ताज़ा खबर
 

वक्त की नब्जः लोकप्रियता के बावजूद

मोदी की लोकप्रियता अभी तक कायम है, लेकिन सब मानते हैं कि इस बार उनके पक्ष में कोई लहर नहीं है, सो जिस तरह पिछली बार राजस्थान की सारी सीटें भारतीय जनता पार्टी को मिली थीं इस बार ऐसा होना मुश्किल है। यह भी कहना जरूरी है कि मोदी की लोकप्रियता इसलिए भी है, क्योंकि राहुल गांधी की इतनी कम है।

Author September 30, 2018 12:56 AM
मोदी की लोकप्रियता अभी तक कायम है, लेकिन सब मानते हैं कि इस बार उनके पक्ष में कोई लहर नहीं है, सो जिस तरह पिछली बार राजस्थान की सारी सीटें भारतीय जनता पार्टी को मिली थीं इस बार ऐसा होना मुश्किल है।

राजस्थान के अंदरूनी गांवों का दौरा करने गई थी पिछले सप्ताह, आने वाले विधानसभा चुनावों के बारे में जानकारी लेने, लेकिन दौरा शुरू होते ही मालूम हुआ कि अकाल इतना बुरा पड़ा है इस साल मारवाड़ में कि राजनीति और राजनेताओं के बारे में बात करना मुश्किल था मेरे लिए। बाजरे की फसलें सूख गई हैं खेतों में और तालाब सूख गए हैं इस हद तक कि लोगों का कहना है कि कुछ ही हफ्तों में पशु मरने लग जाएंगे। इंसानों की प्यास बुझाने के लिए टैंकरों से पानी खरीदा जा सकता है और जल भागीरथी नाम की एक संस्था की मदद से कई लोगों ने अपने घरों में निजी टैंक भी बनाए हैं, जिनमें अभी तक पानी है। लेकिन पशुओं का प्यास से मरना तकरीबन तय है। बरसात दो-तीन दिन के लिए ही हुई है इस साल, सो लोगों का कुछ गुस्सा प्रकृति की बेवफाई की वजह से है और कुछ परिवर्तन और विकास के न आने से।

मेरा यह दौरा बाड़मेर और जैसलमेर के रेतीले इलाकों का था, जहां ऐसे गांव हैं जिन तक सड़क नहीं जाती है। जहां सड़क नहीं जाती, वहां राजनेता छोड़ो, पटवारी भी नहीं जाते हैं। हमेशा से यह हाल है, लेकिन नरेंद्र मोदी का विकास और परिवर्तन का नारा यहां तक जरूर पहुंचा था 2013 के विधानसभा चुनावों के दौरान और 2014 के लोकसभा चुनावों में भी। सो, बहुत उम्मीद थी लोगों को कि इस बार उनके लिए कुछ न कुछ विकास के तौर पर जरूर किया जाएगा। परिवर्तन जो आया वह सिर्फ दो तरह का है। एक तो ऑनलाइन शब्द अब गांव-गांव में सुनने को मिलता है और दूसरा जियो शब्द। जियो की मैंने बहुत लोगों से तारीफें सुनी, लेकिन ऑनलाइन की बहुत कम। इसलिए कि इसका लाभ लोगों को अभी तक बहुत कम मिला है और मुसीबतें बहुत बढ़ गई हैं।

ऑनलाइन जाने के लिए गांववालों को पच्चीस-पचास किलोमीटर दूर शहर तक जाना पड़ता है, उस एक बस में जो यहां तक आती है दिन में। वहां पहुंचने पर अक्सर मालूम पड़ता है कि जो सब्सिडी उनको सरकार ने दी है या जो मनरेगा का पैसा उनके खातों में जमा किया गया है, उसको हासिल करना आसान नहीं है। ग्रामीण बैंक इतने थोड़े हैं कि जो थोड़े-बहुत हैं उनके सामने लगती हैं लंबी-लंबी कतारें, सो कई बार मायूस होकर वापस लौटना पड़ता है और दुबारा जाना पड़ता है, जिसके कारण दिहाड़ी फिर से गंवाते हैं ऐसे लोग, जो गरीबी रेखा के नीचे अपना जीवन बिता रहे हैं। ऐसा नहीं कि ऐसे हालात सिर्फ पिछले चार वर्षों में पैदा हुए हैं, लेकिन ऐसा जरूर है कि लोगों को पूरा विश्वास था कि नरेंद्र मोदी अपने परिवर्तन वाले वादे पर खरे उतरेंगे।

