ताज़ा खबर
 

दूसरी नजर- विचित्र साल को अलविदा

हंसी बहुत सारी वजहों से आती है। कुछ घटनाएं और विषय तो वास्तव में बड़े विनोदपूर्ण होते हैं। अनजाने में हुई गलतियां भी हंसी-मजाक का विषय बनती हैं।
Author December 31, 2017 05:23 am
डोनाल्ड ट्रंप की जीत से पहले ही जश्न मनाते हिन्दू सेना के कार्यकर्ता (फोटो-ANI)

मेरा खयाल है कि हरेक देश के पास हंसने का कोई दिन होना ही चाहिए। भारत के लिए कोई एक दिन पर्याप्त नहीं हो सकता, पर हम शुरुआत कर सकते हैं।  हंसी बहुत सारी वजहों से आती है। कुछ घटनाएं और विषय तो वास्तव में बड़े विनोदपूर्ण होते हैं। अनजाने में हुई गलतियां भी हंसी-मजाक का विषय बनती हैं। मैं पत्र-पत्रिकाओं में आने वाले चुटकुलों और कार्टूनों का लुत्फ उठाता हूं, और इनमें से कुछ तो मुझे ठहाका लगाने पर मजबूर कर देते हैं। ‘डेनिस द मेनास’ मेरा खास पसंदीदा पात्र है। सोशल मीडिया में ऐसे ढेर सारे कथन और टिप्पणियां आती हैं, कि लेखक की हाजिर-जवाबी की दाद देनी पड़ती है। मीम्स खासकर बहुत विनोदपूर्ण होते हैं। ऐसी कई टिप्पणियां और बयान आए, जिन्हें बस विचित्र ही कहा जा सकता है। पहले शर्म आती है, फिर गुस्सा। मेरी भी नकारात्मक प्रतिक्रिया होती है, पर मैंने ऐसी विचित्रता के पीछे रहे अज्ञान और मूर्खता पर हंसना सीख लिया है। हंसी बेतुकी घोषणाओं से पैदा होने वाले जहर की काट है।  साल 2017, जिसे आज हम अलविदा कह रहे हैं, विचित्र घटनाओं से भरा हुआ था। यहां कुछ उन घटनाओं के उदाहरण दे रहा हूं, जो इतनी बेतुकी थीं कि मुझे शर्म महसूस हुई, या मैं दुखी या कुपित हुआ, पर अंत में मैंने उन्हें हंस कर उड़ा दिया।

घातक घोषणाएं
जो अधिकारपूर्ण पदों पर विराजमान हैं उनकी घोषणाएं गरिमापूर्ण होती हैं।
1. गृह राज्यमंत्री ने एक छोटे-से समारोह में एक डॉक्टर को गैर-हाजिर पाया। (वह डॉक्टर कुछ दिनों से छुट््टी पर था।) बस फिर मंत्री महोदय का पारा चढ़ गया और उन्होंने कहा कि जो डॉक्टर अनुपस्थित थे उन्हें जाकर नक्सलियों से मिल जाना चाहिए और फिर ‘हम आपको गोलियों से भून डालेंगे।’ मंत्री महोदय को शायद बताया गया होगा कि हमारे पास प्रति हजार की आबादी पर डॉक्टरों की तादाद बहुत ज्यादा है और उनकी ‘छंटाई’ कर डालना एक अच्छा उपाय है।
2. राजस्थान उच्च न्यायालय के एक जज ने वेदों को उद्धृत करते हुए कहा कि गोवध करने वालों को सामूहिक रूप से मार डालना चाहिए (मुझे आश्चर्य है कि उन्होंने किस वेद का उद्धरण दिया), और यह कहने के साथ ही उन्होंने सलाह दी: ‘गाय को भारत का राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए और गोवध की सजा आजीवन कारावास हो। अगर एक जज ऐसा कहता है तो मैं कल्पना करता हूं कि भीड़-भरी हमारी जेलों में काफी जगह होगी।
3. मध्यप्रदेश के एक मंत्री ने दुलहनों को सात सौ मोगरियां भेंट कीं। उनसे कहा गया कि ‘यह भेंट पियक्कड़ पतियों की पिटाई के लिए है, पुलिस कुछ नहीं करेगी।’ मंत्री महोदय ने स्त्री सशक्तीकरण, मद्य निषेध, विवाह संस्था, घरेलू मामले में पुलिस की तटस्थता, इन सब की एक ही झटके में रक्षा कर डाली (अगर किसी की हड््डी न टूटी हो)।
बेवकूफाना फरमान
फतवा, फरमान, आदेश, चाहे जो नाम दिया जाय, ऊटपटांगपने के सिलसिले में इनका स्थान सबसे ऊपर रहा:
4. उत्तर प्रदेश के दारुल-उलूम देवबंद का एक फतवा इस प्रकार था ‘औरतें केश न कटवाएं, भौंहें न संवारें।’ ब्यूटी पार्लर जाने की मनाही हो गई। सौंदर्य देखने वाले की आंख में होता है। इसलिए खवातीन, आप ब्यूटी पार्लर न जाएं, अपने शौहर को नेत्र विशेषज्ञ के पास ले जाएं।
5. मथुरा की मरोडा ग्राम पंचायत ने घर के बाहर लड़कियों के मोबाइल फोन इस्तेमाल करने पर पाबंदी लगा दी, और पाबंदी तोड़ने की सजा 2100 रु. जुर्माना तय कर दी। इक्कीस सौ ही क्यों? पंचायत ने इक्कीस सौ की संख्या ही क्यों चुनी? क्या इसलिए कि हम इक्कीसवीं सदी में जी रहे हैं? या इसलिए कि यह सबसे सस्ते मोबाइल सेट की कीमत है?
6. एक हिंदू संगठन ने चेतावनी दी कि ‘क्रिसमस न मनाएं’। संगठन को खुलकर बताना चाहिए कि वह क्रिसमस कैरोल से घृणा करता है, वह क्रिसमस ट्री को जला डालेगा, और वह ईसाइयत के सबसे महत्त्वपूर्ण मूल्य- क्षमा- में विश्वास नहीं करता है। पर हम उन्हें माफ कर दें।
7. दाउदी बोहरा समुदाय के प्रमुख ने अपने समुदाय के लोगों को निर्देश दिया कि वे ‘भारतीय-ढंग का शौचालय इस्तेमाल करें और चुनिंदा जगहों पर ही शादी आयोजित करें।’ हमने कुछ लोगों को पश्चिमी ढंग के कमोड को तोड़ने की तस्वीरें देखीं। सवाल है कि किस तरह बैठें- उकड़ूं या पैर लटका कर। उकड़ूं बैठना ठीक है, अगर मामला खुले में शौच का नहीं है।

