ताज़ा खबर
 

वक्त की नब्ज: चर्चा कम, तमाशा ज्यादा

शायद वे अंग्रेजी की उस कहावत को ध्यान में रख कर चल रहे हैं कि झूठ को बार-बार बोलने से झूठ सच बन जाता है। आगे बढ़ने से पहले शायद उनको इस बात की तरफ ध्यान देना चाहिए कि नरेंद्र मोदी पर इतना कीचड़ उछालने के बाद भी इस देश के आम आदमी को नहीं लगता है अभी तक कि ‘देश का चौकीदार चोर है’।

Author January 6, 2019 4:12 AM
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लोकसभा में बोलते हुए। (LSTV grab via PTI)

लोकसभा में पिछले हफ्ते रफाल सौदे पर तमाशा ज्यादा हुआ, चर्चा कम। कांग्रेस सांसदों ने वित्तमंत्री का भाषण सुनने के बजाय कागज के जहाज उड़ाए। हंसी-मजाक करते रहे, जैसे स्कूलों में शरारती बच्चे करते हैं। लोकसभा अध्यक्ष ने गंभीर होकर उनसे पूछा कि क्या उन्होंने अपने बचपन में कागज के जहाज काफी उड़ाए थे? क्या अब भी अपने आपको बच्चे समझते हैं? वित्तमंत्री और रक्षामंत्री ने पूरी कोशिश की रफाल सौदे पर उठे सारे सवालों के जवाब देने की, लेकिन ऐसा लगा कि कांग्रेस सांसद सुनने नहीं आए थे। चर्चा की मांग उन्होंने सिर्फ इसलिए की ताकि उनके अध्यक्ष फिर से प्रधानमंत्री पर बेईमान और भ्रष्ट होने के आरोप लगा सकें।

राहुल गांधी ने पत्रकारों को बुला कर फिर से वही बातें दोहराईं, जो कई दिनों से दोहराते आए हैं : देश का चौकीदार चोर है। इस बार उन्होंने युवाओं और किसानों को खास तौर पर संबोधित करते हुए बड़े नाटकीय अंदाज में कहा कि प्रधानमंत्री ने उनसे तीस हजार करोड़ रुपए चुरा कर अपने दोस्त अनिल अंबानी को दिए हैं। मैं इस पत्रकार वार्ता को टीवी पर देख रही थी, इस उम्मीद से कि कम से कम एक पत्रकार राहुल गांधी से इस आरोप का सबूत मांगेगा। पर किसी ने सवाल उठाने की हिम्मत नहीं दिखाई। उलटा कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया स्मिता प्रकाश पर कि उनको प्रधानमंत्री ने इस वर्ष का पहला इंटरव्यू सिर्फ इसलिए दिया था, क्योंकि वे जानते थे कि मुश्किल सवाल उनसे नहीं पूछेंगे। गलत। मैंने स्मिता का यह इंटरव्यू शुरू से अंत तक देखा और कई बार हैरान हुई यह देख कर कि बेबाक होकर कठिन सवाल उसने पूछे, जो शायद पहले कभी प्रधानमंत्री से नहीं पूछे गए हैं। नोटबंदी, किसानों की कर्जमाफी, हाल में हुए तीन राज्यों के चुनावों में भाजपा की हार, रफाल सौदे और जीएसटी पर भी। सो, राहुल गांधी का यह आरोप बिल्कुल बेबुनियाद था। ऐसा लगने लगा है कि कांग्रेस अध्यक्ष ने आदत डाल ली है बेबुनियाद इल्जाम लगाने की।

