रविवारीय स्तम्भ

समांतर संसार : मौसम, मनुष्य और बेईमानी

सय्यद मुबीन ज़ेहरा पिछले कुछ समय से जिस तरह मौसम की मार मनुष्य पर पड़ने लगी है, उसे देख कर लगता है कि हमने...

मतांतर : संघर्ष का पैमाना

नीलम कुमारी अमरनाथ ने ‘दलित विमर्श की सीमाएं’ (12 जुलाई) में लिखा है कि ‘दलित साहित्य भटकाव का शिकार तो है ही, वह अमीरी-गरीबी...

सिनेमा : क्षेत्रीयता का सिकुड़ता दायरा

कुलदीप मिश्रा जब चैतन्या तम्हाणे निर्देशित मराठी फिल्म ‘कोर्ट’ (2015) को राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुना गया, तो फिल्म समीक्षक हैरान नहीं हुए, क्योंकि...

कभी-कभार : विस्मृति का वितान

अशोक वाजपेयी यों तो साहित्य के क्षेत्र में स्मृति एक केंद्रीय तत्त्व है: भाषा स्वयं स्मृति का एक संग्रहालय होती है। साहित्य भाषा में...

भाषा : भाषाई आग्रह और दुराग्रह

प्रभु जोशी वक्त ज्यादा नहीं गुजरा और यह होने लगा कि आखिरकार धीरे-धीरे हिंदी की वह परत झड़ने लगी, जो हमारे प्रधानमंत्री की भाषा...

पुस्तकायन : पेचीदा रास्ते

निवेदिता एम हनीफ मदार का संग्रह बंद कमरे की रोशनी पढ़ते हुए मुझे अफ्रीकी साहित्य के विद्वान जिरामूल्ड की बात याद आई। वे कहते...

पुस्तकायन : रिक्शे पर किताबें

कुमार प्रशांत धर्मवीर भारती के एक निबंध संग्रह का नाम है ‘ठेले पर हिमालय’। राजेंद्र रवि ने रिक्शे पर लाद कर जब सात किताबें-...

दक्षिणावर्त : जिन्हें दूसरों के दुख ने मथा

तरुण विजय इस बार कैलास मानसरोवर हम नाथू-ला से गए। वहां अम्मा, बाबूजी की याद आई। और याद आई रज्जू भैया और यतिजी की।...

अप्रासंगिक : पेशेवर की नैतिकता

अपूर्वानंद प्रफुल्ल बिदवई की मौत के सदमे के बीच मैं उनके काम के बारे में सोचने की कोशिश कर रहा हूं। कुछ महीने पहले...

निनाद : आपातकाल का मानस

कुलदीप कुमार आपातकाल की चालीसवीं वर्षगांठ आई और चली गई। इस अवसर पर वे सभी रस्मी बातें की गर्इं, जो ऐसे अवसरों पर हमेशा...

मतांतर : बेवजह बौखलाहट

महेश जायसवाल हिंदी का संबंध सदा भारतीय जीवन की मिश्रणशीलता से रहा है। इसलिए साहित्य में शुद्धतावाद न पहले कभी था और न आज...

शिक्षा : मरते विश्वविद्यालय

अवधेश कुमार सिंह भारत में विश्वविद्यालयों की हालत किसी पैमाने से ठीक नहीं लगती। विश्वविद्यालय ज्ञान-सृजन के लिए होते हैं, पर यह संभव तभी...

कभी-कभार : सत्य और कविता

अशोक वाजपेयी इन दिनों हम सत्य की चर्चा कविता के संदर्भ में कम ही करते हैं: इस पर बहुत बहसें होती रही हैं कि...

भाषा : हिंदी सम्मेलन से अपेक्षाएं

अमरनाथ दसवें विश्व हिंदी सम्मेलन के आयोजन की घोषणा हो चुकी है। यह 10-12 सितंबर को भोपाल में होगा। इस बार के विमर्श का...

मतांतर : साहित्य में शुद्धतावाद

चारु सिंह खड़ी बोली हिंदी के इतिहास पर गौर करें, तो यह शुरू ही होता है हिंदी पर खतरे की चीख-पुकार के साथ। नागरी...

मतांतर : बिजूके का स्वयंवरण

रविकांत लब्ध-प्रतिष्ठ, बहु-पदासीन, बहु-पुरस्कृत और परमादरणीय बुजुर्ग शंभुनाथजी ने आलोचना की नई, ‘बेलीक’, और लाहौल-विला-कूवत ‘समाज वैज्ञानिक’ पारी पर हैरतअंगेज रद्दे-अमल (‘समाज विज्ञान का...

समांतर संसार : अकेले बुजुर्ग

सय्यद मुबीन ज़ेहरा एक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में बुजुर्गों का कोई महत्त्व नहीं है। सवाल है कि यहां महत्त्व किसका है! सब अपनी...

दक्षिणावर्त : दलित की बेटी

तरुण विजय हे भगवान, सारे भारत पर दलित की छाया पड़ जाए तो सबको मोक्ष मिले। अभी खबर छपी है कि एक बच्ची पानी...