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तीरंदाज: इतिहास में गधे

हर तरफ से गधों की पुन: इतिहास लिखने की जुर्रत पर वार होने लगा था। पर गधे अड़ गए। पीपल वाले ने इन तत्त्वों के खिलाफ दुलत्ती अभियान छेड़ दिया। उपद्रव इतना बढ़ा कि दूर जंगल में सो रहा शेर जाग गया।

dog, tiger, crime, crime newsकुत्ते के साथ इस तरह का व्यवहार किये जाने का कई लोगों ने विरोध किया है। फोटो सोर्स – फेसबुक, Malaysia Animal Association

भरी दुपहरी में एक गधा गांव के बाहर पीपल की छांव में खड़ा हवाखोरी कर रहा था। उसका पुराना मालिक, गांव का धोबी, ऐसी हवा को लू कह कर चिड़चिड़ा जाता था और दो-एक संटियां उसको रसीद कर देता था। गरमी उसे भी लगती थी, पर इतनी नहीं कि वह परेशान हो जाए। यह उसको कभी समझ में नहीं आया था कि आदमजात इतनी जल्दी क्यों हाय-तौबा मचाने लगती है।

पर आज उसको धोबी की चिंता बिलकुल नहीं थी। धोबी ने मोटरसाइकिल खरीद ली थी, जिस पर कपड़े लाद कर घाट ले जाता था और धो-सुखा कर वापस लाता था। धोबी ने गधे को छुट्टा कर दिया था। वह निठल्ला हो गया था। पीपल के नीचे खड़ा लू का मजा ले रहा था।

पेड़ से कुछ दूरी पर एक नाला था। गांव वाले अपना गंदा पानी उसके जरिए नदी को समर्पित करते थे। नदी चाहे कितनी भी सूख जाए, पर गांव वाले गंदा पानी पूरी मात्रा में बहाते थे। इसीलिए नाले के पास घास हमेशा हरी रहती थी। पहली बार एक और गधा उसे वहां ले गया था। वह ईंट के भट्ठे पर काम करता था। उसके मालिक ने ईंटे ढोने के लिए ट्रैक्टर ट्राली ले ली थी। वह भी अब निठल्ला था और सारे निठल्ले गधे नाले पर चरने आते थे। नाले पर चरते-चरते गधों में आपसदारी बन चुकी थी, इसलिए उन्होंने अपना वाट्स ऐप्प ग्रुप भी बना लिया था। सुबह एक-दूसरे को गुड मॉर्निंग डालते थे और संध्या को गुड नाइट। दिन में चर्चा में जुटे रहते थे। कामकाजी तो थे नहीं, पर विचारशील जरूर थे। जल्द ही वे गधा समाज के चिंतक बन गए थे।

पीपल वाला गधा और गधों के मुकाबले थोड़ा हृष्ट-पुष्ट था। अच्छी सेहत की वजह से ढेंचू-ढेंचू भी इतनी जोर से कर लेता था कि नाले की मछलियां हड़बड़ा कर इधर-उधर भागने लगती थीं। वाट्स ऐेप्प ग्रुप वालों ने पीपल वाले की योग्यताओं को स्वीकार कर ग्रुप की कमान उसके हाथ में दे दी थी। हमारा गधा गधों का लीडर बन गया था।

पीपल के पेड़ पर रहने वाले एक पक्षी से लीडर गधा काफी सतर्क रहता था। वह दिन में सोता था और सारी रात उसे घूरता था। रात के सन्नाटे में डाल पर बैठे पक्षी का इस तरह लगातार घूरना गधे को विचलित कर देता था। जैसे ही उसको झपकी लगती, उसको लगता था कि पक्षी की आंखें उसके सिर पर पंजों की तरह गड़ी हुई हैं। उसका सपना टूट जाता था।

एक दिन उसने आवारा कुत्तों से उसके बारे में पूछा। गधे से उनकी अच्छी दोस्ती हो चुकी थी। गधा जब वाट्स ऐप्प ग्रुप का नेता बना था, तो उन्होंने उसे बहुत चाटा था। एक तो खुशी में भौंकने भी लगा था, पर जैसे ही गधे ने जमीन में खुर मारा था, वह दुम दबा कर पीपल के पीछे छिप गया था। खैर, जब गधे ने पक्षी के बारे में पूछा, तो बड़े कुत्ते ने बताया कि पक्षी की उड़ान चौतरफा थी। वह रात में निकल कर दूर-दूर का मुआयना करता था।

बोलता बहुत कम था, पर जानता बहुत कुछ था। जब वह आपको देखता है, कुत्ते ने बताया, तो आपकी खोपड़ी को पढ़ रहा होता है। कौन है यह, गधे ने उत्सुकता से पूछा था। उसमें समझ है, इसलिए लोग उसे उल्लू कहते हैं। गधा सिहर गया था। समझ खतरनाक होती है। कहीं बैठा-बैठा वह पक्षी उसका उल्लू तो नहीं काट रहा था?

