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शख्सियत: महारानी गायत्री देवी

गायत्री देवी ने अपनी तालीम लंदन में ही पूरी की। वो शुरू से थोड़ी विरोधी स्वभाव की थीं। यही कारण है कि पारिवारिक विरोध के बावजूद उन्होंने प्रेम विवाह किया। गायत्री देवी की मुलाकात अपने होने वाले पति सवाई मान सिंह से 19 साल की उम्र में हुई थी। उनके और मान सिंह के बीच उम्र का काफी फासला था। वो मान सिंह की तीसरी पत्नी थीं। प्रसिद्ध ‘वोग’ पत्रिका ने गायत्री देवी को दुनिया की शीर्ष दस सुंदरियों की सूची में शामिल किया था।

Author Published on: May 24, 2020 12:15 AM
राजस्थान की महारानी गायत्री देवी।

महारानी गायत्री देवी पर कई किताबें लिखी गई हैं। इनमें कई तो काफी चर्चित रही हैं। दिलचस्प है कि उनके बारे में लिखते हुए ज्यादातर लेखकों ने सौंदर्य को लेकर अपने ललित बोध का लोहा मनवाने की भरसक कोशिश की है। किसी ने उनके लिए ‘ब्यूटी विद ब्रेन’ की बात कही तो किसी ने प्रसिद्ध कवि लार्ड बायरन की प्रसिद्ध कविता ‘शी वॉक्स इन ब्यूटी’ का जिक्र किया। गायत्री देवी थीं ही ऐसी कि उनसे मिलना तो दूर उनके बारे में बातें करना भी एक सम्मोहन में पड़ने जैसा है। उनके जीवन में आधुनिकता की वो सारी तरोताजगी थी, जिसे जीवन और समाज के आचार व बोध का हिस्सा बनने में लंबा सफर तय करना पड़ा।

उनका जन्म 23 मई 1919 को लंदन में हुआ। उनके पिता कूच बिहार के राजा थे और माता इंदिरा राजे बरोड़ा की मराठा राजकुमारी थीं। गायत्री देवी ने अपनी तालीम लंदन में ही पूरी की। वो शुरू से थोड़ी विरोधी स्वभाव की थीं। यही कारण है कि पारिवारिक विरोध के बावजूद उन्होंने प्रेम विवाह किया। गायत्री देवी की मुलाकात अपने होने वाले पति सवाई मान सिंह से 19 साल की उम्र में हुई थी। उनके और मान सिंह के बीच उम्र का काफी फासला था। वो मान सिंह की तीसरी पत्नी थीं। प्रसिद्ध ‘वोग’ पत्रिका ने गायत्री देवी को दुनिया की शीर्ष दस सुंदरियों की सूची में शामिल किया था।

सवाई मान सिंह से विवाह के बाद गायत्री देवी ने अपने को पूरी तरह राजस्थानी परिवेश और परंपरा में ढाल लिया, पर जिस बात को उन्होंने कभी स्वीकार नहीं किया, वह थी परदा प्रथा। इसी फिक्र के साथ उनके मन में राजस्थान की महिलाओं के लिए कुछ करने का इरादा मजबूत हुआ। 1943 में गायत्री देवी ने राजस्थान में लड़कियों के लिए पहला पब्लिक स्कूल खोला।

उनके जीवन का एक उल्लेखनीय आयाम यह भी है कि वो कभी शाही महल में कैद होकर नहीं रहीं। सामाजिक के साथ राजनीतिक क्षेत्र में वे लगातार सक्रिय रहीं। वो स्वतंत्र पार्टी से जुड़ी थीं और इसकी राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहीं। 1962 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने तकरीबन साढ़े तीन लाख मतों के अंतर से बड़ी जात हासिल की, जो आज भी एक मिसाल है। उस समय गिनीज बुक आॅफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में भी यह कीर्तिमान दर्ज किया गया था। 1962 के अलावा 1967 और 1971 का चुनाव भी उन्होंने बड़े अंतर से जीता। 1967 का साल उनके राजनीतिक जीवन में काफी अहम रहा।

इस साल वो टोंक की मालपुरा विधानसभा सीट से दामोदर लाल व्यास से चुनाव हार गईं। हालांकि इसी साल फिर लोकसभा चुनाव जीतकर उन्होंने अपनी सियासी दमखम और लोकप्रियता का परिचय भी दिया। 1975 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाया तो गायत्री देवी को भी जेल हुई। वे करीब पांच महीनों तक दिल्ली की तिहाड़ जेल में रहीं। इंदिरा गांधी से उनकी प्रतिद्वंद्विता के तो कई किस्से मशहूर हैं।

महारानी की नब्बे साला जिंदगी की किताब का शायद ही कोई पन्ना हो जिसके बारे में जानना दिलचस्प न लगे। पर यह भी विडंबना ही रही कि जो महिला अपने समय में दुनिया की सबसे हसीन महिलाओं की सूची में शामिल रही, जिसका लंबा और सघन राजनीतिक-सामाजिक जीवन रहा, वो आखिरी दिनों में कई तरह के पारिवारिक और दूसरे गमों से घिरती चली गई। महाराजा मान सिंह का 29 जून, 1970 को 57 साल की उम्र में देहांत हो गया। इसके बाद 1997 में 5 फरवरी को उनके इकलौते बेटे जगत सिंह की लंदन में मौत हो गई। गायत्री देवी इन सदमों के साथ जिंदगी में काफी अकेली पड़ती गईं। 29 जुलाई, 2009 को 90 साल की उम्र में उन्होंने आखिरकार इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

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