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बाख़बर : जाने भी दो यारो वाया कोलकाता

एनडीटीवी की रिपोर्टर ने एक उन पांच सिपाहियों के अंदर दबने और बचे रहने की कहानी बताई। सड़क के दोनों ओर रहने वाले बचाव दल को पानी पिलाते हुए दिखते थे।
Author नई दिल्ली | April 3, 2016 00:12 am
कोलकाता में गिरे पुल की एक तस्वीर। (एएनआई फोटो)

एक चश्मदीद: सैकड़ों दब के मर गया?

एक औरत: सरकार ने इसे बनाने का परमीशन कैसे दिया?
एक और चश्मदीद: जैसे बम फटा हो ऐसा लगा।
एक युवती: जिंदगी मौत का फासला कम हो गया।
एक बुजुर्ग: सब ठीक चल रहा था, अचानक कैसे बैठ गया ब्रिज?
एक व्यक्ति: हमारा मकान कांप गया ऐसा गिरा।

टाइम्स नाउ ने बांग्ला चैनल ‘चौबीस घंटा’ का वह टुकड़ा दिखाया, जिसमें उस चौराहे के तीनों ओर कई आॅटो, गाड़ियां, टैक्सियां, रिक्शे और पैदल खड़े थे कि एक पल में पुल का एक बड़ा हिस्सा सीधे नीचे आ गिरा।
उसके बाद सीन एकदम धूलभरा और बदहवास था। चौबीस घंटा के रिपोर्टर ने बताया कि कुछ देर पहले सब सामान्य था कि अचानक सब कुछ नीचे आ रहा!

आप बार-बार रिपीट सीन देखते और सोचते कि गिरने से पहले जो दृश्य था, गिरने के बाद उसका क्या हुआ? कहां गया? वह वहीं दबा था। सब कुछ एकदम हुआ और एक पल में हुआ। रिपोर्टर बता रहा था कि आप गरम कंक्रीट के मलबे को बहता देख सकते थे, उसकी गरमी और ताजा बनी कंक्रीट की बदबू को महसूस कर सकते थे। लेकिन यह सीन तो सिर्फ एक एंगिल से था! बाकी के एंगिल कैसा सीन देते होंगे, सहज ही सोचा जा सकता है।
पुल बनाने वाली कंपनी के निदेशक से पूछा गया कि इस हादसे का जिम्मेदार कौन, तो वह बोला: दिस इज एन एक्ट आॅफ गॉड! यानी, सब भगवान की लीला!

आप मध्यवर्गीय धिक्कार से सरकारों को कोस सकते हैं, उनके भ्रष्टाचारों को सूंघ सकते हैं और इत्मीनान कर सकते हैं कि ऐसा तो कहीं पर भी हो सकता है और इस तरह आप घर बैठे अस्तित्ववादी जैसे होने लगते हैं!
टाइम्स नाउ का रिपोर्टर हादसे को देख बदहवास-सा जिस-तिस से पूछता जा रहा था। टाप एंगिल से ही दृश्य को पूरी तरह दिखाया जा सकता था। टाइम्स नाउ से लेकर न्यूज एक्स तक टाप से दिखा रहे थे, जिससे दृश्य की दारुणता साफ दिखती थी।
इंडिया टुडे का रिपोर्टर एक मकान की दूसरी मंजिल से कवर कर रहा था। उसी ने चेताया कि अब असल समस्या भीड़ को संभालना है।

एनडीटीवी की रिपोर्टर ने एक उन पांच सिपाहियों के अंदर दबने और बचे रहने की कहानी बताई। सड़क के दोनों ओर रहने वाले बचाव दल को पानी पिलाते हुए दिखते थे। रिपोर्टर ने ठीक कहा कि कंक्रीट में दबे लोगों के बावजूद गिरे पुल पर राजनीति शुरू हो गई है। कांग्रेस ने मंत्री की गिरफ्तारी की मांग की है।

टाइम्स नाउ ने वह कवरेज बीच में ही काट दिया, वरना राहुल गांधी तो बोल ही दिए थे कि हादसा हुआ है और चुनाव का वक्त है। इसके बाद चैनल के संपादक ने भाषण को काट दिया। शायद ठीक ही किया!
कोई हादसा हुआ नहीं कि दोषारोपण का खेल शुरू हुआ नहीं। हादसों पर राजनीति करना अपना जातीय स्वभाव है। अब सब कहेंगे कि राजनीति नहीं करनी चाहिए, लेकिन हर समय करेंगे राजनीति ही! ममता दीदी ने लेफ्ट पर आरोप लगाया: टेंडर लेफ्ट के वक्त हुआ। लेफ्ट कहेगा कि पुल तो ममता के वक्त गिरा!

