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बाखबरः माल्या मिलन

चैनल रुपए को रोज लुढ़कता और पेट्रोल के दामों को रोज चढ़ता दिखाते रहे। भक्त चैनल तक सरकार की विफलता का ‘नैरेटिव’ बजाने को मजबूर हुए। बाईस विपक्षी दलों ने भारत बंद का आह्वान कर डाला। भारत बंद दिखता रहा।

Author September 16, 2018 3:57 AM
लाइव कैमरों में कह दिया कि ‘आने से पहले वित्तमंत्री से मिला था’ और देखते-देखते चोकसी का गोला फुस्स हो गया।

चैनल रुपए को रोज लुढ़कता और पेट्रोल के दामों को रोज चढ़ता दिखाते रहे। भक्त चैनल तक सरकार की विफलता का ‘नैरेटिव’ बजाने को मजबूर हुए। बाईस विपक्षी दलों ने भारत बंद का आह्वान कर डाला। भारत बंद दिखता रहा। बंद सफल रहा। कांग्रेस को श्रेय मिलने लगा। यह क्या बात हुई? शाम को ही चैनलों ने नैरेटिव बदल दिया और बंद को ‘बंद’ बदनाम करने लगे। एक चैनल ने लाइन दी : यह बंद है कि ‘हुलीगनिज्म’? दूसरे ने पूछा : यह बंद है कि अराजकता? तीसरे ने पूछा : इससे किसको फायदा? बंद की खबर ने भाजपा की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की खबरों को फोकस न होने दिया।

सिर्फ रघुराम राजन के पत्र ने फंसट डाली कि बैंक प्रणाली को यूपीए ने बर्बाद किया। एंकरों ने यूपीए की धुलाई शुरू कर दी! सिर्फ एनडीटीवी ने बताया कि राजन के पत्र ने यूपीए के साथ ‘एनडीए’ को भी जिम्मेदार बताया है। फिर भी राजन का पत्र बड़ा हंगामा न कर सका। हां हेरल्ड केस में अदालत के फैसले ने राहुल को जरूर झटका दिया। चैनलों ने उसे ऐसा ही झटकेदार बताया। भाजपा का आरोप रहा कि राहुल ने आयकर बचाने के लिए शेयर की कीमत कम बताई! यह तो कर चोरी है! लेकिन एंटीगुआ में बैठे मेहुल चोकसी ने एबीपी चैनल पर आकर ज्यों ही अपनी कहानी रो-रोकर बताई कि त्यों ही कहानी यूपीए की ओर से हट कर एनडीए की ओर मुड़ गई।

यहीं से ‘भगोड़े को किसने भगाया’ वाला नैरेटिव चिपका। कांग्रेस के प्रवक्ता सुरजेवाला ने सरकार को आड़े हाथों लिया कि नीरव मोदी और चोकसी जैसे भगोड़ों को देश से भागने क्यों दिया गया? क्या भगोड़ों के संरक्षक पीएमओ में हैं? यह आरोप बज ही रहा था कि लंदन की अदालत के बाहर वाली सड़क पर अपने सिगार का कश खींचते हुए माल्या ने ‘मिलन’ का ऐसा गोला दागा कि ‘दिल्ली हिलेला’ हो गई। लाइव कैमरों में कह दिया कि ‘आने से पहले वित्तमंत्री से मिला था’ और देखते-देखते चोकसी का गोला फुस्स हो गया।

