रविवारीय स्तम्भ

बाखबर: वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति

एक दिन संघ प्रमुख मोहन भागवत ने ‘लिंचिग’ शब्द के ‘भारतीय’ न होने पर आपत्ति जता कर चैनलों में विवाद पैदा कर दिया। जवाब...

एक विश्व एक परिवार

सही सोच-विचार रखने वालों का स्पष्ट मत है कि पृथ्वी पर तब तक शांति और न्यायपूर्ण व्यवस्था स्थापित नहीं हो सकती जब तक कि...

वक़्त की नब्ज़: लोकतंत्र बनाम भीड़तंत्र

नुकसान हुआ है अगर तो भारत की लोकतांत्रिक छवि को, क्योंकि लोकतंत्र का आधार है कानून-व्यवस्था। जिन देशों में लोग आदत डाल लेते हैं...

तीरंदाज: दबी हुई चुप्पी

आधुनिक युग में शायद एक तरफ से कही गई बात को संवाद माना जाने लगा है। कहीं न कहीं दूसरे से हमारी अपेक्षा यह...

बाखबर: पार्टी कहां गई!

ऐसे कार्यक्रमों से आत्मबोध हुआ कि जो कारपोरेट अपने नाना ब्रांडों की नाना भांति की कृपा से अब तक पानी का बंटाढार करते रहे,...

कुपोषण का दंश

भारत में भुखमरी का कारण क्या है, क्या संसाधनों की कमी है? नहींं, ऐसी स्थिति कम से कम भारत में नहींं है। भारत में...

वक़्त की नब्ज़: यह समय है नेतृत्व दिखाने का

जो लोग नफरत फैला रहे हैं, एक तरह की गद्दारी कर रहे हैं देश के साथ। मगर करते हैं देशभक्ति के नाम पर, सो...

तीरंदाजी: होने और दिखने के बीच

मीना कुमारी की छवि एक सहनशील आदर्श भारतीय नारी की थी, जो बिना उफ किए सारे जुल्म और जिंदगी के उतार-चढ़ाव सह जाती है।...

बाखबर: यह है गीता का ज्ञान

एंकर बोली कि मैं इस वक्त विकास की नहीं, दिल्ली में बढ़ते अपराधों की बात कर रही हूं, तो वे कहने लगे कि देखिए...

असुरक्षित स्त्री

महिलाओं के लिए बनने वाली नीतियों का तब तक कोई अर्थ नहीं है, जब तक कि उन्हें सुरक्षित वातावरण नहीं दिया जाता। राष्ट्रीय स्तर...

वक़्त की नब्ज़: यह पेशेवर तरीका नहीं

जो पाकिस्तान के जरनैल न कर सके वह काम भारत के पत्रकारों ने करके दिखाया है : पाकिस्तान को भारत के बराबर लाकर रख...

तीरंदाज: व्यंग्य की जगह

ट्रंप भी राष्ट्रवादी हैं। संयुक्त राष्ट्र के सम्मलेन में उन्होंने पिछले हफ्ते अपने भाषण में कहा था कि विश्व को ‘ग्लोबलाइजेशन’ को भूल कर...

वक्त की नब्जः सम्मान पर बेमानी सवाल

गुजरात के 2002 वाले दंगों के बाद लोगों ने अमेरिकी प्रशासन के ऊंचे हिस्सों में इतना बदनाम किया मोदी को कि उनको इस देश...

वर्षा जल की जगह

गांवों में वर्षा जल संचयन के द्वारा ज्यादा से ज्यादा पानी एकत्र किया जा सकता है, जिससे सिंचाई करके किसान अपने काफी खर्च को...

चर्चाः प्लास्टिक क्रांति का खामियाजा

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया भर के देशों से एक ही बार इस्तेमाल में आने...

बाखबर: डर से डर तक

पिछले कई दिन से अपने देश की ‘जनता’ बिलबिलाती दिखती है। कारण है ‘मोटर वाहन सुरक्षा कानून’ का लागू होना। अमल में आते ही...

वक्त़ की नब्ज़: असल समस्या है जिहादी आतंकवाद

इस सोच से जब तक पाकिस्तान के शासक प्रभावित रहते हैं, तब तक अमन-शांति की बातें कैसे हो सकती हैं हमारे काफिर देश के...

विस्थापित की जगह

यह विडंबना ही है कि देश में पिछले पचास वर्षों में बड़ी सिंचाई परियोजनाओं पर लगभग अस्सी करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं, लेकिन...