ताज़ा खबर
 

रविवारीय स्तम्भ

समांतर संसार : भूखे बनाम अघाए

सय्यद मुबीन ज़ेहरा हम जिस मैगी के दीवाने थे, उसके बारे में अब पता चला है कि वह इस लायक थी ही नहीं कि...

दक्षिणावर्त : अखरोट का पेड़

तरुण विजय श्रीनगर के शेखपुरा इलाके में बने फ्लैट एक भुतहा अतीत का डर ओढ़े हुए, सहमे-सहमे से खड़े हैं। हमने सोचा था श्रीनगर...

अप्रासंगिक : विवादास्पद का पक्ष

अपूर्वानंद आइआइटी-मद्रास में आंबेडकर-पेरियार स्टडी सर्किल (एपीसीएस) की मान्यता रद्द करने के प्रशासन के निर्णय पर बहस हो रही है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय...

निनाद : फासिज्म की आहट

कुलदीप कुमार फासिज्म एक सर्वसत्तावादी राजनीतिक विचार है। फासिस्ट व्यवस्था में सब कुछ एक व्यक्ति, एक विचारधारा और एक पार्टी द्वारा नियमित और संचालित...

प्रसंग : ढोल और मुसीबतें

क्षमा शर्मा महानगरों, कस्बों, गांवों में चैनलों और कुछ अखबारों के जरिए शोर मचा है कि अच्छे दिन आ गए। सरकार ने एक साल...

प्रसंग : क्या बदला बयालीस सालों में

वीणा भाटिया कुछ दिनों पहले बासठ साल की अरुणा रामचंद्र शानबाग की बयालीस वर्षों तक लगातार कोमा में रहने के बाद मृत्यु हो गई।...

पुस्तकायन : विडंबना की परतें

पल्लव स्वयं प्रकाश ऐसे कथाकार हैं, जो कहानी में कथ्य की संप्रेषणीयता के लिए लगातार प्रयोगशील रहे। प्रगतिशील-जनवादी कथाकारों में इस लिहाज से वे...

पुस्तकायन : रवींद्र प्रणति की सुखद परिणति

रणजीत साहा रवींद्रनाथ ठाकुर की डेढ़ सौवीं जयंती के अवसर पर इंद्रनाथ चौधुरी के प्रधान संपादकत्व में रवींद्रनाथ टैगोर रचनावली नाम से उनकी रचनाओं...

साहित्य : समीक्षा की साख

गोपेश्वर सिंह हिंदी में जिस विधा की सर्वाधिक दुर्गति हुई है, वह है पुस्तक समीक्षा। फिलहाल पुस्तक समीक्षा लिखने-लिखाने का आलम प्राय: जुगाड़ उद्योग-सा...

कभी-कभार : हुआ यह है…

अशोक वाजपेयी हुआ यह है कि अपनी जिंदगी के इस मुकाम पर आकर अपने कुछ विश्वासों पर संदेह होने लगा है। यह तो सही...

समांतर संसार : करुणा के बयालीस वर्ष

सय्यद मुबीन ज़ेहरा अरुणा शानबाग का नाम अब इतिहास के संदर्भों में एक ऐसे शक्तिशाली जीवन के रूप में आएगा, जिसे हमारे समाज ने...

दक्षिणावर्त : धूप और दूर्वा

तरुण विजय दूब पर चलने का मखमली अहसास जिन्हें हुआ है उन्होंने कभी सोचा न होगा कि दूब क्या कहती है। उसे कभी नंगे...

प्रसंग : निजता का वैध-अवैध

सविता झा खान वैवाहिक बलात्कार विधेयक को लेकर तमाम चर्चा-परिचर्चाओं में निजता और राज्य के अधिकार क्षेत्र का द्वंद्व एक बार फिर सतह पर...

प्रसंग : अंधाधुंध के राज में

मृणाल पाण्डे पहले मुंबई फिल्म जगत के मशहूर गायक ने कहा कि बढ़ती आबादी वाले महानगरों में रात को फुटपाथ पर कुत्तों की तरह...

कभी-कभार : याद करना

अशोक वाजपेयी याद करना वैसे तो मनुष्य का लगभग नित्य कर्म है: हम हर दिन कुछ न कुछ, किसी न किसी को याद करते...

साहित्य : कविता की परख

सत्यपाल सहगल आग्नेय के संपादन में भोपाल से प्रकाशित विश्व कविता की पत्रिका ‘सदानीरा’ के ताजा अंक में हिमाचल प्रदेश के हिंदी कवि गणेश...

पुस्तकायन : टूटते सपने

पूनम सिन्हा रामधारी सिंह दिवाकर के उपन्यास दाखिल खारिज का कथानायक प्रमोद सिंह प्रोफेसर पद से सेवा निवृत्ति के बाद शहर की गृहस्थी समेट...

पुस्तकायन : आदिवासी स्त्री के बिंब

रमेश बर्णवाल निर्मला पुतुल अपने नए काव्य-संग्रह ‘बेघर सपने’ में संवेदना के पर्वतीय दुर्गम इलाकों से समतल मैदान की तरफ उतरती नजर आती हैं।...