पीपल वाला अब सिर्फ गधा नहीं था, बल्कि गधा वाट्स ऐप्प ग्रुप का लीडर था। लीडर गधा उल्लू की निगहबानी कबूल नहीं कर सकता था। उसने आवारा कुत्तों को काम में लगा दिया। कुत्ते अपने आवारापन को मौज लेना कहते थे। वे उल्लू से मौज लेने लगे। भौंक-भौंक के उन्होंने उसको उड़ा दिया। उल्लू नदी पार बरगद पर जा बसा, पर हर रात चुपचाप आकर गधे का मूल्यांकन कर जाता था।

शनै: शनै: गधा वाट्स ऐप्प ग्रुप की प्रसिद्धि सुदूर पहाड़ी बकरी नेटवर्क से लेकर समुंदर मछली वेब तक पहुंच गई थी। सभी अचंभित थे कि एक गधा हर नेटवर्क पर कैसे काबिज हो गया था। वे उसकी प्रतिभा पर मंत्रमुग्ध हो गए थे। वे गधे की दुम हो गए थे। ऐसी दुम, जिसके एक थपेड़े से मनुष्य जाति धूल चाट सकती थी। पीपल वाले गधे ने यह बात कही भी थी। पर यह उसकी भलमनसाहत थी कि उसने दुम हिलना बंद कर दिया था। दुल्लती से काम चलाता था। वाट्स ऐप्प ग्रुप वाले कहते थे कि उसने दुल्लत्ती से कइयों के कूबड़ ठीक कर दिए थे। वह दुल्लती मास्टर हो गया था।

पीपल वाला गधा अपने बृहद वाट्स ऐप्प समुदाय को कोई विशेष उपलब्धि देना चाहता था। एक दिन तेज धूप में कई घंटे बिताने के बाद उसके दिमाग की बत्ती जल गई थी। उसको याद आया कि धोबी अपने बेटे को गधे का बच्चा अक्सर कह देता था। अपनी बिटिया से कई बार हंसते हुए उसने कहा था- तेरी तो मैं किसी गधे से शादी कराऊंगा। यह सब कहने का मतलब, गधे ने तर्क लगाया, यह हुआ कि मनुष्य जाति गधों को अपने से बेहतर मानती है। पर गधा-इतिहास में उनकी श्रेष्ठता का जरा भी जिक्र नहीं था। बल्कि उलटे इतिहासकारों ने हीन भाव ही प्रचलित किया था। गधों के साथ उन्होंने बहुत गलत किया था। उनकी श्रेष्ठता को दबा कर उनको दीनता का प्रतीक बना दिया था।

पीपल वाले ने अपने ग्रुप के कर्मठ सदस्यों को मैसेजखोरी में जुटा दिया था। एक ने लंबा मैसेज डाला, जिसमें उसने बताया कि किस तरह मानव जाति पूर्व इतिहास से ही गधों पर आश्रित थी। सारे युद्ध मानुषों ने खच्चर पलटन के बल पर जीते थे। जिस राजा के पास बलिष्ठ गधे नहीं थे उसकी सेना भूखों मर गई थी। यहां तक कि मनुष्य साफ कपड़े भी गधों की बदौलत पहनते थे। धोबी धोबी न होता, अगर उसके साथ गधा न होता। मनुष्य गधों के प्रति इतना कृतज्ञ थे कि अमूमन वे अपने प्रियजनों को अपना न कह कर गधे का भी बताते थे। वास्तव में मनुष्य नहीं, बल्कि गधा सृष्टि का सर्वोच्च प्राणी था। मनुष्यों ने साजिश के तहत मिथ्या प्रचार कर उनसे श्रेष्ठता की पदवी छीन ली थी।

मैसेज तुरंत वायरल हो गया था। इतिहास बदलने का क्षण आ गया था। गधा झुंड अपनी जयजयकार करने लगा था। उधर सुअरों में हड़कंप मच गई थी। कुत्ते भी आंदोलित हो उठे थे। गधे श्रेष्ठता का श्रेय गलत ले रहे थे। मनुष्य लाड़ में एक-दूसरे को अक्सर उनके नाम से पहले जोड़ते थे। सब अपने दावे लेकर प्रस्तुत हो गए थे। वृहद वाट्स ऐप्प ग्रुप चटकने लगा था।

पहले सुअरों ने अपने को ग्रुप से डिलीट किया, फिर कुत्तों ने। हर तरफ से गधों की पुन: इतिहास लिखने की जुर्रत पर वार होने लगा था। पर गधे अड़ गए। पीपल वाले ने इन तत्त्वों के खिलाफ दुलत्ती अभियान छेड़ दिया। उपद्रव इतना बढ़ा कि दूर जंगल में सो रहा शेर जाग गया।

अरे, उसने बंदर से कहा, मनुष्य अपने को शेर का बच्चा कह कर गौरवान्वित महसूस करते हैं। इतिहास इस बात का गवाह है। ये गधे किस खेत की मूली हैं, जो अपना कनेक्शन जोड़ रहे हैं? बंदर ने गधों से बात की, पर वे नहीं माने थे। अंतत: शेर उठ कर नाले पर पहुंच गया। उसके थोड़े से गुर्राने से ही वाट्स ऐप्प ग्रुप तुरंत भंग हो गया था। गधों को नाला क्षेत्र भी त्यागना पड़ा था। पीपल वाला मुंह लटकाए घाट पर लौट गया था। आवारा कुत्ते उस पर कभी-कभी भौंक कर मौज ले लेते थे। पीपल की छांव में लीडरी में गुजारे हुए दिन उसे बहुत याद आते थे। वे इतिहास हो गए थे।

उधर, दूर बरगद पर बैठे हुए उल्लू ने अफसोस से अपना सिर हिलाया था। संदर्भ, मूर्खो, सबसे जरूरी है। संदर्भ के बिना इतिहास उपहास है, उसने कहा था और आराम से सो गया था।

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