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वक्त़ की नब्ज़: अमन की कोशिशें तेज हों

इस विशेष दर्जे के कारण कश्मीरी अपने आप को भारत से अलग समझते रहे हैं। भारतीयों को बुरा लगता है जब घाटी में जाते हैं और वहां के लोग उनसे पूछते हैं ‘क्या आप इंडिया से आए हैं?’

Author Published on: September 1, 2019 1:24 AM
पीएम मोदी। (एक्सप्रेस फाइल फोटो/Renuka Puri)

तवलीन सिंह

इस लेख को लिखने बैठी ही थी कि बीबीसी पर खबर आई कि कश्मीर घाटी में हर किस्म का जुल्म ढाया जा रहा है आम बेगुनाह लोगों पर। इस खबर के मुताबिक छोटे बच्चों को गिरफ्तार करके प्रताड़ित किया जा रहा है। इस खबर को हजम कर ही रही थी कि इमरान खान का भाषण सुना, जिसमें उन्होंने ‘हमारे कश्मीरियों पर जुल्म’ की बात दोहराई। वादा किया कि जब तक कश्मीर आजाद नहीं होता है तब तक वे हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर कश्मीर के लिए लड़ाई लड़ते रहेंगे। नरेंद्र मोदी की तुलना इस भाषण में उन्होंने हिटलर से की और आरएसएस की सोच को नाजी सोच से प्रभावित बताया।

इस भाषण से एक दिन पहले मेरे एक पाकिस्तानी दोस्त ने मुझे कुछ तस्वीरें भेजीं वाट्स ऐप पर। एक तस्वीर में लाशों के ढेर लगे हुए हैं हथियारबंद सिपाहियों के सामने। दूसरी तस्वीर में वर्दी वाले सिपाही जख्मी आदमी को सड़क पर घसीट रहे हैं जैसे जानवर हों। वर्दियों को देखा, मुझे साफ दिखा कि ये न भारतीय पुलिस के लोग थे और न भारतीय सेना के। लेकिन ऐसी झूठी खबरों को अनदेखा इसलिए नहीं किया जा सकता, क्योंकि अगर नरेंद्र मोदी कश्मीर घाटी का दिल जीतना चाहते हैं, तो उनको सावधान हो जाना चाहिए कि इस तरह के गलत प्रचार की परंपरा पुरानी है घाटी में।
याद है मुझे कि जब आजादी आंदोलन का नेतृत्व पाकिस्तान ने अपनी जिहादी तंजीमों द्वारा अपने हाथ में ले ली थी नब्बे के दशक में, तो उस समय भी इस तरह का झूठा प्रचार किया जाता था बहुत बड़े पैमाने पर। दूर-दराज गांवों से खबर पहुंचा करती थी श्रीनगर तशदुत की और हम पत्रकार दौड़े-दौड़े जाया करते थे यथार्थ जानने और मालूम पड़ता था कि खबर बिलकुल झूठी थी। एक बार बीबीसी के सतीश जैकब के साथ मैं बारामुला के पास एक छोटे गांव में पहुंची, जहां से खबर मिली थी औरतों के सामूहिक बलात्कार की। देर शाम को हम इस गांव में पहुंचे और उन महिलाओं से मिलने की इच्छा व्यक्त की, जिनके साथ यह जुल्म हुआ था।

कई महिलाओं को हमारे सामने पेश किया गया, जिन्होंने हंसते-मुस्कराते बताया कि उनकी भी ‘बेज्जती’ की थी ‘इंडिया के सिपाहियों ने’। उनके रवैए से साफ जाहिर था कि झूठ बोल रही थीं। इतने में एक नौजवान पहुंचा वहां, जो न कश्मीरी था और न ही इस गांव का वासी। जीन्स और स्नीकर उसने पहने हुए थे और अच्छी अंग्रेजी बोलता था। इस नौजवान ने जल्दी साबित कर दिया कि इस नाटक का निर्देशक वही था। वह कौन था, मैं नहीं जानती।