हर चैनल पर दिन भर माल्या की वही लाइन चिपकी रही कि आने से पहले वित्तमंत्री से मिला था, आने से पहले वित्तमंत्री से मिला था, आने से पहले वित्तमंत्री से मिला था। मिला था, मिला था, मिला था। माल्या मिलन की कहानी रहस्य और रोमांच से लबालब थी। ‘अब आएगा मजा’ वाला सीन बनने लगा। पहला झटका एक चैनल पर माजिद मेमन ने दिया : इसका मतलब है उसके भागने की जानकारी सरकार को थी? टाइम्स नाउ पर भाजपा प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने जवाब दिया कि चूंकि सरकार उसके पीछे पड़ी है, इसलिए ऐसे बोल रहा है। लेकिन ‘मिला था’ वाली लाइन एक बार जो चिपकी तो चिपकी ही रही। अंतत: वित्तमंत्री जेटली को मुंह खोलना पड़ा कि इतना याद है कि एक बार जब मैं अपने संसदीय दफ्तर जा रहा था, तो वह पीछे-पीछे दौड़ कर आया और सेटलमेंट की बात की। मैंने कहा कि जो बात करनी है, बैंकरों से करो। यह सिर्फ एक वाक्य की बातचीत थी, मैंने उसे ‘स्नब’ कर दिया।

फिर क्या था? कांग्रेस के चिरचिटे चिपक लिए। माल्या का एक वाक्य सौ पर भारी था। एक चैनल पर अभिषेक मनु सिंघवी ने चिपकाया : मिलने की बात क्या वित्तमंत्री ने पीएम को बताई? क्या मीटिंग चलते-चलते थी या वह ‘स्ट्रक्चर्ड’ थी? जवाबी हमले की मुद्रा में दो अंग्रेजी एंकर अपने हाथों में कुछ कागज लहरा-लहरा कर दिखाने लगे कि देखो-देखो ये हैं माल्या और मनमोहन के बीच पत्राचार। एक के लिए यह ‘स्वीट डील’ था। दूसरे के लिए यह ‘स्वीटहार्ट डील’ था। हाय! हाय!! मनमोहन माल्या को थैंक्यू तक बोला!

मगर, चिपका हुआ सवाल पूछता रहा कि जेटली माल्या से मिले तो कैसे मिले? उन्होंने इसके बारे में पीएम को बताया या नहीं और कि उसके भागने की जानकारी उनको थी कि नहीं? ‘माल्या मिलन’ की बात का एक चश्मदीद गवाह भी राहुल ने पेश कर दिया। गवाह सांसद पूनिया बोले कि माल्या और जेटली जी को आपस में बातचीत करते मैंने संसद में देखा था। पहले उन दोनों ने कुछ मिनट खड़े-खड़े बातचीत की फिर बेंच पर बैठ कर बात करने लगे। बातचीत कोई बीस मिनट हुई होगी। सीसीटीवी लगे हैं। रिकार्ड देख लें। अगर मैं झूठ, तो राजनीति छोड़ दूंगा, नहीं तो वे छोड़ दें।

राहुल ने कहा कि जेटली जी झूठ बोलते हैं। क्यों नहीं बताते कि क्या डील हुई है? भाजपा प्रवक्ता नलिन कोहली ने जवाब दिया कि कांग्रेस घोटालेबाजों की बातों को अधिक विश्वसनीय समझती है, क्योंकि वह खुद घोटालेबाज पार्टी है।… इसके बाद तो ‘चश्मदीद गवाहों’ की लाइन लग गई। एक चैनल पर शहजाद पूनावाला ने स्वयं को नीरव मोदी और राहुल के एक कॉकटेल पार्टी का चश्मदीद गवाह बताया और राहुल को चुनौती दी। फिर वक्फबोर्ड के वसीम रिजवी ने आरोप लगाया कि वक्फ की जमीन के मामले में गुलाम नबी आजाद ने फोन पर उनसे कहा कि माल्या भला आदमी है। फोन रिकार्ड देख लो। उसके बाद राजदीप ने वकील दवे को कहते दिखाया कि माल्या के भागने के छत्तीस घंटे पहले कुछ बैंक वालों ने उनसे सलाह ली थी और उन्होंने माल्या को रोकने के लिए अदालत जाने को कहा था, लेकिन तय वक्त पर मुकदमा करने कोई नहीं आया। रहस्य रोमांच से भरपूर माल्या मिलन की कहानी अभी बाकी है!

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