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रविवारीय स्तम्भ

पुस्तकायन: विसंगतियों के बिंब

उषा बंदे जनसत्ता 19 अक्तूबर, 2014: राजेंद्र उपाध्याय के संग्रह पत्तियों की अज्ञात स्वरलिपि में की कविताएं मानवीय प्रतिबद्धता, प्रकृति और संस्कृति के प्रति...

सिनेमा: नैतिक रूप से दुविधाग्रस्त

अपूर्वानंद जनसत्ता 12 अक्तूबर, 2014: ‘एकतरफा, स्त्री विरोधी और अतिसरलीकृत सपाट दिमागी… रूपात्मक और सौंदर्यात्मक दृष्टि से भी ‘हैदर’ एक लचर और बोरिंग मसाला...

सिनेमा: घाटी की हकीकत

पुण्य प्रसून वाजपेयी जनसत्ता 12 अक्तूबर, 2014: दिन में पहरा। रात में ताले। हाथों में पहचान-पत्र। मौत का खौफ। झेलम का प्रेम। डल झील...

दक्षिणावर्त: छोटी छोटी खुशियां

तरुण विजय जनसत्ता 12 अक्तूबर, 2014: जिंदगी सिर्फ उन बड़े कामों के लिए बीत जाती है, जिन्हें हम जीने के लिए जरूरी मानते हैं।...

नोबेल पुरस्कार: नोबेल प्रतिभाओं के घोर अभाव में

राजकिशोर जनसत्ता 12 अक्तूबर, 2014: नोबेल शांति पुरस्कार कई बार अपने को लज्जित कर चुका है। बहुत संक्षेप में कहा जाए तो उसने महात्मा...

दस्तावेज: संघ पर जेपी की राय

जनसत्ता 12 अक्तूबर, 2014: प्रश्न: आपके आंदोलन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भारतीय मजदूर संघ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और जनसंघ के साथ...

कभी-कभार: आवाज और खामोशी

अशोक वाजपेयी जनसत्ता 12 अक्तूबर, 2014: हममें से अधिकतर लोग यह नहीं समझ पाते कि कब आवाज उठानी चाहिए और कब खामोश रहना चाहिए।...

पुस्तकायन: मनुष्य होने का अधिकार

कुमार प्रशांत जनसत्ता 12 अक्तूबर, 2014: सत्य नारायण साबत की किताब भारत में मानवाधिकार सब कुछ लिखती है, लेकिन दो सौ पृष्ठों की किताब...

पुस्तकायन: आत्मीयता की जमीन

राजेश राव जनसत्ता 12 अक्तूबर, 2014: विवेक मिश्र के कहानी संग्रह पार उतरना धीरे से में आत्मिक धरातल को समझने का भाव प्रबल है।...

निनाद: अतीत और वर्तमान

कुलदीप कुमार जनसत्ता 5 अक्तूबर, 2014: पिछले कुछ समय से बलात्कार की घटनाओं में भारी बढ़ोतरी हुई है और इसके अपराधियों के लिए अनेक...

अप्रासंगिक: आत्मालोचन से परहेज क्यों

अपूर्वानंद जनसत्ता 5 अक्तूबर, 2014: अर्धेंदु भूषण बर्धन नब्बे वर्ष के हो गए। अब भी उनकी मानसिक त्वरा किसी युवा को लज्जित कर सकती...

प्रसंग: बराबरी की आदत

विकास नारायण राय जनसत्ता 5 अक्तूबर, 2014: अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने एक अंगरेजी अखबार में अपनी विरूपित छवि की नुमाइश का विरोध किया, तो...

प्रसंग: अहिंसा और वैचारिक विसंगतियां

प्रफुल्ल कोलख्यान जनसत्ता 5 अक्तूबर, 2014: यह भारत के लिए गौरव की बात है कि महात्मा गांधी के जन्मदिन- दो अक्तूबर- को संयुक्त राष्ट्र...

कभी-कभार: तिमिर, झरता समय और मुक्तिबोध

अशोक वाजपेयी जनसत्ता 5 अक्तूबर, 2014: मुक्तिबोध पर इधर व्यापक रूप से विचार-पुनर्विचार होना शुरू हुआ है और दिल्ली, रायपुर के अलावा इलाहाबाद, बनारस,...

अवसर: कागजी है पैरहन

वागीश शुक्ल जनसत्ता 5 अक्तूबर, 2014: जाक देरीदा के देहत्याग को अब दस बरस हो रहे हैं- वे शनिवार 9 अक्तूबर, 2004 को तड़के...

पुस्तकायन: उम्मीद का स्वर

सुखप्रीत कौर जनसत्ता 5 अक्तूबर, 2014: लाल सिंह दिल पंजाबी के चर्चित कवियों में हैं। उनकी चर्चा हिंदी में बहुत कम हुई है। हिंदी...

पुस्तकायन: आलोचना के वैज्ञानिक औजार

रमेश दवे जनसत्ता 5 अक्तूबर, 2014: प्रसिद्ध आस्ट्रियन दार्शनिक विटगेन्स्टाइन ने ‘द इनर’ नाम से अभ्यंतर का विचार रचा, जो बताता है कि मनुष्य...

दक्षिणावर्त: वह छुटकी-सी माताराम

तरुण विजय जनसत्ता 28 सितंबर, 2014: वह नाराजगी और गुस्सा। वह चिड़चिड़ापन और ‘मैं न मानूं’ का अतिरेकी बालहठ। जब मन में आए सोना,...