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आर्थिक वृद्धि के चार इंजन हैं: सरकारी खर्च, निजी खपत, निजी निवेश और निर्यात।

Author January 15, 2017 4:01 AM
एक रुपए का सिक्का। (चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है।)

आर्थिक वृद्धि के चार इंजन हैं: सरकारी खर्च, निजी खपत, निजी निवेश और निर्यात। इनमें से दो इंजन- निजी निवेश और निर्यात- कई महीनों से मंद पड़े हैं। निजी खपत का इंजन बढ़िया काम कर रहा था और अर्थव्यवस्था को गतिमान बनाए हुए था। लेकिन आठ नवंबर 2016 से, नोटबंदी के कारण, निजी खपत को भारी धक्का लगा। एकमात्र इंजन जो ठीकठाक काम करता दिख रहा है वह है सरकारी खर्च का। ऐसी स्थिति में, 2016-17 में विकास दर की बाबत हम क्या उम्मीद कर सकते हैं?

डेढ़ लाख करोड़ का नुकसान

जवाब सरकार के केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने दिया है, जिसने 2016-17 में जीडीपी का अग्रिम अनुमान जारी किया है। यह अनुमान अक्तूबर, 2016 तक के आंकड़ों पर आधारित है, जो कि नोटबंदी से पहले के आंकड़े हैं। गंभीर निष्कर्ष यह है कि अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 2015-16 के 7.56 फीसद से गिर कर 2016-17 में 7.09 पर आ जाएगी। यानी आधा फीसद की चपत लगेगी। यह निष्कर्ष दूसरे अनुमानों के अनुरूप ही है, खासकर रिजर्व बैंक के, जिसने आधा फीसद की गिरावट का अनुमान लगाया है। इस बात के पर्याप्त प्रमाण हैं कि नोटबंदी के चलते अर्थव्यवस्था की गति आगे भी धीमी रहेगी। मुझे अंदेशा है कि 2016-17 में जीडीपी में कम से कम एक फीसद की गिरावट की मेरी भविष्यवाणी सही हो सकती है। यह अर्थव्यवस्था को डेढ़ लाख करोड़ रु. का नुकसान होगा।

सीएसओ यह कह कर बच निकला है कि उसने नोटबंदी के असर को हिसाब में नहीं लिया है। अकेले वित्तमंत्री मानते हैं कि अर्थव्यवस्था धीमी नहीं पड़ी है और नोटबंदी से मौजूदा वित्तवर्ष (2016-17) में विकास दर प्रभावित नहीं होगी! अपने दावे के समर्थन में वित्तमंत्री ने दिसंबर तक कर-राजस्व में ‘जोरदार’ वृद्धि का हवाला दिया है- उत्पाद शुल्क में 43 फीसद, सेवा कर में 23.6 फीसद, कॉरपोरेट कर में 10.7 फीसद और आय कर में 21.7 फीसद। साफ है कि वित्तमंत्री उत्साहजनक संशोधित अनुमान (2016-17 के लिए) बजट में पेश करने की भूमिका बना रहे हैं, जो जल्दी ही आएगा। इसकी भी संभावना है कि वे 2017-18 के लिए और भी उत्साहपूर्ण बजट अनुमान प्रस्तुत करेंगे। वे उस व्यक्ति की तरह काम कर रहे हैं जो अकेले अंधेरी गली पार करते समय सीटी बजाने लगता है! जब तक बजट नहीं आ जाता, मैं आंकड़ों पर टिप्पणी नहीं करूंगा।