पहले से थी उनको यह आदत। 2014 के चुनाव अभियान में उन्होंने अरविंद केजरीवाल के साथ जैसे समझौता करके अपने हर भाषण में कहा था कि मोदी राजनीति में सिर्फ ‘अंबानी-अडानी’ के लिए काम करने के लिए आए हैं। नोटबंदी जब मोदी ने की तो फिर से उन्होंने कहा कि भारत के आम जनता से पैसे ‘लूट’ कर मोदी अपने धनवान दोस्तों को दे रहे हैं। लेकिन अब इस तरह के आरोप उनके मुंह से और भी ज्यादा निकलने लगे हैं, क्योंकि अपने राजनीतिक जीवन में पहली बार महत्त्वपूर्ण राज्यों में चुनाव जीतने के बाद कई राजनीतिक पंडित कहने लगे हैं कि इस साल होने वाले आम चुनावों में मोदी को चुनौती सिर्फ राहुल गांधी दे सकते हैं। देश के सबसे पुराने, सबसे शक्तिशाली राजनीतिक परिवार के इस वारिस की तस्वीर कई राजनीतिक पत्रिकाओं के कवर पर छपी है। प्रसिद्ध राजनीतिक पंडितों ने लंबे लेख लिखे हैं, जिनमें उन्होंने राहुल के परिवार के गुण गाए हैं, उनकी राजनीतिक विरासत की प्रशंसा की है। ऐसा होने से राहुल के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि प्रधानमंत्री पर हुकुम चलाने लगे हैं। संसद में आओ और मेरे साथ बहस करने की हिम्मत दिखाओ। संसद से भाग क्यों गए हैं प्रधानमंत्री। ऐसी बातें उनसे अब रोज सुनने को मिलती हैं।

वे शायद भूल गए हैं कि राजनीति में मर्यादा होती है, और जब कोई विपक्ष का नेता देश के प्रधानमंत्री को इस तरह बदनाम करने की कोशिश करता है तो बदनाम देश को भी करता है। प्रधानमंत्री पद की गरिमा को कम करता है। और ऐसा करके अपने आपको भी नीचा दिखाता है।  कांग्रेस अध्यक्ष हवा में इतना घूमने लगे हैं इन दिनों कि उनको यह भी नहीं दिखता कि रफाल सौदे और बोफोर्स सौदे में बहुत बड़ा अंतर है। उनके पिताजी को चोर उस समय कहा गया, जब साबित किया स्वीडिश रेडियो के खोजी पत्रकारों ने कि बोफोर्स कंपनी ने अपने हथियार बेचने के लिए भारत सरकार के आला अधिकारियों को रिश्वत दी थी। जब बोफोर्स के नुमाइंदे दिल्ली आए स्पष्ट करने उन तमाम अधिकारियों और दलालों के नाम, जिनको रिश्वत दी गई थी तो राजीव गांधी ने इन नामों को सार्वजनिक करने से इंकार किया राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर। बाद में मेरी दोस्त चित्रा सुब्रमण्यम की खोजी पत्रकारिता से मालूम हुआ कि रिश्वत का पैसा पाया गया है सोनिया गांधी के दोस्त ओक्तावियो क्वात्रोकी और उनकी पत्नी मारिया के स्विस खातों में। क्वात्रोकी भारत में थे जब बैंक खातों का खुलासा हुआ और उसी दिन रातों-रात भाग गए। सोनिया गांधी के चुने हुए प्रधानमंत्री नरसिंह राव कैसे रोकते सोनिया गांधी के दोस्त को? जिस दिन राहुल गांधी साबित करके दिखाएंगे कि नरेंद्र मोदी के किसी दोस्त के स्विस खाते में रफाल का रिश्वत का पैसा पाया गया है, उस दिन उनको पूरा अधिकार होगा ‘देश का चौकीदार चोर है’ कहने का। तब तक उस पद की गरिमा कायम रखें, जिस पर वे खुद बैठना चाहते हैं अगले आम चुनावों के बाद। या शायद वे अंग्रेजी की उस कहावत को ध्यान में रख कर चल रहे हैं कि झूठ को बार-बार बोलने से झूठ सच बन जाता है। आगे बढ़ने से पहले शायद उनको इस बात की तरफ ध्यान देना चाहिए कि नरेंद्र मोदी पर इतना कीचड़ उछालने के बाद भी इस देश के आम आदमी को नहीं लगता है अभी तक कि ‘देश का चौकीदार चोर है’। नुकसान हुआ है अगर किसी का तो कांग्रेस अध्यक्ष का, क्योंकि उन्होंने एक अति-गंभीर मुद्दे का तमाशा बना दिया है बचकानी बातें करके। कसर था कोई तो पिछले हफ़्ते पूरा किया लोकसभा के अंदर कागज के जहाज उड़ा कर।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App