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बाखबर: महाजनों की मस्ती, जनता की जान सस्ती

अंत में आए प्रधानमंत्री! देश को समझाया कि कोरोना से जीतने के लिए उनको जनता से दो-तीन चीजें चाहिए : एक संयम और दूसरा संकल्प और एक दिन का रविवारीय ‘जनता कर्फ्यू’! सुबह सात बजे से रात के नौ बजे तक जनता लगाए अपने आप पर अपना ही कर्फ्यू!

Government fix prices of hand sanitizer and face mask to stop black marketing, coronavirus, COVID-19, ram vilas paswan, minister of consumer affairs, IRCTC, Indian Railway, Indian Railway IRCTC, Indian Railway ticket, Irctc ticket refundकोरोना वायरस से बचाव के लिए मास्क पहने हुए रेल यात्री। फोटो: PTI

सावरकर का पोस्टर नमोनम:
सावरकर पर जिन्ना उवाच नमोनम:
जिन्ना पर लिखे आंबेडकर नमोनम:!
जेएनयू में एक दिवसीय छात्र हाहाकार स्वाहा:

हाय हाय मी लार्ड जी! हाय हाय जी आप जी कि गो गो जी गोइंग गोइंग गॉन टू राज्यसभा!
हाय हाय री जलोकड़ी राजनीति, हाय हाय री नैतिकता कि हमन्नै भेजे तो तुमन्नै भी तो भेजे थे मी लार्ड रंगनाथ जी और मी लार्ड हिदायतुल्ला जी! आप करो तो वाह वाह! हम करें तो हाय हाय! ये क्या बात हुई?

हाय हाय शाहीन बाग! वाह वाह शाहीन बाग! कोरोना से डर शाहीन बाग! कल को कोरोना आ गया तो क्या होगा तेरा शाहीन बाग?
दादी बोलीं नानी बोलीं, नए नए तख्तों पर बैठी बोलीं कि अपने पास मास्क है, सेनेटाइजर है, साबुन और पानी है, डॉक्टर हैं, दवाएं हैं, इलाज हैं… तेरे पास क्या है?
गनमाइक लेकर रिपोर्टर बोला : दादी जी! नानी जी, कोरोना का खतरा है! अब तोे हट जाओ! वे बोलीं : हम ना हटने के! होना होगा तो कहीं भी हो जागा! घर में हो जागा! मौत तो कहीं भी आ सकती है।

एक चैनल का रिपोर्टर हार कर ‘पीस टू कैमरा’ करता है : ये लोग इस जगह को नहीं छोड़ने वाले!
एक बहस का ‘मैच-पाइंट’ : रामनवमी का मेला तय और शाहीन बाग हट जाय! ये कैसा न्याय?
एक शाम एक सूट-बूट-टाई-सज्ज विशेषज्ञ चेताने लगा कि कोरोना तीसरे चरण में जाने वाला है। उसका ‘समुदायीकरण’ का खतरा है, सावधान!
इसी बीच एक ब्रेकिंग : कोलकाता एअरपोर्ट पर रोकने के बावजूद एक के भाग जाने की खबर और अखिल एंकरजन गुस्से में लाल पीले कि अभी गिरफ्तार करो इस अहमक को! जाहिल हमें भी मारेगा!

एक चैनल दिखा रहा हालीवुड की फिल्म ‘कंटेजियन’, जो बताती है कि जब अमेरिका मिनोसोटा में फैला था ऐसा ही मारक वायरस तो क्या हुआ था! डर का नया बाजार बन रहा है!
इसके आगे शुरू हुआ : ये बंद! वो बंद! बार बंद! सिनेमा! मल्टीप्लेक्स बंद! मॉल बंद! पार्टी बंद! रैली और मीटिगें बंद! पहले हुआ कि पचास से अधिक इकठ्ठे न हों!फिर बीस से अधिक न हों। फिर चार से अधिक न हों… यहां बंद वहां बंद। बंद ही बंद! लालकिला, कुतबमीनार, ताज, हंपी, अजंता एलोरा, दार्जीलिंग, कलिंपोंग, पुद्दुचेरी के बार बंद, मुंबई के, दिल्ली के स्कूल बंद…

