ताज़ा खबर
 

रविवारीय स्तम्भ

किताबें मिलीं: अतीत का दरवाजा, मेरी दृष्टि तो मेरी है, खजाना और सच, समय और साक्ष्य

अपने यात्रा वृत्तांतों से हिंदी में एक नई शुरुआत करने वाले असगर वजाहत अपने आपको सामाजिक पर्यटक या सोशल टूरिस्ट कहते हैं

बाखबरः भीड़-हिंसा का समाजशास्त्र

दिल्ली में तीन बच्चियों की भूख से मौत हुई। विपक्षी नेताओं ने ‘गरीबी टूरिज्म’ किया। एंकर विचलित हुए। दिल्ली की बरसात में दिल्ली की...

वक्त की नब्जः पाकिस्तान में नया निजाम

भारत के लिए सवाल यह है कि पाकिस्तान के भावी प्रधानमंत्री का इस्लामी झुकाव उनकी विदेश नीति को कितना प्रभावित करेगा। चुनाव अभियान शुरू...

दूसरी नजरः बहस और सवाल, मगर कोई जवाब नहीं

शुक्रवार, 20 जुलाई को सरकार अनिच्छा से अविश्वास के प्रस्ताव पर बहस कराने को राजी हुई। नरेंद्र मोदी सरकार के चार साल दो महीने...

किताबें मिलींः नए समय का कोरस

आज के नौनिहाल हर क्षेत्र में महारत हासिल कर रहे हैं, पर उनकी ओर सीना फुला कर देखने वाले नहीं देख पाते कि उनकी...

बाखबरः झप्पी और झिकझिक

आजकल जरा-जरा-सी बात पर कुछ एंकर बहसों में ‘हिंदू बरक्स मुसलमान’ कराने लगते हैं। कहीं यह हमारी आखों का ही फरेब तो नहीं कि...

मुद्दाः विकास में बाधक आबादी

अतिशय जनसंख्या किसी भी राष्ट्र की सेहत के लिए ठीक नहीं है। ऐसे में आवश्यक है कि भारत जनसंख्या की तीव्र वृद्धि को रोकने...

वक्त की नब्जः बुनियादी सरोकार से दूर

कुछ समय के लिए भारतवासियों को लगा था कि मोदी अन्य राजनेताओं से अलग हैं। कुछ क्षणों के लिए लगा था कि वास्तव में...

दूसरी नजरः फ्रांस ने सम्मान जीता, क्रोएशिया ने दिल

फीफा वर्ल्ड कप फाइनल में फ्रांस ने क्रोएशिया को चार-दो से हरा दिया और दोनों देश विजेताओं के रूप में उभरे। पूरा फ्रांस एक...

प्रसंगवश: अफवाह का तंत्र

सोशल मीडिया पर उपस्थित लोग न तो संपूर्ण समाज हैं और न ही इनकी प्राथमिकताएं संपूर्ण समाज का प्रतिनिधित्व करती हैं, लेकिन सार्वजनिक उपस्थिति...

वक्त की नजर: शिक्षा की कमजोर बुनियाद

हमारी शिक्षा संस्थाएं आज भी उसी रास्ते पर चल रही हैं, जो रास्ता अंग्रेजों ने बनाया था। इस रास्ते को तैयार किया गया था...

दूसरी नजर: उपराज्यपाल को भाजपा की सहायता और सलाह!

अधिकारों की खींचतान में हार जाने के बाद, अविवेकी केंद्र सरकार घुमाव-फिराव के ढंग से जीतने की कोशिश कर रही है। उसका कहना है...

बाखबरः लिंचिस्तान से मोक्षिस्तान तक

इसी सप्ताह एक चैनल ने इस देश को ‘लिंचिंस्तान’ का नाम दिया। एंकर आंकड़े दिखा कर बताती रही कि मई के बाद उन्नीस लोग...

वक्त की नब्जः सपने अधूरे, हुए नहीं पूरे…

परिवर्तन सिर्फ इतना हुआ है कि लटयंस दिल्ली की आलीशान कोठियों में अब रहने लगे हैं शान से मोदी सरकार के मंत्री उसी तामझाम...

मुद्दा: जेल सुधार की दरकार

किसी व्यक्ति को उसके अपराध की सजा देना और असंवेदनशील होकर जेल में उसके मानवाधिकारों की रक्षा न कर पाना, दो अलग बातें हैं।...

दूसरी नजरः भीड़ के निशाने

दोतरह की भीड़ है- एक, जमीन पर, और दूसरी, आभासी दुनिया में। दोनों के लक्षण समान हैं। भीड़ में शामिल लोग गुमनामी की आड़...

बाखबरः शादी मुबारकां मेढक-मेढकी!

एक निंदक भाजपा प्रवक्ता जी से कहने लगा कि सर जी आप नव-दंपति मेढक जी और मेढकी जी के नाम तो बता दीजिए! सास...

वक्त की नब्जः उन्हें भी अहसास है…

परिवर्तन और विकास के रास्ते पर रहते मोदी तो अगला आम चुनाव हारने का सवाल ही नहीं उठता। बातें अब उनके हारने की हो...