासो ने खुलासा किया है) और अगर यह सही है, तो फिर तीन गुना दाम बढ़ाने का तर्कसंगत कारण क्या है?

4- अगर नए समझौते के तहत विमान की कीमत वाकई नौ फीसद ‘सस्ती’ है, जैसा कि सरकार ने दावा किया है, तो फिर सरकार सिर्फ छत्तीस विमान क्यों खरीद रही है, सभी एक सौ छब्बीस क्यों नहीं?

5- नया समझौता ‘इमरजंसी खरीद’ के लिए किया गया। अगर पहला विमान सितंबर 2019 में (समझौते के चार साल बाद) और आखिरी 2022 में मिलेगा तो फिर यह ‘इमरजंसी खरीद’ कैसे हो गई?

6- एचएएल को सतहत्तर साल का अनुभव है और उसने कई तरह के विमान बनाए हैं। जब रफाल का नया समझौता हो रहा था तो उसमें इस बात का कोई जिक्र नहीं हुआ कि दासो एचएएल को तकनीकी हस्तांतरण करेगी। क्या वजह रही कि एचएएल को तकनीकी हस्तातंरण का समझौता रद्द कर दिया गया?

7- हर रक्षा खरीद में भारत विक्रेता कंपनी पर ऑफसेट शर्तें निर्धारित करता है। दासो ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि छत्तीस विमानों की बिक्री के बदले इसके पास तीस हजार करोड़ की ऑफसेट अनिवार्यता थी। एचएएल सरकारी कंपनी है। इसने दासो के साथ 3 मार्च 2014 को ‘साझा काम’ का समझौता किया था और ऑफसेट भागीदार के लिए पात्रता हासिल कर ली थी। फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ओलांद ने यह रहस्योद्घाटन किया है कि भारत सरकार ने ऑफसेट भागीदार के लिए निजी क्षेत्र की एक कंपनी का नाम सुझाया था और फ्रांस तथा दासो के पास इस मामले में कोई विकल्प नहीं था। भारत सरकार ने इस बात से इनकार किया है कि उसने ऐसा कोई नाम सुझाया था। क्या सरकार ने कोई नाम सुझाया था, और अगर नहीं तो फिर एचएएल का नाम क्यों नहीं सुझाया गया?

8- फ्रांस के रक्षामंत्री फ्लोरेंस पार्ली ने 27 अक्तूबर, 2017 को नई दिल्ली में रक्षामंत्री से मुलाकात की थी। उसी दिन पार्ली नागपुर पहुंचे और मीहान में निजी क्षेत्र की एक कंपनी की नींव रखी। इस समारोह में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और भारत में फ्रांस के राजदूत भी मौजूद थे। इसी कंपनी में ऑफसेट सप्लाई वाला सामान बनना था। क्या रक्षामंत्री को पार्ली के इस समारोह में जाने के बारे के कुछ भी मालूम नहीं था, जबकि उसी दिन वे उनसे मिली थीं, और अगर नहीं था तो क्या अगले दिन अखबारों में छपी खबरों से भी इस बारे में पता नहीं चला?

9- अक्तूबर, 2016 में दासो और निजी क्षेत्र के ऑफसेट भागीदार ने एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिए इस बात का खुलासा किया कि उनका ‘साझा उद्यम ऑफसेट शर्तें पूरी करने में मुख्य भूमिका निभाएगा।’ क्या रक्षामंत्री उस वक्त सच बोल रही थीं जब उन्होंने यह कहा था कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि दासो ने निजी क्षेत्र की एक कंपनी को ऑफसेट भागीदार के रूप में चुना है?

10- एचएएल को लाइसेंस के तहत मिग, मिराज और सुखोई जैसे विमान बनाने और खुद अपना स्वदेशी विमान तेजस बनाने का अनुभव है। यह चौंसठ हजार करोड़ रुपए की कंपनी है। 2017-18 में इसने 18,283 करोड़ रुपए का कारोबार किया था और 3322 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया था। हाल में रक्षामंत्री ने एचएएल के पूर्व अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक टीएस राजू के बयान का खंडन किया है और कंपनी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की हैं। क्या यह एचएएल का निजीकरण करने या इसे बंद करने का इरादा है?

मैंने दस कारण दे दिए हैं (ऐसे अभी और हैं) जिनकी वजह से सरकार को इस मामले में जांच कराने का आदेश देना चाहिए।

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