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बाखबर: चुपाय मारो दुलहिन

अगली बार शायद दस लाख हों, क्योंकि तब तक अयोध्या सबंधी ‘फैसला’ भी आ चुका होगा! हिंदी वाले चैनल तो अयोध्या के नाम मात्र से ही भक्तों की तरह रोमांचित हो उठते हैं। इस बार कई अंग्रेजी चैनल भी अयोध्या के भक्त हो गए।

Author Published on: November 3, 2019 2:00 AM
अयोध्याअयोध्या में दीपोत्सव (फोटो सोर्स -इंडियन एक्सप्रेस)

सुधीश पचौरी

पावली आई तो यूपी सरकार ने रिकार्ड संख्या में दीपक जलाने का अपना ही पुराना रिकार्ड तोड़ डाला! गिनीज बुक वाले भी क्या करते! इस बार राम की पैड़ी पर पांच लाख इक्यावन हजार दीपक जलाए गए थे। इससे पहले तीन लाख से ऊपर दीये जलाने का रिकार्ड बनाया था। इस बार सीधे पांच लाख से ऊपर। अगली बार शायद दस लाख हों, क्योंकि तब तक अयोध्या सबंधी ‘फैसला’ भी आ चुका होगा! हिंदी वाले चैनल तो अयोध्या के नाम मात्र से ही भक्तों की तरह रोमांचित हो उठते हैं। इस बार कई अंग्रेजी चैनल भी अयोध्या के भक्त हो गए। ऐसे में इतने सारे दीपकों के जलने से होने वाले प्रदूषण पर सवाल कोई क्यों करता?

ऐसे अवसरों पर कई एंकर अचानक साड़ी, बिंदी वाली हो उठती हैं। और कई एंकर सूट छोड़ कुर्ता, जाकेट में आ जाते हैं, मानो सब थोड़ा-थोड़ा हिंदू बन जाते हैं। ‘जैसी बहै बयार पीठ तब तैसी दीजै’ इसी को कहते हैं। इन दिनों वे सीन में अपने को ही पूरी तरह डुबो देते हैं, ताकि प्रभुजी की कृपादृष्टि उन पर किसी तरह पड़ जाए! दिवाली बीती ही थी कि फोकस में कश्मीर आ गया। यूरोपीय संघ के सत्ताईस सासंदों का मन कश्मीर देखने को मानो मचल उठा और हमारे कुछ चैनल उनकी आगमनी करने में लगे रहे। लेकिन आपसी प्रतिस्पर्धा जो न कराए सो थोड़ा। देखते-देखते सत्ताईस देवताओं का कश्मीर दर्शन कामेडी बन गया।

