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बाखबर: डर से डर तक

पिछले कई दिन से अपने देश की ‘जनता’ बिलबिलाती दिखती है। कारण है ‘मोटर वाहन सुरक्षा कानून’ का लागू होना। अमल में आते ही यह कानून बड़ी-बड़ी खबरें बना रहा है : बीस हजार की गाड़ी पर छब्बीस हजार का चालान!

Author Published on: September 15, 2019 2:26 AM
1 सितंबर से देशबर में नई वाहन चालान नीति लागू हो चुकी है। (Photo: Indian Express)

तबरेज को किसी ने नहीं मारा। वह अपने आप मरा। दिल का कमजोर था। लोगों का बहुत-सा ‘प्यार’ बर्दाश्त न कर सका। दिल के दौरे से मर गया। तबरेज की हत्या संबंधी खबर का ‘डिकंस्ट्रक्शन’ करते-करते हमने तो यही पाया कि इन दिनों ‘मरने वाला’ बड़ा ही दुष्ट होता है। निरीह मारने वालों का नाम बदनाम करके खुद मर जाता है। बेकार में जांच करानी पड़ती है और उसे देर-सबेर ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ करना पड़ता है और अंत में मरने वाले को ही गिरफ्तार करना पड़ता है!

कई भक्त एंकरों को भी देशद्रोह का दौरा पड़ जाता है और वे भी बड़बड़ाने लगते हैं कि तबरेज को मारा गया। पांच डॉक्टरों वाली रिपोर्ट दिखा-दिखा कर कहने लगते हैं कि उसकी हत्या की गई थी। कई एंकर कुछ पंचों के बीच बहस करा कर दो-चार आंसू भी गिराने लगते हैं और तबरेज की पत्नी को कैमरे में कहते दिखाते रहते हैं कि पहले 302 का केस था अब 304 का कर दिया गया है। एक युवा वकील बताने लगता है कि 302 के माने फांसी या आजीवन कारावास और 304 का मतलब दस साल की जेल!

यकीन करें, एक दिन न्याय अवश्य मिलना है! मारने वालों को बरी होना है! मरने वाले को अपनी मौत का जिम्मेदार होना है! अब देखिए न, कई चैनल पूर्व राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद के पीछे पड़े हैं। कानून की एक छात्रा ने उन पर आरोप लगाया है कि वे बलात्कारी हैं। छात्रा कई चैनलों में आकर प्रमाण के रूप में वीडियो टेपों के होने का दावा कर चुकी है। एंकर शिकायत कर रहे हैं कि पुलिस उनको गिरफ्तार क्यों नहीं कर रही?

क्या बकते हो यारो! देखते नहीं कि वे पूर्व मंत्री हैं और फिर इन दिनों तो आरोप लगाने वाला ही असली दोषी होता है! बहरहाल, एक दिन जब ‘नापाक पाक’ ने ‘टुकड़े टुकड़े गैंग’ और राहुल के बयानों को उद्धृत कर यूएन में मुकदमा कर दिया, तो हमारे कई एंकरों को राहुल पर बहुत गुस्सा आया। वह तो हमारी विदेश प्रतिनिधि ने यूएन में सारे आरोपों का करारा जवाब दिया, तब जाकर एंकरों को कुछ तोष हुआ। इसी क्रम में पाकिस्तान के मंत्री शाह महमूद कुरैशी के एक बयान ने हमारी देशभक्ति के आनंद को दोगुना कर दिया। अपने कई चैनलों को पाकिस्तान के शाह कुरैशी के उस बयान का वीडियो हाथ लग गया, जिसे वे दिन भर चहक-चहक कर बजाते रहे कि देखो, अब तो पाकिस्ताान ने भी मान लिया कि कश्मीर भारत का है। वीडियो में शाह कुरैशी कश्मीर को ‘इंडियन स्टेट आॅफ’ कश्मीर बताए जा रहे थे।

शायद इसी से उत्साहित होकर एक दिन अचानक हमारे सेनापति जी कहने लगे कि आदेश हो तो अब ‘पीओके’ को भी ले लें। हम तैयार हैं। बस आपके आदेश की प्रतीक्षा है!  लेकिन कांग्रेस के नेताआें को इतने पर भी देशभक्ति का जोश न आया और एक नेता तो ‘देशभक्ति’ के इस जोश पर ही पानी डालने लगे कि सरजी युद्धोन्माद क्यों पैदा कर रहे हो?

