ताज़ा खबर
 

रविवारीय स्तम्भ

चर्चाः कविता और मिथक – कविता में पुराकथा और जनमानस

आज अगर सूर और तुलसी जैसे कवि जन-जन के अपने कवि बने हुए हैं, तो कारण यही है कि पुराण चरित्रों को दार्शनिक आभा...

बाखबरः सीबीआइ की रहस्यकथा

हर चैनल जनता का कानूनी ज्ञान बढ़ाने में लग गया। एक बोलता कि नंबर एक को वही समिति हटा सकती है, जिसने उसे नियुक्त...

मुद्दा: मंदिर निर्माण की अड़चनें

राम मंदिर का निर्माण भीड़ जुटा कर नहीं, निर्णयों द्वारा ही संभव है, जिसमें लंबा समय भी लगेगा। इसलिए राम मंदिर निर्माण को लेकर...

वक्त की नब्जः रहबरी का सवाल है

वर्तमान में वही हो रहा है, जो होता आया है दशकों से, लेकिन मोदी की समस्या यह है कि उन्होंने परिवर्तन का वादा किया...

दूसरी नजरः चौपट हाल में अर्थव्यवस्था

अर्थव्यवस्था के बारे में आ रही बुरी खबरों पर जरा नजर डालें- शेयरों के दाम इतने ज्यादा गिर गए हैं कि सूचकांक पंद्रह महीने...

किताबें मिलींः ‘कश्मीरनामा’, ‘रचना की जमीन’ और ‘वैदिक सनातन हिंदुत्व’

कश्मीर के इतिहास, भूगोल और समकाल की कथा सुनना जरूरी है, ताकि हम कश्मीर को सिर्फ ‘समस्या’ नहीं बल्कि एक ऐसी जगह के रूप...

बाखबरः एक और अयोध्याकांड

इस धर्मप्राण देश में दशहरे ने अयोध्याकांड के एक नए संस्करण को खोलने का अवसर दे दिया। इस बार हिंदी चैनलों के साथ कई...

वक्त की नब्जः उनकी पीर सुनेगा कौन!

बच्चियों की तिजारत रोकने में पुलिस इसलिए आज भी नाकाम है, क्योंकि उनको कोठों से बचाने के बाद कोई जगह नहीं मिलती है, जहां...

तीरंदाजः ठांय ठांय दर्शन

वास्तव में, ठांय ठांय राजनीति शास्त्र का महामंत्र है। यह चारों तरफ फैले बियाबान की सांय सांय को शांत करता है। इसका जाप करने...

दूसरी नजरः शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में नाकामी

इक्कीसवीं सदी में यह हाल है कि देश में करीब उनचास फीसद बच्चे ऐसे हैं जो एक साल से ज्यादा नहीं जी पाते।

चर्चाः बोलियों की ताकत

जनजीवन से बोलियों के विस्थापन का कारण बाजार है। इस तथ्य से हमारे नागरिक समाज को रहस्यमय ढंग से पृथक रखा गया है। लिहाजा,...

चर्चाः जनपदीय भाषाएं और हिंदी का भविष्य

रचना में बोलियां क्या भूमिका निभाती हैं? क्या इससे साहित्य के पाठक को भाव ग्रहण करने में कोई कठिनाई आती है? क्या साहित्य की...

किताबें मिलीं: ‘साहस और डर के बीच’, ‘समय के तलघर में शब्द’, ‘बांझ सपूती’ और ‘नागार्जुन दिल्ली में’

नरेंद्र मोहन की डायरी- साहस और डर के बीच- ऐसे ही अनुभव-क्षणों का कोलाज है- सच की टेक पर बिना डरे कला-संरचनाओं, साहित्य, समाज...

बाखबरः कहानी अभी बाकी है मेरे दोस्त

इसे कहते हैं : मीटू की मार्केटिंग! शिकारी शिकार करता है। शिकार मीडिया पर आता है, तो मीडिया करुणा का जाल बिछा कर, इंटरव्यू...

वक्त की नब्जः अभियान और दिलेरी

असली भारतीय मीटू अभियान तब चलेगा जब उन महिलाओं का साथ हम देना शुरू करेंगे, जिनको आज तक यह भी अधिकार नहीं मिला है...

मुद्दा: भूख बनाम भोजन की बर्बादी

अन्न की बर्बादी पर लगाम लगाने की हमारी व्यक्तिगत जिम्मेदारी तो है ही, इस संवेदनशील मामले पर सरकार को नियम बनाने की जरूरत है।...

दूसरी नजरः कश्मीर में हालात और बिगड़ेंगे

नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में कश्मीर को लेकर जिस तरह का अतिवादी नजरिया देखने को मिल रहा है, उसे देख कर तो कोई कह...