सब भगवान की लीला! देर तक फिल्म ‘जाने भी दो यारो’ की याद आती रही!
यह सचमुच का हृदय परिवर्तन है कि खाता परिवर्तन कि अचानक माल्याजी ने बड़ी खबर बना डाली। ज्यों ही माल्याजी द्वारा बैंकों को चार हजार करोड़ रुपए देने का आॅफर अदालत को बताया गया, त्यों ही कहानी एक बार फिर सुपर सेक्सी बन कर उभरी। माल्याजी जब खबर बनाते हैं उनकी सेक्सी छवि चैनलों की फाइलों से निकल आती है। इस अवसर पर भी एक अंगरेजी चैनल ने उन चित्रों को बार-बार रिपीट किया, जिनमें माल्याजी सुंदरियों से घिर हुए खड़े हैं। सुंदरियां उनको बार-बार चूम-चाट रही हैं। उधर ऐन बगल में उनके सुपुत्रजी भी सुंदरियों के बीच खड़े होकर उस न्यूड कलेंडर के एक-एक पृष्ठ को बड़े प्यार से पलट रहे हैं, जिसके हर पृष्ठ पर उत्तेजक मुद्रा में खड़ी बैठीं लेटीं (लगभग) नग्न सुदरियां उनींदी और उत्तेजक नजर आती हैं। एक ओर पिताश्री दूसरी ओर पुत्रश्री और बाकी आजू-बाजू चिपटी सुंदरियां ही सुंदरियां!

इन दृश्यों के बीच उस अंगरेजी चैनल पर कई कॉरपोरेट वकीलों और सोशलाइटों को चिंता सता रही थी कि माल्या के आॅफर को गलत न पढ़ा जाए। वे देश का नागरिक हैं, भगोड़ा नहीं हंै। जब पूछा गया कि उधार तो नौ हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का है और बात सिर्फ चार हजार करोड़ देने की की जा रही है तो बाकी पांच हजार करोड़ रुपए
कौन देगा, कब देगा?

अरे सरजी! यही तो भगवान की लीला है और उसे भगवान ही जानें!
एक अंगरेजी चैनल ने एक एमपीजी को एक गरीब से दिखते वृद्ध को लात मारते दो-तीन दिन तक बार बार दिखाया और चाहा कि उनके लात प्रहार पर उनकी जनभर्त्सना हो। एक हिंदी चैनल ने तो लात प्रहार को गिन कर भी बताया कि तीन बार लात मारी गई। फिर इसे निंदनीय कृत्य बताया। लेकिन धन्यतम थे एमपीजी कि अपनी लात प्रहार का बचाव करते हुए फरमाये कि (जिसे लात लगाई) वे कोई संत नहीं हैं!

सरजी! हमें यकीन है कि आपकी लात पाकर तो उसे संतत्व प्राप्त हो ही गया होगा!
जब जब टाइम्स नाउ देखा तब तब सोचा कि इस मुए पाकिस्तान को क्या सूझी कि कहीं से किसी भी व्यक्ति को पकड़ कर, उसे भारतीय जासूस में तब्दील कर, उसका एक नकली टेप बना कर, पठानकोट के अपने पाप को बेकार करने के चक्कर में, टाइम्स नाउ के एंकरेश्वर अर्णव के हाथों मार खाता! क्या उसे नहीं मालूम उसकी हर हरकत पर अर्णव की नजर इतनी तीखी और जुबान इस कदर तेजाबी और मरखनी रहती है कि अगर बेशर्म न हों तो पाकिस्तानी रिटायर्ड जनरल शर्म के मारे चुल्लू भर पानी में डूब मरें!

जली-कटी सुनाने में अर्णव की मिसाल नहीं और उनके तेजाबी तंज किसी मिसाइल से कम नहीं। अपने चैनल में अक्सर सादर बिठा कर पाकिस्तानी जनरलों को खरी खोटी सुनाने के परम शौकीन अर्णव ने इस बार पाकिस्तानी वीडियो को तकनीकी तर्क के आधार पर नकली सिद्ध करके बताया कि उसमें पांच कट हैं और लिप सिंक इतना ‘कलात्मक’ है कि अब आइएसआइ का नाम बदल कर ‘इस्लामाबाद ब्लंडर एजेंसी’ यानी ‘आइबीए’ रख दिया जाना चाहिए, क्योंकि उसने बड़ी मेहनत से ‘डी ग्रेड’ के नकली वीडियो बनाने का एक्सपर्टाइज हासिल कर लिया है!

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