बताइए, ऐसे कायरपन को लेकर हमारे एंकर नाराज न हों तो कौन हो? इसीलिए वे कोसने लगे कि ओ टुकड़े टुकड़े गैंग वालो! देशद्रोहियो! राष्ट्रद्रोहियो! कांग्रसियो! बताओ, तुम किसके साथ हो? इमरान के साथ कि हमारे? जल्दी बताओ! कहां है वो राहुल।…
एक भक्त एंकर अपने हाथ का पंजा दिखा कर देर रात तक चीखता रहा- ये पाकिस्तान क्या है? एक मच्छर है, जब चाहें ‘हिट’ से हिटहिटा देंगे। बस आदेश का इंतजार है!
वृहस्पतिवार की शाम एक आनंददायी खबर टूटी कि अब कांग्रेस में भी ‘प्रेरक’और ‘प्रचारक’ भाई हुआ करेंगे’! ऐसी मजेदार खबर के बे्रक होते ही एंकरों के चेहरों पर चमक आ गई। कई तो संघ के ‘एक्सपर्ट’ बन गए और बताने लगे कि किस तरह अब कांग्रेस में भी संघ की तर्ज पर ‘प्रेरक’ होंगे, ‘प्रचारक’ होंगे, ‘बूथ इनचार्ज’ होंगे। ये होगा, वो होगा, देखा! इसे कहते हैं : संघम् शरणम् गच्छामि!
चैनल भी क्या करें? कांग्रेस उनको लिफ्ट ही नहीं देती। इसीलिए सोनिया राहुल के पुराने स्टाक फुटेज दिखाते रहते हैं, यानी वही कि जिनमें सोनिया नीली साड़ी में आ-जा रही हैं। कुछ बाद में राहुल और उनके पीछे प्रियंका आ-जा रहे होते हैं।
पिछले कई दिन से अपने देश की ‘जनता’ तक बिलबिलाती दिखती है। कारण है ‘मोटर वाहन सुरक्षा कानून’ का लागू होना। अमल में आते ही यह कानून बड़ी-बड़ी खबरें बना रहा है : बीस हजार की गाड़ी पर छब्बीस हजार का चालान! चालान के डर से एक कार चालक को हार्ट अटैक! पटना में जनता और पुलिस में भिड़ंत! गुजरात, झारख्ांड, महाराष्ट्र ने कानून को ज्यों का त्यों लागू न करने की बात की। राजस्थान जुर्माना कम करने की बाबत सोच रहा है।
बहसों में अपनी जनता की कुछ विशेषताएं भी प्रकट हुर्इं, जैसे कि इस जनता को जब तक डंडा न दिखाओ, तब तक वह नहीं मानती। ट्रैफिक रूल तोड़ कर मरने में उसे बड़ा मजा आता है। लेकिन हमें तो जनता की परवाह है। हम उसे ऐसे कैसे मरने दें? हम तो कहेंगे कि यह जनता का ‘ट्रैफिक फोबिया’ है, ट्रैफिक कानून का ‘डर’ है।
फिर, एक रोज देश को ज्ञात हुआ कि कुछ लोगों को हिंदू प्रतीकों का ‘फोबिया’ (डर) है और विपक्ष समझता है कि सरकार को ‘इकनामी’ का ‘फोबिया’ है!
‘इकनामी’ के ‘फोबिया’ को संभालने के लिए जब एक मंत्री जी एक चैनल में आए, तो कह बैठे कि ‘गुरुत्चाकर्षण’ को खोजने में गणित ने आइंस्टाइन की कोई मदद नहीं की थी!
‘फोबिया’ है ही ऐसी चीज कि घबराहट में आदमी कुछ का कुछ बोल जाता है!

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