ताज़ा खबर
 

रविवारीय स्तम्भ

निनाद : विद्वेष के बूते सियासत

कुलदीप कुमार ‘‘महात्माजी, जो कुछ उम्मीद है, बाला साहब देवरस से है। वे जो करेंगे वही आपके लिए होगा। वैसे काम चालू हो गया...

प्रसंग : मछली बाजार में संविधान

अशोक लाल खुद रामलला के वकील, हमारे कानून मंत्री, रविशंकर प्रसादजी ने मन को एक नूतन दिव्य प्रकाश से धन्य किया है। उन्होंने कहा...

मतांतर : भाषाई उपेक्षा और असमानता

गणपत तेली वीरेंद्र जैन ने ‘गुलामी का नाहक भय’ (1 फरवरी) लेख में बताया है कि अभी भाषिक गुलामी की स्थिति हमारे यहां आई...

कभी-कभार : शास्त्रीयता की नई पहचान

अशोक वाजपेयी यह लगभग अभूतपूर्व है, कम से कम हमारे आधुनिक समय में: प्रसिद्ध उद्योगपति नारायणमूर्ति के बेटे ने अपनी संपदा में से एक...

मीडिया : चुनावी चटुल पटकथा

क्षमा शर्मा चुनाव के दिनों में जितने व्यस्त राजनीतिक पार्टियों के नेता-कार्यकर्ता होते हैं, उससे कम अखबार या टीवी वाले नहीं होते। हर वक्त...

पुस्तकायन : निरपेक्ष नजर की परख

छबिल कुमार मेहरे रमेश दवे स्थितप्रज्ञ आलोचक हैं। वादों-विवादों, खेमेबाजी, नारेबाजी और विचारधारागत पूर्वग्रहों, पुरस्कार-सम्मानों की आकांक्षा से हमेशा दूर रहते आ रहे दवेजी...

पुस्तकायन : दो दुनियाओं के बीच सेतु

प्रताप दीक्षित कथाकार शैलेंद्र सागर के संग्रह ब्रंच तथा अन्य कहानियां में वर्तमान के कोलाहल के बीच उगे-फैलते मरुथल में संवेदना की तलाश और...

दक्षिणावर्त : शहीद की बेटी

तरुण विजय अलका छठी कक्षा में पढ़ती है। अपने पिता की शहादत पर रुलाई को बहुत कड़ाई से थामते हुए वह चिल्ला कर बोली...

समांतर संसार : गुम होती लड़कियां

सय्यद मुबीन ज़ेहरा गणतंत्र दिवस के मौके पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने राजपथ पर भारत की स्त्रीशक्ति को देखा, प्रभावित हुए और सीरीफोर्ट सभागार के...

प्रसंग : वर्चस्व की व्यथा

संजीव चंदन पिछले दिनों आंबेडकर की विरासत पर कब्जे के लिए भारतीय जनता पार्टी कुछ उतावली दिखी। लोकसभा चुनावों के दौरान नरेंद्र मोदी ने...

मतांतर : बंद कपाट

जसविंदर सिंह जो समाज अपने सोच की खिड़कियां बंद कर लेता है, वह न तो स्वस्थ समाज हो सकता है और न ही समय...

निनाद : आस्था और असहमति

कुलदीप कुमार पेरिस में व्यंग्य पत्रिका ‘शार्ली एब्दो’ पर हुए आतंकी हमले के बाद हिंदुत्व की प्रयोगशाला चलाने वालों को भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता...

अप्रासंगिक : गांधी का आखिरी विद्रोह

अपूर्वानंद जनवरी में सवाल किया जाना चाहिए कि आखिर हम किस गांधी को याद करना चाहते हैं। या कि उन्हें हम किस तरह याद...

कला : अनादृत का अभिषेक

प्रभु जोशी यह अत्यंत विचारणीय तथ्य है कि भारत के अलावा दुनिया के किसी भी देश में ऐसा दुर्भाग्यपूर्ण उदाहरण नहीं मिलता, जहां अपनी...

शिक्षा : कौशल विकास के निहितार्थ

राजकुमार केंद्र सरकार हो या राज्य सरकारें, अब उनकी निगाह में शिक्षा का उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक विकास करना है। बारहवीं पंचवर्षीय योजना की...

विवाद : उपयोग या उपभोग

कुमार अंबुज किसी भी समस्या के निदान के लिए समन्वयवादी तरीका एक आसान रास्ता है, पर वह कितना सही है, विचार होना चाहिए। प्राय:...

विवाद : खूब परदा है

विनीत कुमार वीरेंद्र यादव के लेख ‘पार्टनर, तुम्हारी पालिटिक्स क्या है’ (21 दिसंबर) पर बात करने से पहले उन्हें औपचारिक बधाई देना जरूरी है।...

समांतर संसार : कचरा बटोरता बचपन

सय्यद मुबीन ज़ेहरा नए वर्ष के आगमन पर सबने थोड़ा-बहुत जश्न मनाया होगा। उसके बाद घर का कूड़ेदान कुछ अधिक भरा नजर आया होगा।...