ताज़ा खबर
 

रविवारीय स्तम्भ

वक्त की नब्जः खतरे दूसरे हैं

मोदी अगर 2019 में दुबारा प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं तो कम से कम उनको इतना तो करना होगा कि देश के असली दुश्मनों की...

दूसरी नजरः आंकड़े और नौकरियों की हकीकत

कंसाइज ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में ‘इंटरव्यू’ शब्द का मतलब बताया गया है- एक पत्रकार और सार्वजनिक हित से जुड़े व्यक्ति के बीच आमने-सामने की बातचीत।...

दोहरी मानसिकता का समाज

क्यों आज इक्कीसवीं सदी में भी संविधान के मूल्यों- समानता, स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय को हम अपनी जिंदगी का हिस्सा नहीं बना पाए? क्यों अनेक...

चर्चाः स्त्री सुरक्षा का सवाल: कहीं तो थमना होगा हमें

बलात्कार का मामला अब सिर्फ औरत, मर्द या क्षणिक वासना-उन्माद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि शहजोरी पर आ गया है, जिसका सबसे...

किताबें मिलीं: ‘नान्या’, ‘दस कालजयी उपन्यास’, ‘पढ़ि-पढ़ि के पत्थर भया’ और ‘सृजन-रंग’

‘नान्या’ की यह कथा अपने भीतर के एकांत में घटने वाले आत्मसंवाद का रूप ग्रहण करती हुई इतनी पारदर्शी हो जाती है कि पाठक...

बाखबरः दो चैनल के बीच में

अटली जी को लेकर दिल्ली में हुई सर्वदलीय शोकसभा में फारूख अब्दुल्ला ने अपने वक्तव्य के बाद अचानक ‘भारत माता की जय’ बोल कर...

वक्त की नब्जः जुमलेबाजियों का दौर

शुरुआत हुई, जब राहुल गांधी चुनाव हारने के बाद अपनी लंबी विदेशी छुट्टी के बाद वापस वतन लौटे नई ऊर्जा से चमकते हुए। लोकसभा...

दूसरी नजरः जलन से बेहतर बराबरी

कुछ दिन पहले भाजपा के एक भोंपू नेता ने एक अखबार के संपादकीय पेज पर लिखते हुए ‘आर्थिक वृद्धि पर आला दर्जे की चर्चा’...

किताबें मिलींः ‘मोदी की विदेश नीति’, ‘रेखना मेरी जान’ और ‘युद्ध में अयोध्या’

वेदप्रताप वैदिक विदेश मामलों के गहन अध्येता हैं। प्रखर पत्रकार होने के नाते वे भारत और अन्य देशों की विदेश नीतियों पर लगातार लिखते...

बाखबरः आगे आगे देखिए होता है क्या

दिल्ली देहरादून मार्ग पर तीन-चार रोज तक कांवड़ियों का ही राज रहा। जब यूपी के आला पुलिस अफसर कावड़ियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा करते...

वक्त की नब्जः सुविधा की चुप्पी और मुखरता

जब कहा जाता है आज कि मोदी तानाशाह हैं और उनकी सरकार पत्रकारों पर दबाव डाल रही है, मुझे अजीब लगता है कि यही...

तीरंदाजः उम्मीद नजर नहीं आती

चाहे वह कश्मीर का मुद्दा हो, खालिस्तान का या फिर भारत के खिलाफ अघोषित युद्ध चलाने की उनकी वर्षों पुरानी मुहिम, सब अपनी जगह...

दूसरी नजरः पहले अराजकता, अब आत्मनिर्भरता

अपनी स्थापना के समय से ही आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) आर्थिक राष्ट्रवाद, स्वदेशी और स्वावलंबन का प्रबल पक्षधर रहा है।

किताबें मिलींः ‘अशोक राजपथ’, ‘अनुभूति और अभिव्यक्ति’ और ‘अनंतिम मौन के बीच’

अशोक राजपथ अवधेश प्रीत का यह उपन्यास बिहार के कॉलेज और विश्वविद्यालय के शिक्षण-परिवेश को उजागर करता है कि किस तरह प्राध्यापक अपनी अतिरिक्त...

मुद्दाः मां का दूध और बच्चे की सेहत

स्तनपान के प्रति जागरूकता लाने के लिए हर साल अगस्त के प्रथम सप्ताह को पूरे विश्व में स्तनपान सप्ताह के रूप में मनाया जाता...

किताबें मिलींः ‘देस बिदेस दरवेश’, ‘पंचकोण’, ‘बात से बात’ और ‘कद आवैला खरूंट’

यह तो सच्चाई है कि ज्ञान और अनुभव के लिए देशाटन बहुत आवश्यक है। हमारे पुराने देश और समाज में तीर्थाटन की परंपरा रही,...

गिरती गुणवत्ता के पीछे

अरस्तू जैसे दार्शनिक ने सदियों पहले कह दिया था कि समृद्धि और संपन्नता के समय में शिक्षा अलंकार बन जाती है, जबकि विपरीत और...

चर्चाः उच्च शिक्षा की साख: उच्च शिक्षा के सामने यक्ष प्रश्न

आज उच्च शिक्षा का यह महत्त्वपूर्ण मानवीय उत्तरदायित्व बनता है कि वह उस भाईचारे को प्रखरता दे, जिसके आधार पर भारत ने हर प्रकार...