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वक़्त की नब्ज़: अपना पक्ष रखना जरूरी है

मोदी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए दुनिया के सामने साबित करना कि अनुच्छेद 370 को हटाए बिना कश्मीर घाटी से जिहादी आतंकवाद को रोकना तकरीबन असंभव था। जिहादी आतंकवाद और जिहादी सोच सिर्फ भारत के लिए समस्या नहीं है, पूरी दुनिया के लिए है।

Author Published on: November 3, 2019 1:27 AM
pm modiपीएम मोदी (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस फाइल फोटो)

तवलीन सिंह

कुछ बातें हैं, जो हम ‘सेक्युलर’ मिजाज के पत्रकार कहने से डरते हैं, खासकर हिंदुत्व के इस दौर में। मिसाल के तौर पर अकबरुद्दीन ओवैसी ने जब हिंदुओं का मजाक उड़ाया हाल में दिए गए एक भाषण में, तो उसको हमने अनसुना कर दिया। निजी तौर पर मुझे बहुत तकलीफ हुई जब हैदराबाद के इस आला राजनेता ने कहा कि ‘कितने खुदा हैं इनके, रोज एक नया खुदा पैदा कर देते हैं न’। मगर मैंने भी इस भाषण के बारे में नहीं लिखा। आज भी शायद उन दो वीडियो क्लिप को देख कर चुप ही रहती, जो मैंने पिछले हफ्ते सोशल मीडिया पर देखे थे। जिक्र अगर उनका कर रही हूं तो सिर्फ इसलिए कि उनका सीधा रिश्ता है जम्मू-कश्मीर से। पहला वीडियो पाकिस्तान का है। इसमें दिखते हैं छोटे बच्चे, जो एक लाइन में खड़े होकर अपने से थोड़े बड़े बच्चे को मुस्कुरा कर गले मिल रहे हैं। यह बच्चा फिर अपने आप को नकली मानव बम बना कर गिर पड़ता है बच्चों से थोड़ी दूर जाकर। बैकग्राउंड में सुनाई देती हैं कुरान की आयतें।

दूसरा वीडियो इराक से था, जिसको बनाया गया था अबु बकर अल-बगदादी की हत्या के अगले दिन। इसमें दिखती हैं काले बुर्कों में कई सारी औरतें, जिनकी सिर्फ आंखें दिखती हैं, क्योंकि उन्होंने अपने हाथों को भी काले दस्तानों से ढक कर रखा है। ये औरतें मातम करती हैं बगदादी के लिए, यह कहते हुए कि उनको यकीन है कि नया खलीफा आएगा बगदादी की जगह लेने, क्योंकि अल्लाह की मर्जी है कि दुनिया में एक भी काफिर जिंदा न रहे। कश्मीर से रिश्ता यह है कि इस किस्म का इस्लाम काफी सालों से फैलने लगा है कश्मीर घाटी में और इतना प्रभाव रहा है इसका कि घाटी का मजहबी चेहरा भी बदल गया है और ‘आजादी’ की लड़ाई का मकसद भी। अब मकसद आजादी नहीं है, मकसद बन गया है कश्मीर घाटी में शरीअत नाफिस करना। कहने की जरूरत नहीं, लेकिन कहना जरूरी भी है कि भारत किसी हाल में अपनी भूमि पर एक इस्लामी खिलाफत को कायम होने नहीं दे सकता है।

समस्या यह है कि बहुत सालों से इसके लिए जिहाद चल रही है कश्मीर घाटी में और इसको न कश्मीरी राजनेता रोक सके हैं, न दिल्ली के राजनेता। पिछले हफ्ते जिस दिन जम्मू-कश्मीर का राज्य होना कानूनी तौर पर हटाया गया, कांग्रेस के वरिष्ठ कश्मीरी राजनेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कश्मीर समस्या पैदा हुई है सिर्फ 2014 के बाद। यानी दोष सारा नरेंद्र मोदी का है। झूठ है यह। आजाद साहब अच्छी तरह जानते हैं कि कश्मीर समस्या 1947 में पैदा हुई थी और जिंदा रही है आज तक कांग्रेसी प्रधानमंत्रियों की गलत नीतियों के कारण। मोदी की गलती सिर्फ एक है कि उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद उसको हटाने के कारण दुनिया के सामने नहीं रखे हैं। दुनिया के बड़े राजनेताओं को समझाने की खुल कर कोशिश नहीं की है कि वर्तमान स्थिति यह है कश्मीर घाटी में कि आइएसआइएस किस्म की खिलाफत कायम करने की कोशिश कर रहे हैं जिहादी आतंकवादी।

ऐसा करने के बदले पांच अगस्त के बाद मोदी सरकर का ध्यान ज्यादातर अटका रहा है इस बात को साबित करने में कि अब कश्मीर घाटी में हालात बिलकुल ‘नॉर्मल’ या सामान्य हो गए हैं और आम लोग बहुत खुश हैं, उनके राज्य की बदली हुई स्थिति को देख कर। इस झूठ को सच साबित करने के मकसद से यूरोप के कुछ सांसदों को कश्मीर ले जाया गया पिछले हफ्ते। वहां से लौटने के बाद उनमें से कई थे, जिन्होंने कहा कि उनको अगर घाटी का दौरा करने की इजाजत मिली है, तो भारत के विपक्षी राजनेताओं को भी मिलनी चाहिए। कइयों ने स्वीकार किया कि अनुच्छेद 370 को हटाना भारत का अंदरूनी मामला है, लेकिन यह भी कहा कि कश्मीर के राजनेताओं को इतने महीने नजरबंद रखना ठीक नहीं है। ऊपर से अपने देश के मीडिया में सवाल उठने लगे हैं कि इस यूरोपीय पर्यटन के लिए पैसे किसने दिए थे। इस तरह की कोशिशें अक्सर नाकाम रहती हैं इस दौर में, जब सोशल मीडिया पर आम इंसान अपनी बातें रख सकते हैं जब चाहें।

दुनिया जानती है कि कश्मीर घाटी में अभी तक स्थिति सामान्य नहीं है। दुनिया जानती है कि वहां के तकरीबन सारे बड़े राजनेता अभी तक नजरबंद हैं। दुनिया जानती है कि घाटी में तीन महीनों से बच्चे स्कूल नहीं जा पाए हैं। दुनिया जानती है कि कश्मीर में हर दूसरे दिन कर्फ्यू लग जाता है। दुनिया जानती है कि सेल फोन सेवाओं से अभी तक ज्यादातर लोग वंचित रखे गए हैं। दुनिया यह भी जानती है कि घाटी के कई हिस्सों में अभी तक जिहादी संस्थाओं का बोलबाला है। यही कारण है कि बाहर से आए मजदूरों की निर्मम हत्याएं हुई थीं हाल में, ताकी खौफ का माहौल बना रहे।

सो, मोदी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए दुनिया के सामने साबित करना कि अनुच्छेद 370 को हटाए बिना कश्मीर घाटी से जिहादी आतंकवाद को रोकना तकरीबन असंभव था। जिहादी आतंकवाद और जिहादी सोच सिर्फ भारत के लिए समस्या नहीं है, पूरी दुनिया के लिए है। भारत सरकार ने अपना पक्ष अभी तक पूरी तरह रखा नहीं है, सो फिलहाल पाकिस्तान बाजी जीत रहा है।

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