इस तरह का गलत प्रचार अगर फिर से शुरू हो गया है घाटी में, तो न शांति आने वाली है निकट भविष्य में और न ही मोदी कश्मीरियों के दिल जीतने में कामयाब होंगे। आखिर कब तक कर्फ्यू लगा रहेगा घाटी में? कब तक लोगों को मोबाइल फोन सेवाओं से वंचित रखा जा सकता है? एक पूरा महीना होने को आ रहा है अनुछेद 370 हटाए जाने के बाद और अभी तक शांति बहाल करने के बहाने लोगों को अपने घरों में बंद करके रखा है। इतना घबराए हुए दिख रहे हैं कश्मीर के प्रशासक कि पिछले हफ्ते एक डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया गया था सिर्फ इसलिए कि वह ध्यान दिलाना चाह रहा था कि स्वास्थ्य सेवाओं को कितना नुकसान हुआ है कर्फ्यू लगने के बाद। एक अमेरिकी अखबार ने तो यहां तक कहा है कि कश्मीर में अस्पताल बन गए हैं कब्रिस्तान।

इधर कश्मीर के राज्यपाल हैं, जो हर दूसरे दिन लंबे-चौड़े इंटरव्यू दे रहे हैं, जिनमें विकास के वादे कर रहे हैं, पचास हजार सरकारी नौकरियां खोलने के वादे कर रहे हैं, सम्मेलन बुला रहे हैं अगले महीने श्रीनगर में देश के बड़े उद्योगपतियों का, यह दिखाने के लिए कि अनुछेद 370 हटने के बाद कितना परिवर्तन आने वाला है कश्मीर घाटी में। क्या जानते नहीं हैं गवर्नर साहब कि उनकी हर कोशिश नाकाम रहेगी जब तक कर्फ्यू रहता है घाटी में और कश्मीरी लोगों की आवाजें हम सुन नहीं पाते हैं। क्या जानते नहीं हैं कि इस कर्फ्यू का सबसे ज्यादा फायदा पाकिस्तान ले रहा है दुनिया को यह कह कर कि एक महीने से अस्सी लाख कश्मीरी अपने घरों में बंद कर दिए गए हैं?

इसमें कोई शक नहीं कि कश्मीर का विशेष दर्जा हटा कर प्रधानमंत्री ने तुरुप का पत्ता खेला है। अधिकतर भारतीय खुश हैं, इसलिए कि उनको यकीन है कि इस विशेष दर्जे के कारण कश्मीरी अपने आप को भारत से अलग समझते रहे हैं। भारतीयों को बुरा लगता है जब घाटी में जाते हैं और वहां के लोग उनसे पूछते हैं ‘क्या आप इंडिया से आए हैं?’ विशेष दर्जा ही कारण रहा है अलगावादी संस्थाओं के हौसले बुलंद रहने का, सो अच्छा हुआ कि उसको संसद के मत से हटा दिया गया है। मगर अब क्या रणनीति है मोदी सरकार की घाटी में असली शांति लाने की? रणनीति है अगर तो यह समय नहीं है उसको छिपा कर रखने का। यह समय है उसका खुल कर प्रचार करने का, वरना पाकिस्तान अगली बाजी जीत सकता है।

इमरान खान के तेवर देख कर ऐसा लगने लगा है कि पाकिस्तान युद्ध की तैयारी में लग गया है। इमरान खान ने अपने हर भाषण में धमकी दी है युद्ध की और यह भी कहा है कि युद्ध होगा, तो सारी दुनिया पर इसका असर पड़ेगा। यानी परमाणु हथियार भी इस युद्ध में इस्तेमाल कर सकता है पाकिस्तान। भारत अगर युद्ध नहीं चाहता है, तो प्रधानमंत्री की प्राथमिकता आज होनी चाहिए कश्मीर घाटी में शांति लाना। समस्या गंभीर है और कर्फ्यू के परदे के पीछे से दिखने लगी है।

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