ऐसा न होने के कारण निराशा फैल गई है गांव-गांव और इसका दोष लोग देते हैं वसुंधरा राजे को। ‘कुछ नहीं किया जी, कुछ नहीं किया है इस सरकार ने।’ इन शब्दों को मैंने हर गांव में सुना, चाहे आबादी मुसलमानों की रही हो, चाहे जाटों की, चाहे राजपूतों की, चाहे मिली-जुली आबादी वाला गांव रहा हो। दोष मोदी को अगर नहीं इतना दिया जा रहा है, तो इसलिए कि मुसलमानों को छोड़ कर, बाकी लोग मानते हैं कि मोदी के इरादे नेक हैं और वे दिन-रात काम कर रहे हैं देश के लिए। महानगरों में इन दिनों चर्चा हो रही है रफाल सौदे की, राम मंदिर की और सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए फैसलों की, लेकिन इस गरीब, ग्रामीण क्षेत्र में ये मुद्दे कोई मतलब नहीं रखते। कैसे रख सकते हैं, जब अकाल का साया मंडरा रहा हो? यह साया लंबा इसलिए भी है, क्योंकि लोग जानते हैं कि चुनाव अभियान शुरू होते ही उनकी समस्याओं की तरफ कोई राजनेता देखेगा तक नहीं। अकाल राहत कैसे पहुंचेगा उन तक जब सरकार ही नहीं रहेगी?

बाड़मेर में जिन गांवों में मैं गई उनके नाम हैं तोलेसर, नवातला, जवाहरपुरा और जसोरों की बेरी। जैसलमेर में मैं गई तेलीवाड़ा, रंजीतपुरा और चैनपुर। हर गांव में मैंने एक सवाल जरूर पूछा : पिछले चार वर्षों में आपके जीवन में कोई परिवर्तन आया है कि नहीं? तोलेसर को छोड़ कर हर गांव में लोगों ने ना में जवाब दिया। तोलेसर जोधपुर-जैसलमेर हाइवे से थोड़ी ही दूरी पर है। यहां कुछ लोग मिले, जिन्होंने वसुंधरा सरकार की भामाशाह योजना की तारीफ की। इस योजना के तहत सरकारी अस्पतलाओं में लोगों का इलाज मुफ्त में किया जा रहा है। लेकिन जब मैंने उनसे पूछा कि क्या वसुंधरा राजे दुबारा मुख्यमंत्री बन सकती हैं, तो जवाब मिला, ‘शायद मोदी की वजह से।’

मोदी की लोकप्रियता अभी तक कायम है, लेकिन सब मानते हैं कि इस बार उनके पक्ष में कोई लहर नहीं है, सो जिस तरह पिछली बार राजस्थान की सारी सीटें भारतीय जनता पार्टी को मिली थीं इस बार ऐसा होना मुश्किल है। यह भी कहना जरूरी है कि मोदी की लोकप्रियता इसलिए भी है, क्योंकि राहुल गांधी की इतनी कम है। जब भी मैं कांग्रेस अध्यक्ष का नाम लेती थी तो या तो लोग खुल कर हंस देते थे या कहते थे कि उनकी नजरों में उनको प्रधानमंत्री बनने के लिए जो अनुभव होना चाहिए वह नहीं है। मारवाड़ के इस दौरे के बाद मायूस मैं इस बात को लेकर हुई हूं कि परिवर्तन और विकास के तौर पर बहुत कुछ किया जा सकता था, जो किया नहीं गया है। आधार और डिजिटल द्वारा इस ग्रामीण क्षेत्र को इक्कीसवीं सदी में घसीट कर ले जाने के लिए व्यवस्था तैयार जरूर है, लेकिन इस व्यवस्था का उपयोग नहीं हुआ है अभी तक।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App