हॉलीवुड का जस्टिन बीबर गाने लगा : कोरोना से बचना है तो अपने को पृथक करो! लेडी गागा ने गाया कि पृथक करो! डॉरपिक मर्फी भी गाए कि पृथक करो!
राहुल परेशान कि कोरोना के कारण अपनी अर्थव्यवस्था बैठ जानी है और पीएम को चेताने लगे कि सुनामी आ रही है और सरकार तैयार नहीं!
लेकिन, सुनामी लगी कमलनाथ को! बाईस कांग्रेसी विधायकों ने पृथक की कमलनाथ सरकार! भाग्य जगे शिवराज के!

लेकिन, चर्चा में फिर से आया शाहीन बाग! फिर आया ‘तौहीद जमात’ के अन अमीन द्वारा आयोजित चेन्नई वाला शाहीन बाग : एंकर की चेतावनी आई : इस भीड़ में कोरोना फैल सकता है! जवाब आया : कोरोना को जवाब है हिजाब! सवाल : ईरान में भी तो हिजाब था, वहां इतने क्यों मरे? जवाब : अल्लाह की मर्जी है! ‘फेथ’ सबसे ऊपर है! हक की लड़ाई है! एक प्रतिवादी बोला : ये बंदा हिप्पोक्रेट है, खुद तो कभी नहीं बैठा शाहीन बाग में और यहां बकवास करता है… इसके आगे तू तू मैं मैं थी और एंकर का ब्रेक था। फिर भी चैनल ने लाइन दी : इन ‘प्रोटेस्टरों’ के साथ सख्ती से निपटने का वक्त आ गया है!

अंत में आए प्रधानमंत्री! देश को समझाया कि कोरोना से जीतने के लिए उनको जनता से दो-तीन चीजें चाहिए : एक संयम और दूसरा संकल्प और एक दिन का रविवारीय ‘जनता कर्फ्यू’! सुबह सात बजे से रात के नौ बजे तक जनता लगाए अपने आप पर अपना ही कर्फ्यू! शाम के पांच बजे सब बजाएं थाली, कटोरी, चम्मच, चिमटा, ये वो और शाबासी दें उनको, जो आपकी खातिर अनिवार्य सेवाओं में लगे हैं… आइए पूरे संयम और संकल्प के साथ बढ़ें, देश बचाएं, जग बचाएं…
इस पर चैनल पुलकित, एंकर हुलसित : देश पीएम के साथ! जनता पीएम के साथ! एक चर्चक उछला : मैं संकल्प लेता हूं, सही समय पर सही बात कही! कल तक के एक क्रिटीकल जी कहिन कि मैं उनकी मुक्तकंठ से प्रशंसा करता हूं!

सोशल मीडिया के विघ्न-संतोषियों से खिन्न एक एंकर कहिन : काहे चिल्लपों करत हो! ई कर्फ्यू बाध्यकारी नहीं, सिर्फ अनुरोध है!
इतने में एक बहादुर एंकर गरजने लगा : अब या तो कोरोना रहेगा या हम! भारत एकजुट है, जनता का कर्फ्यू अभूतपूर्व विचार है! एक चर्चक बोला कि यह बिल्कुल सही है। आज हम सबको एक साथ खड़े होना चाहिए…

जैसे ही खबरों में एंट्री मारी वीवीआइपी महाजनों की लाडली गायिका कनिका ने, वैसे ही लखनऊ से कानपुर तक सब रोने लगे ‘कोरोना कोरोना’ और कहने लगे ‘सेल्फ आइसोलेशन’ कोरोना-कोरोना!
इस तरह, जहं जहं पैर पड़े कनिका के तहं तहं हुई गया पनिया ढार! जहं जहं पैर पड़े कनिका के तहं तहं हुई गया कोरोना वार।
किसी ने सच कहा : महाजनों की मस्ती! जनता की जान सस्ती!

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