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रविवारीय स्तम्भ

मतांतर : हिंदी का हीनताबोध

के विक्रम राव विष्णु नागर ने (24 नवंबर) अंगरेजी भाषाई अखबारों की उचित ही भर्त्सना की है। उनकी समाचार-निरपेक्षता, चलताऊ सोच और सरोकारहीन मानसिकता...

संस्कृति : परिधान और पहरा

सवाईसिंह शेखावत इधर स्त्रियों के साथ कुछ भी गलत घटने पर उनके कपड़े-लत्तों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराने और दूसरी ओर ऐसा मानने वालों...

अप्रासंगिक : संकीर्ण भारतीयता

अपूर्वानंद तिरंगी टोपी पहने याकूब नमाज पढ़ रहा है। सफेद और काली टोपी पहने एक दूसरा ‘बदमाश’ मुसलमान उसे पैसे के बदले बम-विस्फोट करने...

निनाद : अंदर की असमानता

कुलदीप कुमार जाति-व्यवस्था आज भी कितनी मजबूत है और आजादी मिलने के सड़सठ साल बाद भी देश में छुआछूत का अभिशाप किस हद तक...

कभी-कभार : पटना में भारतीय कविता

अशोक वाजपेयी दशकों पहले हमने भारत भवन में कविभारती नाम से एक वार्षिक आयोजन शुरू किया था, जिसमें अनेक भाषाओं के कवि शिरकत करते...

प्रसंग : मजहबी दीवारें

शंभुनाथ फ्रांसीसी यात्री बर्नियर 1656 में भारत आया था। उसने पुरी की उस जमाने की रथयात्रा का वर्णन करते हुए लिखा है, ‘जिस समय...

पुस्तकायन : राजकमल का संसार

ओमप्रकाश झा देवशंकर नवीन की नई पुस्तक राजकमल चौधरी- जीवन और सृजन राजकमल चौधरी का समग्र पता देती है। राजकमल चौधरी हाल के वर्षों...

पुस्तकायन : मिथक में वर्तमान के रंग

रीतारानी पालीवाल सुप्रसिद्ध कवि, आलोचक, नाटककार नंदकिशोर आचार्य के संपूर्ण नाटकों का संग्रह है रंग-यात्रा। लगभग तीन दशक की इस रंग-यात्रा में उन्होंने इतिहास,...

प्रसंग : भाषा के पहरुए

 हरजेंद्र चौधरी मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने केंद्रीय विद्यालयों में तृतीय भाषा के रूप में जर्मन की जगह संस्कृत पढ़ाने का निर्णय किया तो...

सिनेमा : प्रतिरोध, परदा और प्रतिबंध

देवेंद्र पाल फ्रांसीसी फिल्मकार फ्रांसुआ त्रुफो कहते थे कि सिनेमा अच्छा होता है या बुरा होता है। मगर उन्हें कहां पता था कि भारत...

समांतर संसार : दरकते रिश्ते

सय्यद मुबीन ज़ेहरा यह बहुत चौंकाने और परेशान करने वाली सच्चाई देश की राजधानी दिल्ली से उभर कर सामने आई है। हमारे समाज का...

दक्षिणावर्त : कश्मीर में केसर

तरुण विजय वक्त यों बदलता है। जहां एक बार जाने की कीमत डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी को अपनी जान से चुकानी पड़ी थी, वहां...

कभी-कभार : दरगाह में रज़ा

अशोक वाजपेयी कई महीनों से हमारे मित्र चित्रकार सैयद हैदर रज़ा का, अजमेर में ख्वाजा मोइउद्दीन चिश्ती की विश्वप्रसिद्ध दरगाह में जाना, उनकी तबीयत...

मीडिया : अंगरेजी पत्रकारिता के दुराग्रह

विष्णु नागर हिंदी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को हाल ही में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया। इसमें शायद ही...

पुस्तकायन : स्त्री मुक्ति का बिगुल

कर्मेंदु शिशिर भारतीय नवजागरण के ऐसे कई इलाके हैं, जिन पर हिंदी में काम नहीं हुए। ऐसे कई पक्ष और व्यक्तित्व हैं, जिन पर...

पुस्तकायन : समकाल में लोक लय

अर्पण कुमार श्रीप्रकाश शुक्ल तमाम समकालीन समस्याओं से दो चार होते हुए उन्हें कविता की संवेदनात्मक सघनता में बुनते हैं। उनका नया संग्रह है-...

निनाद: साहसिक प्रयोग के गायक

कुलदीप कुमार कुमार गंधर्व अपने जीवनकाल में ही किंवदंतीपुरुष बन गए थे। सभी मानते थे कि हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के समकालीन परिदृश्य में- और,...

अप्रासंगिक: जीवन की कलात्मकता

अपूर्वानंद ‘‘उन्नीस सौ सोलह…। मैंने पहली बार बापू को देखा था। तब से एक पूरा जमाना गुजर गया है। (तब से आज तक की)...