खतरनाक प्रयोजन
बेतुकापन खतरनाक भी हो सकता है, पर वैसे उदाहरण मुझे गुदगुदाते नहीं हैं:
8. इंदिरा गांधी मेडिकल संस्थान, पटना ने अपने सदस्यों से वैवाहिक घोषणा का एक प्रपत्र भरने को कहा। कर्मचारियों से कहा गया कि वे प्रपत्र के जरिए बताएं कि वे कुंआरे हैं या उनकी कितनी पत्नियां हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि क्या प्रपत्र केवल पुरुष कर्मचारियों के लिए था।
9. तिरुवनंतपुरम (केरल) में बारहवीं के एक छात्र को कक्षा से निलंबित कर दिया गया, क्योंकि उसने एक लड़की को गले लगा लिया था जिसने पुरस्कार जीता था। लड़के के पक्ष में उच्च न्यायालय का फैसला होने के बावजूद, वह पिछले चार महीनों से निलंबित चल रहा है। वह लड़का (गले लगाने के) अपने अधिकार के लिए दृढ़ संकल्पित है। उसके स्वाभाविक सहयोगी प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी हैं। प्रधानमंत्री को उसे शुभकामना भेजनी चाहिए।
10.जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में एक निजी स्कूल में काम करने वाले शिक्षक-युगल को ऐन शादी के रोज बर्खास्त कर दिया गया। स्कूल प्रबंधन का दावा था कि ‘उनके रोमांस का विद्यार्थियों पर बुरा असर पड़ सकता था।’ क्या प्रबंधन यह कहना चाहता था कि विद्यार्थी ‘रोमांस करने लगते’? युगल ने विरोध किया और दावा किया कि उनकी शादी पारंपरिक ढंग से (बगैर रोमांस के) हुई है (स्कूल प्रबंधन को खुश करने के लिए)।
11. डोनाल्ड ट्रंप बेतुकेपन की दुनिया के निर्विवाद बादशाह हैं। उनकी इस हैसियत को स्वीकार करने का इससे अच्छा तरीका और क्या हो सकता था कि उनका जन्मदिन मनाया जाए। और हिंदू सेना नाम के एक संगठन ने उनके 71वें जन्मदिन पर ठीक यही किया। आयोजन नई दिल्ली में जंतर मंतर पर हुआ। राज तिलक के साथ अनुष्ठान शुरू हुआ और उसके बाद 7 किलो 100 ग्राम का केक काटा गया।
मजे में हंसें और इस विचित्र साल को अलविदा कहें और 2018 का स्वागत करें। यह साल आपके लिए शांति और खुशहाली लाए।

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.