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बाखबर: बलम पिचकारी

अधिकांश चैनलों के लिए अब न कोरोना का बढ़ता आंकड़ा कोई खबर है, न कृषि विधेयक के पास किए जाने के बाद का सांसदों का विरोध या किसानों का असंतोष और आंदोलन बड़ी खबर है। किसान मरें या जिएं, उनको एमएसपी मिले न मिले और चाहे कॉरपोरेट कृषि क्षेत्र को चर जाएं, लेकिन बॉलीवुड का खून बहाना चैनलों के लिए सबसे बड़ा काम है!

Sushant singh rajput, krk, rhea chakraborty, cbi,सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर रिया चक्रवर्ती से सीबीआई लगातार पूछताछ कर रही है।

एक सुपर स्टार के कानूनी सलाहकारों ने जैसे ही एक चैनल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की धमकी दी, वैसे ही एंकर को एक नहीं, दो बार माफी मांगनी पड़ी।

सुपर स्टार के वकीलों का कहना था कि मीडिया झूठी खबर फैला रहा है। हमारे मुवक्किल का उस (नशे के कुचक्र में संलिप्त एक चर्चित) कंपनी से कोई संबंध नहीं है… अगर फिर भी कोई मीडिया ऐसा बताएगा, तो हम उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे…
पहली बार एंकर को अपने कहे से पलटना पड़ा! न केवल चेतावनी दिखानी पड़ी, बल्कि दो-दो बार माफी भी मांगनी पड़ी कि उस सुपरस्टार को लेकर दी गई रिपोर्ट्स के लिए हम माफी चाहते हैं… कि यह खबर ‘पब्लिक डोमेन’ में थी… ‘वी डीपली रिगे्रट दिस एरर’!
शेर को जब सवा शेर मिलता है तो ऐसे ही मजेदार सीन बनते हैं। चैनलों के लिए सुशांत की मौत अब कोई खबर नहीं है। असली निशाना है ‘नशे में डूबा’ बॉलीवुड और रोज नशा पार्टी करते ‘ए लिस्टर’! अब बॉलीवुड को स्वच्छ करना ही चैनलों का एजेंडा है! (जैसे खबर चैनल खुद दूध के धुले हों)!

नाम धरने में चैनल आगे-आगे रहते हैं। जो चैनल इन्ही चर्चित हीरो हीरोइनों की पिक्चरों को प्रमोट करने के लिए हर शुक्र शनि को ‘स्पेशल शो’ दिया करते थे, अब उनमें से कोई बॉलीवुड को ‘गांजापुर’ कहता है, तो कोई ‘चरसपुर’ कहता है, कोई ‘नशे का समंदर’ कहता है!
अधिकांश चैनलों के लिए अब न कोरोना का बढ़ता आंकड़ा कोई खबर है, न कृषि विधेयक के पास किए जाने के बाद का सांसदों का विरोध या किसानों का असंतोष और आंदोलन बड़ी खबर है। किसान मरें या जिएं, उनको एमएसपी मिले न मिले और चाहे कॉरपोरेट कृषि क्षेत्र को चर जाएं, लेकिन बॉलीवुड का खून बहाना चैनलों के लिए सबसे बड़ा काम है!

एक से एक चमकदार नाम खबर बन रहे हैं। जिनके दर्शन के लिए लोग तरसते थे उनको घृणा का पात्र बनाया जा रहा है। खबर चैनलों द्वारा ‘एक लिंच मानसिकता’ तैयार की जा रही है।

और आजकल तो कुछ चैनल और उनके एंकर तथा कुछ नेता बॉलीवुड के बायकाट और इन सितारों के बायकाट का नारा देने लगे हैं। जांच होनी है, अपराध सिद्ध होना है, लेकिन सजा पहले ही दे दी गई है!

