ताज़ा खबर
 

रविवारीय स्तम्भ

दूसरी नजर- वे गरीबों को एजेंडे पर ले आर्इं

हर प्रधानमंत्री की सफलताएं और विफलताएं होती हैं। दोनों का आकलन समय-विशेष की पृष्ठभूमि में और उस संदर्भ में होता है जिनमें वे घटित...

पश्चिम की तरफ देखने की प्रवृत्ति

राजनीतिक गुलामी से तो हम सत्तर साल पहले मुक्त हो गए, पर सांस्कृतिक गुलामी की निरंतरता बनी हुई है।

चर्चा- भारतीय साहित्य विश्व साहित्य क्यों नहीं

माना कि बांग्ला, कन्नड़, मलयाली, मराठी, गुजराती आदि भाषाओं में अच्छा साहित्य रचा गया, मगर प्रश्न यह है कि वह विश्व स्तर पर स्थापित...

बाखबर- इतिहास की मूंछें

चित्तौड़गढ़ के जौहर कुंड वाली जगह में बहुत सारी क्षत्राणियां खड़ी हैं। एक रिपोर्टर पूछती है: आप आज तलवार लेकर क्यों निकली हैं?

तीरंदाज- जहां जीवन का अर्थ खुलता है

लक्षद्वीप के साथ नाम बड़े और दर्शन छोटे वाली स्थिति नहीं है। इसके विपरीत यह एक ऐसी जगह है, जो लाखों में एक होने...

वक्त की नब्ज- परदेसी मीडिया का पूर्वाग्रह

पहली बार नहीं है कि मैंने ऐसा अज्ञान विदेशी पत्रकारों में देखा है। कुछ वर्षों के लिए मैंने लंदन के संडे टाइम्स के लिए...

दूसरी नजर- विकास और इससे वंचित लोग

भले परमाणु क्लब में देश के शामिल होने या मंगल पर यान भेजने पर गर्व अनुभव करते हों, मगर विकास की संतुष्टि उन्हें फौरी...

बारादरी- मोदी ने देश में भरोसे का माहौल बनाया

हरियाणा की राजनीति के प्रमुख चेहरा और फरीदाबाद से सांसद गुर्जर मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर को पूरे नंबर देते हुए कहते हैं कि उन्होंने ‘एक...

तवलीन सिंह का कॉलम, वक्त की नब्ज- नोटबंदी का हासिल कुछ नहीं

दोनों पक्षों का खूब मजाक उड़ाया गया सोशल मीडिया पर। यह भी देखने को मिला पिछले दिनों कि इस देश के आम आदमी को...

बाखबर- गैस चैंबर

जगह-जगह का धुआं। तरह-तरह का धुआं। धुआं ले लो धुआं। चैनल बोली लगा कर धुएं को बेचते रहे। सबके पास अपना-अपना धुआं था! और...

प्रसंगवश- जिया जरत रहत दिन रैन

अजीब बीमारी है। समूचा देश इस भयानक बीमारी की गिरफ्त में जकड़ गया है। शहर-शहर, गांव, गांव, कस्बा-कस्बा इस बीमारी से आक्रांत है।

पी चिदंबरम का लेख, दूसरी नजर- जन कल्याण की कसौटी पर

नोटबंदी के एक साल बाद, उस फैसले का औचित्य ठहराने वाला हरेक तर्क खारिज हो गया है और उसका मखौल उड़ा है।

बारादरी- राजनीति की देन है आतंकवाद

अखिल भारतीय आतंकवाद विरोधी दस्ते के अगुआ और खुद को टकसाली कांग्रेसी कहने वाले मनिंदरजीत सिंह बिट्टा बेबाकी से कहते हैं कि आतंकवाद राजनीति...

तीरंदाज- वास्तविकता पर आभासी की बढ़त

अन्य पुराने कालों की तरह यह नवजात काल भी नई चुनौतियां हमारे सामने पेश कर रहा है, पर बीते कालों से कहीं ज्यादा तेज...

बाखबर- रजा का वंदेमातरम्

राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत एंकर पूछता है: लेकिन राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत लाउड स्पीकर पर बजाना कहां तक ठीक है? इतने में दूसरा पोल खोल देता...

वक्त की नब्ज- हकीकत से आंखें चुराने का सबब

गुजरात में नेहरू-गांधी परिवार के वारिस ने नोटबंदी और जीएसटी पर डट कर हमला किया है, यह कह कर कि मोदी के इन दोनों...

दूसरी नजर- जीएसटी की उधड़ती परतें

राजग/भाजपा सरकार ने सही जीएसटी के सिद्धांत का उल्लंघन किया, मुख्य आर्थिक सलाहकार की रिपोर्ट को दरकिनार कर दिया और एक अपना जीएसटी तैयार...

जड़ों से कटने का नतीजा

पहले के लोक-समाज अपनी जिन व्यवस्थाओं पर टिके थे, उनकी जगह अब आधुनिक विकास के पश्चिमाभिमुख उपक्रमों ने ले ली है। जिस तरह का...