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पदमावत की जगह ‘मणिकर्णिका’ लेने वाली है। एक ब्राह्मण महासभा धमका गई है कि इतिहास से तोड़-मरोड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी, करणी सेना की तरह हम भी ताकत दिखांएगे! इन दिनों विरोध भी एक प्रोमो होता है!

Author February 11, 2018 05:21 am
योगी के साथ मोदी

खबरों में यूपी यूपी यूपी है। अपराध मुक्त किया जा रहा है। एक साल में सौ से ज्यादा एनकाउंटर ठांय ठांय ठांय ठांय हो रहे हैं। लेकिन एक ठांय ठांय गलत हो गई। पुलिस अफसर की व्यक्तिगत खुंदक एनकाउंटर कर गई और यूपी अपराधी रहित होते-होते रह गया! ये मुए चैनल किसी के सगे नहीं! कल तक यूपी यूपी चिल्लाते रहे और आज एनकाउंटरों पर सवाल उठाने लगे! एक रामभक्त जी जब भी बोलते हैं, सुभाषित बोलते हैं। एक दिन बोल दिए : ‘ताजमहल’ कहो या तेजोमहल, एक ही बात है और खूबसूरत इमारत है। हिंदुओं ने बनवाई है। ताजमहल बोलिए या तेजोमहल, बात एक ही है, हम तो बोलेंगे ‘तेजो मंदिर’ और इसी तरह कहलाने लगेगा ताजमहल नहीं, तेजोमंदिर! आगे से ‘वाह ताज नहीं’ ‘वाह तेजोमहल’ कहिए! वाह उस्ताद! ‘मुसलमान पाकिस्तान जाएं’ रामभक्त जी कैमरे के आगे जब ऐसे मधुर वचन बोल रहे थे, तो बेहद प्रसन्न नजर आते थे!

अंग्रेजी चैनल चिल्लाते थे : ‘विभाजनकारी विभाजनकारी’! और यही तो चाहते थे विभाजनश्री जी और यही दिन भर बजाया चैनलों ने। तब चैनल किस बात पर चिल्लाते हैं कि विभाजनकारी विभाजनकारी! उनने तो बोला एक वाक्य, लेकिन आपने बजाए हजार वाक्य, हजार बार! रामभक्त तो कहेगा ही, आप भी तो कहे जा रहे हैं ‘विभाजनकारी! इन दिनों सिर्फ नेता नहीं खेलते हैं विभाजन विभाजन। कुछ चैनल तो खुल के खेलते हैं : विभाजन विभाजन!

सुपीम कोर्ट में मंदिर-मस्जिद विवाद की सुनवाई की खबर कि एक हिंदी चैनल लाइन देता रहा ‘आखिर कब तक बनेगा राममंदिर?’ उसका बस चले तो कल बनवा दे राममंदिर! इसके आगे ‘पकौड़ावतार’ हुआ। भाजपा अध्यक्ष ने अपने पहले भाषण में पकौड़े को रोजगार से जोड़ कर सबको निरुत्तर कर दिया!
चैनलों को पकौड़ा बहुत भाया! चर्चा में ही नहीं दिखा, दुकानों पर भी दिखा! एक चैनल दिल्ली के पकौड़े तलने वालों में घूम गया। इंडिया टुडे ने कई पकौड़े वालों से पूछा कि कैसा लगता है? सभी ने कहा, मजबूरी में बनाते हैं, दो चार सौ कमाते हैं। पकौड़ा प्रिय राजदीप सरदेसाई ने एक पकौड़े वाले के पास पहुंच कर बातचीत की और पकौड़ा चख कर कहा कि वाह क्या बात है! लेकिन पकौड़े वाले ने हरगिज न कहा कि उसे पकौड़ा बनाने के काम पर गर्व है!
इतने में एक डाइटीशियन बोलीं कि सब तेल पर निर्भर है, पकौड़ा कैसा बना है, जंक है कि हेल्दी है! सब पकौड़े के दुश्मन हैं! लेकिन पकौड़े का पिंड इतने से भी नहीं छूटा। एक विचारशील चैनल ने ‘पकौड़ा दर्शन’ पर प्रकाश डलवाया तो सांसद केसी त्यागी जी ने बताया कि देश में एक करोड़ पकौड़े बनाने वाले हैं।
सरजी! यह आंकड़ा तो अपने अखिल भारतीय पकौड़ा उद्योग का अपमान है। पकौड़ा हर चौके में बनता है, इस तरह पकौड़े बनाने वालों की संख्या असल में तो पचास करोड़ से अधिक ठहरती है! और पकौड़े बनाने वाले को गर्व हो न हो, उसे सिंकते देखते ही खाने वाले के मुंह में पानी जरूर आता है! ऐसे पकौड़े का अपमान न करें!

कर्नाटक में अष्टयाम गउ महायज्ञ किया गया, तो एक अंग्रेजी चैनल उसी में से कुछ विभाजन निचोड़ने लगा। सीएम सिद्धारमैया से एक चैनल की रिपोर्टर ने पूछा : आप नरम हिंदू हैं कि गरम हिंदू? वे बोले कि मैं भी हिंदू हूं! हिंदू होने के लिए होड़ है। एक अंग्रेजी चैनल पर शशि थरूर की ‘मैं हिंदू क्यों हूं’ (वाई आयम हिंदू) पर उनसे बातचीत दिखी। यहां भी लगता रहा कि नरम हिंदू की मांग बढ़ रही है। गरम हिंदुत्व की प्रतिक्रिया में नरम हिंदुत्व अवतार ले रहा है।
यानी वही बात कि नरम पकौड़ा कि गरम पकौड़ा? भाता तो गरम पकौड़ा ही है! पाकिस्तान ने गोले बरसाए और कई भारतीय सैनिक शहीद हो गए। एक एंकर गुस्से में बोला : कब करोगे अगली सर्जिकल! लगे रहो मुन्ना भाई!
पदमावत की जगह ‘मणिकर्णिका’ लेने वाली है। एक ब्राह्मण महासभा धमका गई है कि इतिहास से तोड़-मरोड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी, करणी सेना की तरह हम भी ताकत दिखांएगे! इन दिनों विरोध भी एक प्रोमो होता है!
कट टू राज्यसभा। पीएम का भाषण। बीच-बीच में एक सांसद का अट्टहास विघ्न डालता रहा। राज्यसभा अध्यक्ष ने सावधान भी किया, लेकिन अट्टहास न रुका, तब पीएम ने कटाक्ष किया कि अध्यक्ष जी आप उनको कुछ न कहें, रामायण सीरियल के इतने दिनों बाद ऐसी हंसी सुनाई पड़ी है! एक उत्साही मंत्री ने पीएम की तिक्त व्यंजना को शूर्पणखा के वीडिया से खोेल दिया! यहां शूर्पणखा एक रिकार्डेड हंसी हंसती दिखती थी। इसके बाद एक ओर ‘स्त्रीत्ववाद’ बरसता रहा, दूसरी ओर संसदीय मर्यादावाद बरसता रहा!
भाजपा बोली : सांसद अपने अट्टहास पर माफी मांगें! कांग्रेस बोली : पीएम माफी मांगें!मंत्री माफी मांगें! बेचारी ‘माफी’ फिर हर चैनल में रोती रही कि जब चाहे, जो चाहे मुझे मांगता रहता है। मैं क्या फ्री की हूं कि जो चाहे दे देगा। कभी-कभी माफी की इतनी भारी मांग होती है कि आपूर्ति तक नहीं हो पाती। इसीलिए मांगने पर भी किसी को माफी नहीं मिलती!

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