ठप इंजन

अभी मैं आर्थिक वृद्धि की चालक शक्तियों में से एक की चर्चा करूंगा, और यह भी कि उसके बारे में सीएसओ का अनुमान हमें क्या बताता है। यह चालक शक्ति है निवेश। इसलिए शुद्ध अचल परिसंपत्तियों (जीएफसीएफ) से संबंधित आंकड़ा बहुत मायने रखता है, जो किसी अर्थव्यवस्था में निवेश को मापने का पैमाना है। सीएसओ का अनुमान है कि 2016-17 में जीएफसीएफ में 0.2 फीसद की गिरावट दर्ज होगी। वास्तव में गिरावट कहीं ज्यादा होगी, क्योंकि कोई भी नहीं कह रहा कि नवंबर-दिसंबर में निवेश बढ़ा या जनवरी-मार्च के बीच इसके रफ्तार पकड़ने की संभावना है। [संयोग से, यूपीए सरकार (2004-2014) के अधिकांश कार्यकाल में जीएफसीएफ की वृद्धि दर दो अंक में रही थी।] सीएसओ के अनुमानों पर बारीकी से निगाह डालें तो पता चलता है कि तीन तिमाही तक जीएफसीएफ लगातार सिकुड़ा है, पिछले साल की समान अवधि की तुलना में, और सिकुड़ने की रफ्तार भी बढ़ी है:

2015 2016
(प्रतिशत में)
जनवरी-मार्च 5.35 -1.90
अप्रैल-जून 7.11 -3.10
जुलाई-सितंबर 9.70 -5.59

हमारे पास कॉरपोरेट निवेश का अनुमान भी है जिसका आंकड़ा शुद्ध अचल परिसंपत्तियों में बदलाव की तरफ संकेत करता है। तस्वीर निराशाजनक है। पहली छमाही के आखीर में, सितंबर 2016 में कॉरपोरेट क्षेत्र की शुद्ध नियत परिसंपत्तियों में, सभी प्रमुख श्रेणियों में गिरावट दर्ज हुई। देखें तालिका-
सालाना आधार पर सारी कंपनियां मैनुफैक्चरिंग खनन निर्माण
वृद्धि/गिरावट शुद्ध अचल परिसंपत्तियां (प्रतिशत में)

मार्च 2015 7.47 7.73 3.51 -0.09
सितं.2015 8.49 7.55 5.56 -1.36
मार्च 2016 2.77 -0.98 -2.39 -5.78
सितं.2016 -9.36 -6.07 -12.68 -19.83

अन्य निराशाजनक संकेत

सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र, दोनों की तरफ से नई परियोजनाओं की घोषणा और उन परियोजनाओं में अनुमानित निवेश का हर तिमाही मिलान किया जाता है। अक्तूबर-दिसंबर 2015 की तिमाही और अक्तूबर-दिसंबर 2016 की तिमाही के बीच, सार्वजनिक क्षेत्र की घोषित परियोजनाओं का मूल्य 256,669 करोड़ रु. से कम होकर 42,128 करोड़ रु. पर आ गया, और निजी क्षेत्र की घोषित परियोजनाओं का मूल्य 119,475 करोड़ रु. से कम होकर 86,645 करोड़ रु. पर आ गया।

अन्य संबद्ध आंकड़े भी निवेश में सुस्ती की ही पुष्टि करते हैं। विदेशी फोर्टफोलियो निवेश का रुख दिसंबर के अंत में नकारात्मक हो गया और ऋण-वृद्धि दर में तो अपूर्व गिरावट दर्ज हुई।एक बात बिल्कुल साफ है: निवेश (मूल्य में) कम हो रहा है। यही नहीं, गिरावट की गति काफी चिंताजनक है। ऐसी भयावह स्थिति में, नोटबंदी से चीजें और बिगड़ेंगी ही। यह मानी हुई बात है कि अगर निवेश में गिरावट आती है, तो अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर में भी गिरावट आएगी।
आम लोगों के लिए इसका मतलब है रोजगार के कम अवसर, ज्यादा छंटनी, आय में बहुत कम बढ़ोतरी, और पहले के मुकाबले कम लोगों का गरीबी रेखा से बाहर आ पाना। निकट भविष्य में अच्छे दिन नहीं हैं, 2017 में तो हरगिज नहीं।

 

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