जो कथित रूप से कश्मीर की जनता का हालचाल जानने गए थे, वे हमें डल झील के शिकारों में बैठ सैर करते, ठहाके लगाते दिखे। बाद में कुछ एंकरों ने बताना शुरू किया कि सत्ताईस देवता कहे हैं कि कश्मीर में आतंकवाद का खतरा है, यों सब ठीक-ठाक है।…
वे शिकारे में बैठ मस्ती करें और हमारा विपक्ष हवाई अड्डे से ही वापस कर दिया जाए? कई न्यायप्रिय चैनलों को यह अन्याय काफी बाद में समझ में आया और बाकी की कसर विपक्ष की चोटों ने पूरी कर दी।
पहली बार सत्ता पक्ष के प्रवक्ता-जन हकबकाते दिखे। लोग पूछते रहे कि सरकार कहती रही है कि कश्मीर हमारा अंदरूनी मामला है, तब इसका इस तरह से अंतरराष्ट्रीयकरण क्यों किया जा रहा है? किसने इस टूर को फाइनेंस किया है? सरकार से उसका क्या रिश्ता है?
इन सवालों का कोई सटीक जवाब प्रवक्ताओं के पास नहीं दिखा। पहली बार कुछ भक्त एंकर भी कश्मीर को लेकर की जाती इस अनीति की निंदा करते दिखे।
और धन्य हैं हमारे चैनल! जब कभी ये किसी के पीछे पड़ जाते हैं, तो बड़े से बड़े की ऐसी की तैसी कर देते हैं। यही हुआ। एंकरों ने पूछना शुरू कर दिया कि इस टूर की आयोजिका स्वनामधन्या ‘मादी शर्मा जी’ आखिर हैं कौन? सरकार की वे हंै कौन?उनको सीधे अंदर तक पहुंच रखने का हक किसने दिया?
एक चैनल ने स्वनामधन्या के पते पर छापा मारा, ताकि प्रामाणिक खबर दे सके, लेकिन उनका दफ्तर उसे बंद मिला। किसी ने उनको बताया कि यह हफ्ते बाद खुलेगा!
इसे कहते हैं ‘होम करते हाथ जला लेना’!
पहली बार एक ‘आॅफिशियल’-सा दिखता, पर ‘अनआॅफिशियल’ बताया जाता ‘शो’ एकदम ‘प्लॉप’ नजर आया। सत्ताईस देवता कब विदा हो गए इसकी खबर तक न बनी!एक चर्चक ने अफसोस जताया कि ये लोग ‘पीआर’ तक कायदे से नहीं कर सकते! एक ने तो इसे ‘कठपुतली शो’ भी कहा!
इस बीच हरियाणा में तो सरकार बन गई, लेकिन महाराष्ट्र में लटकी रही। एक दिन खबर आती कि शिवसेना मान गई है, फिर अगले दिन खबर टूटती कि जी नहीं, वह तो फिफ्टी-फिफ्टी पर अड़ी है। सारी निगाहें शिवसेना के संजय राउत के बोलने पर लगी रहीं।

फिर एक सुबह कई चैनल खबर देते रहे कि भाजपा-शिवसेना के बीच सब कुछ तय हो चुका है। शिवसेना को डिप्टी सीएम के साथ तेरह मंत्रालय और मिलने वाले हैं, लेकिन शाम आते-आते संजय राउत फिर भाजपा को फिफ्टी-फिफ्टी के वादे की याद दिलाते दिखे और शुक्रवार की सुबह की खबर यह आई कि शिवसेना के संजय राउत शरद पवार से मिले हैं। उन्हीं के हवाले से एक चैनल ने यह खबर भी दी कि शिवसेना के पास दो तिहाई बहुमत है! परिणाम चाहे जो हो, इतना तो स्पष्ट है कि शिवसेना ने भाजपा की अकड़ ढीली कर दी है।

इसी दौरान पीएमसी बैंक घोटाले की कृपा से छठा खाताधारक भी स्वर्ग सिधार गया। बहुत से खाताधारक आजाद मैदान में धरना देते रहे, प्रोटेस्ट करते रहे, लेकिन अभी तक किसी एक बड़े केंद्रीय नेता के कान पर जूं नहीं रेंगी! न किसी ने भरोसा दिया कि जमा रकम खाताधारकों को वापस मिलेगी। रिजर्व बैंक को कारगर हस्तक्षेप करना था, जो अब तक नहीं किया गया। यह कैसी वित्तीय व्यवस्था है? कौन-सी बैंकिंग प्रणाली है कि लोग अपने ही पैसे के लिए तरस रहे हैं और जो अपने आर्थिक संकट को सह नहीं पा रहे और तिल तिल करके मर रहे हैं! वृहस्पतिवार की सबसे बड़ी खबर इजरायल के एनएसओ द्वारा कई भारतीय पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं तथा दलित एक्टिविस्टों के वाट्सऐप की जासूसी ठहरी! एक चैनल जासूसी के शिकार चार लोगों के पास जा पहुंचा, जो बोले कि हमसे कहा गया है कि कुछ न बोलें। यानी ‘चुपाय मारो दुलहिन, मारा जाए कौआ!’

दिवाली बीती ही थी कि फोकस में कश्मीर आ गया। यूरोपीय संघ के सत्ताईस सासंदों का मन कश्मीर देखने को मानो मचल उठा और हमारे कुछ चैनल उनकी आगमनी करने में लगे रहे। लेकिन आपसी प्रतिस्पर्धा जो न कराए सो थोड़ा।

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