दीपिका पादुकोण, सारा अली, श्रद्धा कपूर, रकुल प्रीत, जया साहा ख्ांबाटा, रिया… ये और वो… नशे से संबद्ध लगभग चालीस नामों की सूची एनसीबी के पास बताई जाती है।

एक पुराना वीडियो, जो पहले ही सार्वजनिक था, एक नेता द्वारा चैनलों में चर्चा का विषय बना दिया जाता है, जिसमें करन जौहर, अर्जुन कपूर, शाहिद कूपर, दीपिका पादुकोण, श्रद्धा कपूर, मलाइका अरोड़ा, वरुण धवन और न जाने कौन कौन (कथित) नशा पार्टी करते दिखते हैं। यानी कि ये सभी आरोपी हैं और अब सबसे पूछताछ की जानी चाहिए। इन दिनों चैनलों का एजेंडा ऐसे ही तय होता है!
चैनलों को ‘मल्टी स्टारर पिक्चर’ ‘लाइव’ दिखाने का आनंद आ रहा है। एक चैनल लाइन लगाता है- अब है तीन दिन का ‘पैक्ड शो’! पच्चीस छब्बीस सत्ताइस सितंबर… जब इन इन सितारों को पूछताछ के लिए एनसीबी बुलाने वाली है!
मिल गया न तीन दिन लगातार हंगामा बनाए रखने का पुण्य काम! पैसा, ग्लैमर, सेक्स और नशे से भरपूर कहानी, जिसमें एक से एक सुंदर चेहरे अपने-अपने रोल के साथ सामने हैं और फिर उनको ‘एक्सपोज’ करने का परमानंद! इन दिनों चैनलों से एक ‘सैडिस्ट आनंद’ बरसता है!

किसी टाप की हीरोइन की नशाखोरी को ‘एक्सपोज’ करने में जो मजा है, किसानों की खबर में कहां? एक से एक देव-दुर्लभ सुंदर चेहरे, उनकी कीर्ति से जलते और उनको लथेड़ने के लिए मचलते एंकर! एंकर देवता, रिपोर्टर देवता, नेता देवता, लेकिन हीरो हीरोइन नशेड़ी! गजब का खेल है!

कई एंकर हंटर वाले हो चले हैं। एक एंकर दुखवादी दहाड़ लगाता है कि इन नशेड़ियों का बायकाट करो! बॉलीवुड का बायकाट करो!
एक एंकर नैतिक नसीहत देती है कि ये हीरो हीराइनें आइकन होते हैं, इनकी जिम्मेदारी है कि आदर्श स्थापित करें!

नशे का मामला मूलत: कानूनी है, लेकिन इन दिनों उसे ‘नैतिक’ बनाया जा रहा है। कुछ एंकर नैतिकता के रखवाले बन चले हैं। एक दिन भाजपा के एक सांसद बॉलीवुड के नशे को ‘देश विरोधी गतिविधियों’ से जोड़ देते हैं और उसके बाद उनका यह सूत्र चैनलों का मानो ‘मूल मंत्र’ ही बन जाता है। ‘कठोर सवाल’ करने वाले एंकर तक इस दरोगाई सूत्र पर उंगली नहीं उठाते और न सांसद से पूछते हैं कि सर जी, ये जो बाबा लोग गांजे की चिलम खींचते दिखते हैं, क्या ये भी देशविरोधी होते हैं?

बहरहाल, कुछ चैनल भारत में भांग और गांजे का इतिहास देकर बताते हैं कि भांग-गांजे का वेदों में भी जिक्र आया है, कि वह भारतीय संस्कृति का हिस्सा है, कि अंग्रेजों ने दो सौ बरस पहले गांजे को ‘अपराध’ घोषित किया था। (उनको तो अपनी बोतल बेचनी थी न!) एक एंकर यह भी बताता है कि आज भारत में तीन करोड़ लोग गांजा पीते हैं, कि भांग-गांजे के मेडिकल फायदे भी हैं, कि होली के अवसर पर पूरे उत्तर भारत में भांग छनती है, कि एक राज्य में तो भांग, गांजा अब भी ‘लीगल’ है। इतना ही नहीं, एक चैनल पर आकर भाजपा के पूर्व सांसद तथागत शतपथी बताते हैं वे कभी स्वयं गांजासेवी थे।

बहरहाल, सप्ताह का सबसे चर्चित कूट-पद ‘माल’ रहा! दीपिका की एक पुरानी चैट का कमाल कि खबरों में ‘माल ही माल’ दिखने लगा। हाय! ‘बलम पिचकारी जो तूने मुझे मारी’ पर नाचने वाली ‘सीधी सादी छोरी’ अब झेलो बिटिया एनसीबी की पिचकारी!

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